मध्य प्रदेश

निर्माण से जुड़े ठेकेदारों को नगरपालिका ने दिए नोटिस : 84 लाख रुपए से होने वाले 15 निर्माण कार्यों के वर्क आर्डर, 6 माह बाद भी काम शुरू नहीं, नोटिस मिलने से मचा हड़कंप

रिपोर्टर : शिवलाल यादव
रायसेन
शहर के यशवंत नगर वार्ड बारह की सड़कों की भी हालत खराब है। रायसेन शहर के अंदर शहरवासियों से जुड़े अधिकतर काम नगरपालिका के माध्यम से होते हैं। इनमें सड़क, बिजली, पानी और अन्य तरह के विकास कार्य। लेकिन बीते दो सालों से नगरपालिका द्वारा शहर के अंदर कोई विकास कार्य किए गए हो, ऐसा तो कहीं दिखाई नहीं देता है। विकास कार्यों के लिए पैसों की कमी हमेशा ही जिम्मेदारों द्वारा बताई जाती रही हैं। यहां तक तो फिर सब ठीक है।लेकिन नगरपालिका परिषद ने 84 लाख रुपए की लागत वाले 15 निर्माण कार्यों के लिए तो वर्कआर्डर भी जारी कर दिए हैं।
इसके साथ ही इनमें से अधिकतर को 6 महीने का समय भी पूरा हो चुका है।लेकिन जमीनी स्तर पर काम ही शुरू नहीं हो पाए हैं। जबकि ये काम ही इतने छोटे-छोटे हैं कि यदि निर्माण कार्य समय पर शुरू हुआ होता तो, 6 महीने के अंदर का इनका निर्माण कार्य ही पूरा हो जाता। लेकिन हद देखिए की काम ही शुरू नहीं हुआ।
नगरपालिका दे रही सिर्फ नोटिस…
नगरपालिका परिषद की कार्रवाई सिर्फ नोटिस तक सीमित।
निर्माण कार्यों के वर्कआर्डर के बावजूद 6 महीने तक निर्माण कार्य ही शुरु नहीं हो पाने के कारण नगरपालिका परिषद ने बहुत संजीदगी ने से नहीं लिया है। नगरपालिका सिर्फ नोटिस देने का काम कर रही हैं। लेकिन इसके बावजूद कहीं भी कोई निर्माण कार्य शुरू नहीं हो पाया है। इससे शहर विकास की उपेक्षा का अंदाजा लगाया जा सकता है। इस तरह से लोग विकास कार्यों से महरूम बने हुए हैं।
मुख्य मार्ग पर चल रहा निर्माण दो साल बाद भी है अधूरा…
शहर के अंदर गोपालपुर से पठारी जेल तक 6.5 किमी लंबाई वाली सड़क का निर्माण कार्य भी अधूरा पड़ा हुआ है। इसके शहरवासियों को भी परेशान होना पड़ रहा है। रायसेन से टोल नाके तक सड़क अधूरी पड़ी हुई है। इसके चलते हजारों लोग रोजाना परेशान हो रहे हैं। लेकिन पीडब्ल्यूडी सहित जिम्मेदार ठेकेदार को शहर के लोगों की परेशानियों से जैसे कोई सरोकार ही नहीं है।
शहर के ये विकास कार्य अटके, शहरवासी हैं परेशान….
शहर वासियों को सबसे अधिक जरूरत सड़क, नाली की होती है। इन 15 निर्माण कार्यों में से 9 सीसी सड़क और सड़क के रिन्यूवल कोड के हैं। जबकि 5 निर्माण कार्य सीसी नालियों और एक पुलिया निर्माण कार्य का है। जिनके वर्कआर्डर जारी किए जा चुके हैं। इसके बावजूद काम शुरू नहीं हो पाए हैं। इससे खराब सड़कों के कारण हजारों शहरवासियों को परेशान होना पड़ रहा है।
ठेकेदारों के अपने तर्क, बढ़ी मंहगाई….
एक ठेकेदार ने बताया कि टेंडर में 53 प्रतिशत लोहे का चार्ज दर्ज है। जबकि लोहे के कीमत, लेबर और सेंटिंग चार्ज मिलाकर लागत 95 प्रतिशत पर पहुंच जाती है। इतनी ऊंची लागत पर हम कैसे काम करें। लेबर चार्ज 35 प्रतिशत और और सीमेंट के रेट 20 प्रतिशत तक बढ़ गए हैं। ऐसे में निर्माण कार्यों की लागत ही बहुत बढ़ गई है। इसलिए ठेकेदारों काम शुरू नहीं कर पाए।
मार्च महीना निकला बजट नहीं हुआ पास….
नगरपालिका परिषद का कार्यकाल खत्म हो जाने के बाद से ही बजट प्रशासक एवं कलेक्टर अरविंद दुबे द्वारा अनुमोदित किया जा रहा है। वर्ष 2019-20 और वर्ष 2020-21 में परिषद के न होने पर कलेक्टर (प्रशासक) द्वारा बजट का अनुमोदन किया गया। इस बार मार्च का महीना निकल गया। लेकिन बजट का अनुमोदन नहीं हो पाया है। इस बार नगरपालिका परिषद बजट बीते साल से करीब 10 करोड़ रुपए अधिक राशि वाला हो सकता है।
इस संबंध में पीके साहू, प्रभारी सहायक यंत्री, नगरपालिका परिषद रायसेन का कहना है कि शहर में 84 लाख रुपए लागत वाली 15 सड़कें और सीसी नालियों के निर्माण के लिए वर्कआर्डर जारी किए गए थे, लेकिन काम शुरू न होने पर ठेकेदार को कारण बताओ नोटिस जारी किए गए हैं।

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