236वीं जयंती पर गूंजे लोकसंत जूड़ीराम जी के विचार


ब्यूरो चीफ : शब्बीर अहमद
बेगमगंज । चड़ार समाज के गौरव लोकसंत श्री जूड़ीराम जी महाराज की 236वीं जयंती के अवसर पर राष्ट्रीय स्तर पर विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन किया गया।
राष्ट्रीय कार्यालय बेगमगंज, टीकमगढ़, दमोह में श्रद्धा एवं गरिमामय वातावरण में जयंती समारोह आयोजित हुआ।
बेगमगंज में संगोष्ठी के माध्यम से संत जी के विचारों पर विस्तार से चर्चा की गई।
संगोष्ठी को संबोधित करते हुए राष्ट्रीय अध्यक्ष तुलाराम अठ्या ने कहा कि लगभग दो सौ छत्तीस वर्ष पूर्व, जब समाज में शिक्षा के साधन और संस्थान लगभग नहीं थे, उस समय लोकसंत श्री जूड़ीराम जी ने अपने अध्ययन, साधना और बुंदेली में रचित अपने भजनों के माध्यम से समाज में फैले अज्ञानता और अंधकार को दूर करने का महान कार्य किया। उन्होंने कहा कि संत जी के विचारों की शक्ति इतनी प्रबल है कि दो सौ वर्षों के बाद भी उनकी वैचारिक आभा आज भी समाज को दिशा देने का कार्य कर रही है। उनकी जन्मस्थली बरखेरा कलार जिला दमोह में उनको देवतुल्य मान कर उनकी पूजा की जाती है। इस क्षेत्र के 50 से अधिक गांवों में उनके रचित भजन गाए जाते है।
राष्ट्रीय अध्यक्ष ने यह भी घोषणा की कि समाज के बेगमगंज स्थित राष्ट्रीय कार्यालय चड़ार समाज भवन में संत श्री जूड़ीराम जी की प्रतिमा शीघ्र स्थापित की जाएगी, जिससे नई पीढ़ी उनके आदर्शों और विचारों से प्रेरणा ले सके।
वरिष्ठ अधिवक्ता तुलसीराम चड़ार ने संत जूड़ीराम जी के जीवन परिचय पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए उनके सामाजिक, आध्यात्मिक और सांस्कृतिक योगदान को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि संत जी का जीवन समाज के लिए प्रेरणास्रोत है।
रानी अवंतीबाई वि.वि. सागर के सहायक रजिस्ट्रार राकेश कुमार अठ्या ने अपने संबोधन में कहा कि दो सौ वर्ष पूर्व जन्मे संत श्री जूड़ीराम जी ने लोक भजनों के माध्यम से समाज में जागरूकता फैलाने का कार्य किया तथा अपने निर्गुण विचारों से अंधविश्वास और सामाजिक कुरीतियों पर गहरी चोट की। आज आवश्यकता है कि उनके विचारों को समाज के प्रत्येक वर्ग तक पहुँचाया जाए।
संगोष्ठी में अन्य वक्ताओं ने भी संत जूड़ीराम जी के विचारों को वर्तमान संदर्भ में प्रासंगिक बताते हुए समाज में शिक्षा, एकता और जागरूकता को बढ़ावा देने का आह्वान किया।
विचार गोष्ठी को रायसेन जिलाध्यक्ष वृंदावन अठ्या, राष्ट्रीय कार्यालय सचिव भगवत सिंह अठ्या, राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष रामकिशन अठ्या, शिक्षक परसराम अठ्या, भाईसाहब अठ्या, विश्राम सिंह, रामगोपाल चड़ार (देवरीगंज), शिवराज सिंह (घोघरी), रुक्मेश अठ्या ने भी अपने विचार व्यक्त किए। संगोष्ठी में गणमान्य नागरिक एवं समाजसेवी उपस्थित रहे।
कार्यक्रम के अंत में उपस्थित सभी समाज बंधुओं ने संत जूड़ीराम जी के आदर्शों को अपनाने और समाज को संगठित एवं सशक्त बनाने का संकल्प लिया।



