मध्य प्रदेश

सिंगनाथ मंदिर कोरिडोर विकसित किया जाएं

रिपोर्टर : कमलेश अवधिया
साईखेड़ा। संदूक घाट राजस्व दृष्टि से जिले का पहला गांव बूथ क्रमांक 1 गाडरवारा विधानसभा दादा धूनीवालो का प्राकट्य स्थल संदूक के समीप
यह पुरातत्व महत्व की मूर्ति सिंग नाथ शिव मंदिर संदूक घाट नर्मदा तट व्लाक साईखेडा जिला नरसिंहपुर में मुग्लकालीन साम्रराज्य में हमारे देवी देवताऔ पर किये गये क्रूर प्रहार का प्रमाण है जो आज भी गवाही देते है। भग्नाविषेश जहा पर हमारी आस्था विश्वास के केन्द्र हमारे मठ मंदिर खेरापति जो आज भी प्रमाण सिद्ध है हमारे पूर्वजो ने संभाल कर आज तक संजोकर रखा और हमारे देवी देवताऔ के भग्न अवशेष के तौर नंदी की अनेक मूर्ति भगवान भोलेनाथ माता पार्वती जी शिव परिवार विशवमोहिनी की नृत्य मुद्रा में मूर्ति आदि अनेक मूर्तियां जो बहुत पुराने कालखंड के प्रमाण सिद्ध है यह स्थान सिंगनाथ शिव मंदिर के नाम से प्रसिद्ध है जो आज की पीढीं के लिए ऐतिहासिक महत्व का पर्यटन स्थल के तौर पर विकसित किया जा सकता है । क्योंकि नर्मदा जी का किनारा प्राकृतिक पर्यावरण से हरा भरा क्षेत्र दुनिया की सबसे उपजाऊ भूमि नर्मदा का कछार एवं संदूक घाट ग्राम संदूक में प्रसिद्ध संत घाटवाले महराज जी की तपस्थली एवं समाधी स्थल है इस स्थान से नीचे आधा किलो मीटर दूर दादा धूनीवालो का प्राकट्य स्थल बिशाल वरगद का वृक्ष वह भी बहुत पुराना बटवृक्ष जिसके नीचे दादा धूनीवालो की तपस्थली दरबार दादाजी की चरण पादुका आज भी स्थापित है एवं उसके नीचे 500 मीटर की दूरी पर मोहण घाट मोनी महाराज जी की तपस्थली एवं समाधी स्थल उसके नीचे 500 मीटर पर नर्मदा एवं दुधी नदी संगम स्थल पांसी घाट टाटम्वरी संत पांसी वाले महाराज जी का आश्रम जहा प्रत्येक वर्ष बिशाल यज्ञ होता है यह मनोरम पोराणिक पुरातत्व महत्व की इस नर्मदा तट का वर्णन नर्मदा पुराण में भी बर्णित है यह स्थान साईखेडा तहसील मुख्यालय से पश्चिम में लगभग 15 किलोमीटर की दूरी पर है। बीच में झिकोली नर्मदा तट पर पुल निर्मित है जो रायसेन जिले की उदयपुरा तहसील मुख्यालय से जोडता हुआ भोपाल राजमार्ग से जुडता है झिकोली नर्मदा घाट से पश्चिम में अनेक आश्रम मठ मंदिर स्थापित है जहा पर मकर संक्राति एवं समय समय पर बिशाल मेला माह की अमावस ओर पूर्णिमा उत्सव पर स्वमेव श्रद्धां से लगते है उसके नीचे निवावर घाट है यहा भी बिशाल महंत मठ मंदिर गोशाला एवं अनेक संतो की तपस्थली एवं समाधी स्थल है उसके नीचे ग्राम संदूक घाट है जहा पर यह अद्भुत महिला संत मोनी दादी जी की तपस्थली एवं समाधी स्थल सिंगनाथ मंदिर स्थान पर समाधी चबूतरा स्थापित है आज इस स्थान का संक्षिप्त परिचय एवं एतिहासिक महत्व को संयोजित कर गौरवान्वित महसूस कर आप सभी समाज बन्धु सादर प्रार्थना है कि उक्त नर्मदा तट को पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग द्वारा सर्वे कराकर पर्यटन स्थल सिंगनाथ कोरिडोर विकसित कराने सहयोग प्रदान करें एवं क्षेत्रीय जनप्रतिनिधि गण भी क्षेत्र के विकास में अपना महत्वपूर्ण योगदान दें।

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