
आचार्य श्री गोपी राम (ज्योतिषाचार्य) जिला हिसार हरियाणा मो. 9812224501
✦••• जय श्री हरि •••✦
🧾 आज का पंचाग 🧾
शनिवार 07 मार्च 2026
शनि देव जी का तांत्रिक मंत्र – ऊँ प्रां प्रीं प्रौं सः शनैश्चराय नमः।।
☄️ *दिन (वार) -शनिवार के दिन क्षौरकर्म अर्थात बाल, दाढ़ी काटने या कटाने से आयु का नाश होता है । अत: शनिवार को बाल और दाढ़ी दोनों को ही नहीं कटवाना चाहिए। *शनिवार के दिन प्रात: पीपल के पेड़ में दूध मिश्रित मीठे जल का अर्ध्य देने और सांय पीपल के नीचे तेल का दीपक जलाने से कुंडली की समस्त ग्रह बाधाओं का निवारण होता है ।
*शनिवार के दिन पीपल के नीचे हनुमान चालीसा पड़ने और गायत्री मन्त्र की àएक माला का जाप करने से किसी भी तरह का भय नहीं रहता है, समस्त बिग़डे कार्य भी बनने लगते है । *शिवपुराण के अनुसार शनि देव पिप्लाद ऋषि का स्मरण करने वाले, उनके भक्तो को कभी भी पीड़ा नहीं देते है इसलिए जिन के ऊपर शनि की दशा चल रही हो उन्हें अवश्य ही ना केवल शनिवार को वरन नित्य पिप्लाद ऋषि का स्मरण करना चाहिए।
*शनिवार के दिन पिप्पलाद श्लोक का या पिप्पलाद ऋषि जी के केवल इन तीन नामों (पिप्पलाद, गाधि, कौशिक) को जपने से शनि देव की कृपा मिलती है, शनि की पीड़ा निश्चय ही शान्त हो जाती है । 🔮 *शुभ हिन्दू नववर्ष 2025 विक्रम संवत : 2082 कालयक्त विक्रम : 1947 नल* 👸🏻 शिवराज शक 352_
🌐 कालयुक्त संवत्सर विक्रम संवत 2082,
✡️ शक संवत 1947 (विश्वावसु संवत्सर), चैत्र
☮️ गुजराती सम्वत : 2081 नल
☸️ काली सम्वत् 5126
🕉️ संवत्सर (उत्तर) क्रोधी
☣️ आयन – उत्तरायण
🌧️ ऋतु – सौर बसंत ऋतु
⛈️ मास – चैत्र मास
🌖 पक्ष – कृष्ण पक्ष
📆 तिथि – शनिवार चैत्र माह के कृष्ण पक्ष चतुर्थी तिथि 07:17 PM तक उपरांत पंचमी
✏️ तिथि स्वामी – चतुर्थी के देवता हैं शिवपुत्र गणेश। इस तिथि में भगवान गणेश का पूजन से सभी विघ्नों का नाश हो जाता है। यह खला तिथि हैं।
💫 नक्षत्र- नक्षत्र चित्रा 11:15 AM तक उपरांत स्वाति
🪐 नक्षत्र स्वामी – चित्रा नक्षत्र के स्वामी मंगल ग्रह हैं। इस नक्षत्र नक्षत्र देवता (अधिष्ठाता) विश्वकर्मा (दैवीय शिल्पकार और निर्माता)।
⚜️ योग – वृद्धि योग 06:52 AM तक, उसके बाद ध्रुव योग
⚡ प्रथम करण : करण बालव 07:17 PM तक
✨ द्वितीय करण : कौलव पूर्ण रात्रि तक
🔥 गुलिक काल : – शनिवार को शुभ गुलिक प्रातः 6: 53 से 8:19 बजे तक ।
⚜️ दिशाशूल – शनिवार को पूर्व दिशा का दिकशूल होता है ।यात्रा, कार्यों में सफलता के लिए घर से अदरक खाकर, घी खाकर जाएँ ।
🤖 राहुकाल -सुबह – 9:44 से 11:09 तक।राहु काल में कोई भी शुभ कार्य नहीं करना चाहिए |
🌞 सूर्योदयः – प्रातः 06:26:00
🌅 सूर्यास्तः – सायं 06:03:00
👸🏻 ब्रह्म मुहूर्त : शाम को 29:02 मिनट से रात्रि 29:51 बजे तक
🌇 प्रातः सन्ध्या : रात्रि को 29:26 मिनट से सुबह 06:40 बजे तक
🌟 अभिजित मुहूर्त : दोपहर को 12:09 मिनट से दोपहर 12:56 बजे तक
🔯 विजय मुहूर्त : दोपहर को 14:30 मिनट से दोपहर 15:17 बजे तक
🐃 गोधूलि मुहूर्त : शाम को 18:22 मिनट से शाम 18:47 बजे तक
🌌 सायाह्न सन्ध्या : शाम को 18:25 मिनट से शाम 19:38 बजे तक
💧 अमृत काल : शाम को 27:53 मिनट से शाम 29:38 बजे तक
🗣️ निशिता मुहूर्त : शाम को 24:07 मिनट से शाम 24:56 बजे तक
🚓 यात्रा शकुन-शर्करा मिश्रित दही खाकर घर से निकलें।
👉🏼 आज का मंत्र-ॐ प्रां प्रीं प्रौं स: शनयै नम:।
🤷🏻♀️ आज का उपाय-शनि मंदिर में सरसों का तेल चढ़ाएं।
🪵 *वनस्पति तंत्र उपाय-शमी के वृक्ष में जल चढ़ाएं। ⚛️ *पर्व एवं त्यौहार – सर्वार्थ सिद्धि योग/ विडाल योग/ भारतीय गुरु परमहंस योगानंद जी स्मृति दिवस, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री गोविंद बल्लभ पंत स्मृति दिवस, रविशंकर शर्मा पुण्य तिथि, कार्तिकेयन पुण्य तिथि, भारतीय वित्त मंत्री टी.टी कृष्णमाचारी स्मृति दिवस, भारत के प्रसिद्ध ‘महर्षि’ रामप्रसाद शर्मा जन्म दिवस, साहित्यकार हीरानंद सच्चिदानंद वात्स्यायन ‘अज्ञेय’ जयन्ती, नरिमन जमशेदजी जयन्ती, राष्ट्रीय अनाज दिवस, जन औषधि दिवस, भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के वरिष्ठ अभिनेता गुलाब नबी आजाद जयन्ती, भारतीय अभिनेता अनुपम खेर जन्म दिवस
✍🏼 *तिथि विशेष – चतुर्थी तिथि को मूली एवं पञ्चमी तिथि को बिल्वफल त्याज्य बताया गया है। इस चतुर्थी तिथि में तिल का दान और भक्षण दोनों त्याज्य होता है। इसलिए चतुर्थी तिथि को मूली और तिल एवं पञ्चमी को बिल्वफल नहीं खाना न ही दान करना चाहिए। चतुर्थी तिथि एक खल और हानिप्रद तिथि मानी जाती है। इस चतुर्थी तिथि के स्वामी गणेश जी हैं तथा यह चतुर्थी तिथि रिक्ता नाम से विख्यात मानी जाती है। यह चतुर्थी तिथि शुक्ल पक्ष में अशुभ तथा कृष्ण पक्ष में शुभफलदायिनी मानी गयी है। 🌷 *_Vastu tips* 🌹
दीपक जलाते समय बत्ती की दिशा भी महत्वपूर्ण होती है। पूर्व दिशा की ओर मुख करके दीपक जलाने से स्वास्थ्य और आयु में वृद्धि होती है। वहीं उत्तर दिशा की ओर बत्ती रखने से धन लाभ और सफलता के योग बनते हैं।
*सुख-शांति के लिए विशेष उपाय अगर घर में तनाव या कलह का माहौल हो, तो सफेद रुई की बत्ती घी के दीपक में जलाएं। मंगलवार और शनिवार को हनुमान जी के सामने चमेली के तेल का दीपक जलाना नकारात्मकता दूर करने में सहायक माना गया है। *आर्थिक तंगी दूर करने का उपाय दीपक में इस्तेमाल की जाने वाली छोटी सी रुई की बत्ती भी जीवन पर बड़ा प्रभाव डाल सकती है। अगर आप आर्थिक परेशानी से राहत पाना चाहते हैं, तो इसके लिए रुई की बत्ती बनाने से पहले उसमें थोड़ा चंदन लगाएं और फिर घी के साथ दीपक जलाएं। इससे घर में सुगंध और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।
❇️ जीवनोपयोगी कुंजियां ⚜️
सफेद बाल काले करने के लिए एक लोहे के बर्तन में दो चम्मच मेहंदी पाउडर, 4 चम्मच इंडिगो पाउडर, एक चम्मच कथा पाउडर लेकर एक अलग बर्तन में एक चम्मच चाय पत्ती और एक चम्मच कॉफी पाउडर और एक चम्मच कथा पाउडर डालकर उबाल लें।
*अब जिस बर्तन में हमने मेहंदी पाउडर लिया है उसमें कत्था, चायपत्ती और कॉफी पाउडर का पानी डालकर घोल लें, फिर इसे रात भर भीगने के लिए छोड़ दें। अब इसमें 4 चम्मच इंडिगो पाउडर डालकर बचा हुआ कॉफी, चायपत्ती और कत्था पाउडर वाला पानी डाल कर अच्छे से मिक्स करे अपने पूरे बालों में लगाएं और 2 घंटे बाद बाल को ठंडे पानी से धो लें। बालो को काला करने के लिए क्या खाए? अगर हम प्रॉपर डाइट लें और अपने खाने में पालक, सोयाबीन और अंडे का इस्तेमाल करें तो हम अपने काले बाल फिर से पा सकते हैं। आज इस लेख में जानेंगे बालों को काला करने के लिए क्या खाएं। *बालों को काला करने के लिए क्या खाना चाहिए और डाइट में किन चीजों को शामिल करना चाइए तो इसके लिए आइए जन लेते है पालक, अंडा, सोयाबीन, शकरकंद, आंवला, छोले, चिकन, दाल, सेलमैन फिश, विटामिन ई और मैग्नीशियम युक्त आहार लेना चाहिए।
🍻 आरोग्य संजीवनी 🍺
भूमि आंवला – सबसे ताकतवर औषधि अगर लीवर के लिए किसी एक जड़ी-बूटी को ‘राजा’ कहा जाए, तो वो भूमि आंवला है। यह लीवर की सूजन कम करने और हेपेटाइटिस जैसी बीमारियों से लड़ने में सबसे तेज असर दिखाती है।
*कैसे लें: इसका चूर्ण या काढ़ा बनाकर सुबह खाली पेट लेना सबसे फायदेमंद है। *कुटकी कुटकी स्वाद में कड़वी जरूर होती है, लेकिन यह लीवर के टॉक्सिन्स (गंदगी) को बाहर निकालने के लिए मशहूर है। यह फैटी लीवर के ग्रेड को कम करने में मदद करती है।
*पुनर्नवा जैसा कि नाम से ही पता चलता है— ‘पुनः’ + ‘नवा’ यानी जो शरीर को फिर से नया बना दे। लीवर की सूजन (Hepatomegaly) को कम करने के लिए पुनर्नवा से बेहतर कुछ नहीं है। *कालमेघ कालमेघ लीवर की कोशिकाओं की रक्षा करता है। इसे ‘कड़वे का राजा’ भी कहते हैं और यह डाइजेशन सुधार कर लीवर के लोड को कम करता है।
*बाजार में उपलब्ध सबसे भरोसेमंद आयुर्वेदिक दवाएं *अगर आप जड़ी-बूटियां नहीं ढूंढ पा रहे हैं, तो आयुर्वेद की ये शास्त्रीय दवाएं डॉक्टर की सलाह से ले सकते हैं:
*कुमार्यासव (Kumaryasava): यह एक लिक्विड दवा है जो लीवर और तिल्ली (Spleen) दोनों के लिए वरदान है। *आरोग्यवर्धिनी वटी (Arogyavardhini Vati): यह फैटी लीवर की सबसे प्रसिद्ध और कारगर टैबलेट है।
पुनर्नवासव (Punarnavasava): अगर लीवर के साथ-साथ शरीर में सूजन भी है, तो यह बहुत जल्दी आराम देती है।
*Liv-52 (Himalaya): यह दुनिया भर में सबसे ज्यादा इस्तेमाल होने वाली आयुर्वेदिक लीवर टॉनिक है। 📚 *गुरु भक्ति योग* 🕯️ समुद्र मंथन के पश्चात, जब असुरों ने देवताओं से अमृत छीनने का प्रयास किया, तब भगवान विष्णु ने मोहिनी रूप धारण कर देवताओं को अमृत पान कराया। असुर पराजित होकर पाताल लोक में छिप गए। किंतु कथा यहाँ समाप्त नहीं हुई। *भगवान विष्णु ने असुरों का अंत करने और उन्हें मोहपाश में बांधने के लिए पाताल में कुछ दिव्य और मायावी अप्सराएं प्रकट कीं। परंतु विडंबना देखिए! स्वयं श्री हरि विष्णु भी अपनी ही रची उस प्रबल माया के वशीभूत हो गए और उन अप्सराओं के साथ पाताल लोक में ही निवास करने लगे।
समय बीतने के साथ, उन अप्सराओं से विष्णु जी के कई पुत्र उत्पन्न हुए। पिता साक्षात नारायण थे, किंतु पाताल के वातावरण और माया के प्रभाव से वे पुत्र अत्यंत उग्र, अहंकारी और अत्याचारी निकले। वे अपने असीमित बल के मद में चूर होकर तीनों लोकों में हाहाकार मचाने लगे। ऋषि-मुनि और देवता भयभीत हो गए। जब पाप की अति हो गई, तब ब्रह्मा जी के नेतृत्व में सभी देव कैलाश पहुँचे और महादेव से रक्षा की गुहार लगाई।
*देवताओं की करुण पुकार सुनकर भोलेनाथ ने एक ऐसा रूप धारण किया जो शक्ति, स्थिरता और धर्म का प्रतीक था— नीले वर्ण का विशालकाय वृषभ! रूप: उनकी देह नीले तेज से दमक रही थी।*
गर्जना: उनके खुरों की थाप से धरती फटने लगी और उनकी डकार से पाताल लोक की दीवारें कांप उठीं।
उद्देश्य: अधर्म का नाश और नारायण की चेतना को पुनः जाग्रत करना।
*महादेव का यह वृषभ रूप सीधा पाताल में उतरा। वहाँ विष्णु के उन उग्र पुत्रों ने वृषभ पर प्रहार किया, लेकिन शिव की दिव्य शक्ति के आगे वे तिनके के समान बिखर गए। एक-एक कर महादेव ने उन सभी का अंत कर दिया जो धर्म की मर्यादा लाँघ रहे थे। अपने पुत्रों का अंत होते देख, माया के वशीभूत विष्णु जी अत्यंत क्रोधित हो गए। उन्होंने अपना सुदर्शन चक्र उठा लिया और वृषभ रूपी शिव पर प्रहार करने को उद्यत हुए। *तभी एक क्षण के लिए समय ठहर गया। वृषभ की आँखों में समाहित अनंत ब्रह्मांड के दर्शन करते ही विष्णु जी के भीतर का मोह छिन्न-भिन्न हो गया। उन्हें स्मरण हो आया कि यह तो स्वयं उनके आराध्य महादेव हैं, जो उन्हें इस मायावी संसार से निकालने आए हैं।
महादेव बोले— “हे नारायण! अपनी रची माया को पहचानिए। यह संसार और आपके पुत्र, सब इस लीला का एक क्षणिक भाग थे। अब समय है वैकुंठ लौटने का।”
*_सत्य का बोध होते ही विष्णु जी ने महादेव से क्षमा मांगी और अपनी माया समेटकर पुनः वैकुंठ प्रस्थान किया। शिव का यह वृषभ अवतार हमें सिखाता है कि जब ज्ञान के प्रतीक (विष्णु) भी माया के वशीभूत हो जाएं, तब वैराग्य और शक्ति के स्वामी (शिव) ही सत्य का मार्ग दिखाते हैं।
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⚜️ चतुर्थी तिथि में तिल का दान और भक्षण दोनों भी त्याज्य है। आज गणपति, गजानन, विघ्नहर्ता श्री गणेशजी की पूजा का विशेष महत्त्व है। आज गणपति की पूजा के उपरान्त मोदक, बेशन के लड्डू एवं विशेष रूप से दूर्वादल का भोग लगाना चाहिये इससे मनोकामना की सिद्धि तत्काल होती है। शास्त्रानुसार जिस व्यक्ति का जन्म चतुर्थी तिथि को होता है वह व्यक्ति बहुत ही भाग्यशाली होता है। चतुर्थी तिथि में जन्म लेने वाला व्यक्ति बुद्धिमान एवं अच्छे संस्कारों वाला होता है। ऐसे लोग अपने मित्रों के प्रति प्रेम भाव रखते हैं तथा इनकी सन्तानें अच्छी होती है। इन्हें धन की कमी का सामना नहीं करना पड़ता है और ये सांसारिक सुखों का पूर्ण उपभोग करते हैं।।

