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Today Panchang आज का पंचांग बुधवार, 29 अप्रैल 2026

आचार्य श्री गोपी राम (ज्योतिषाचार्य) जिला हिसार हरियाणा मो. 9812224501

जय श्री हरि

🧾 आज का पंचांग 🧾

बुधवार 29 अप्रैल 2026ॐ एकदन्ताय विद्महे वक्रतुंडाय धीमहि तन्नो बुदि्ध प्रचोदयात ।।

☄️ दिन (वार) – बुधवार के दिन तेल का मर्दन करने से अर्थात तेल लगाने से माता लक्ष्मी प्रसन्न होती है धन लाभ मिलता है।*बुधवार का दिन विघ्नहर्ता गणेश का दिन हैं। बुधवार के दिन गणेश जी के परिवार के सदस्यों का नाम लेने से जीवन में शुभता आती है। *बुधवार के दिन गणेश जी को रोली का तिलक लगाकर, दूर्वा अर्पित करके लड्डुओं का भोग लगाकर उनकी की पूजा अर्चना करने से सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं।🔮 शुभ हिन्दू नववर्ष 2026 विक्रम संवत : 2083 सिद्धार्थी विक्रम : 1969 शर्वरी🌐 रौद्र संवत्सर विक्रम संवत 2083,✡️ शक संवत 1948 (पराभव संवत्सर), चैत्र☮️ गुजराती सम्वत : 2082 पिङ्गल☸️ काली सम्वत् 5127🕉️ संवत्सर (बृहस्पति) पराभव☣️ आयन – उत्तरायण☂️ ऋतु – सौर ग्रीष्म ऋतु☀️ मास – बैशाख मास🌖 पक्ष – शुक्ल पक्ष📅 तिथि – बुधवार बैशाख माह के शुक्ल पक्ष त्रयोदशी तिथि 07:51 PM तक उपरांत चतुर्दशी✒️ तिथि स्वामी – त्रियोदशी तिथि के स्वामी कामदेव जी है त्रयोदशी तिथि के स्वामी कामदेव जी हैं। कामदेव प्रेम के देवता माने जाते है ।💫 नक्षत्र- नक्षत्र हस्त 12:16 AM तक उपरांत चित्रा🪐 नक्षत्र स्वामी – हस्त नक्षत्र के स्वामी ग्रह चंद्रमा हैं। तथा देवता सविता आदित्य (सूर्य का एक रूप, जो ज्ञान और सृजन के देवता हैं)।⚜️ योग – हर्षण योग 08:51 PM तक, उसके बाद वज्र योग⚡ प्रथम करण : कौलव 07:19 AM तक✨ द्वितीय करण : तैतिल 07:52 PM तक, बाद गर🔥 गुलिक काल : – बुधवार को शुभ गुलिक 11:10 से 12:35 बजे तक⚜️ दिशाशूल – बुधवार को उत्तर दिशा में दिशा शूल होता है ।इस दिन कार्यों में सफलता के लिए घर से सुखा / हरा धनिया या तिल खाकर जाएँ🤖 राहुकाल : – बुधवार को राहुकाल दिन 12:35 से 2:00 तक । राहु काल में कोई भी शुभ कार्य नहीं करना चाहिए🌞 सूर्योदयः – प्रातः05:33:00🌅 सूर्यास्तः – सायं 06:31:00👸🏻 ब्रह्म मुहूर्त : प्रातः 04:16 ए एम से 04:59 ए एम🌇 प्रातः सन्ध्या : प्रातः 04:38 ए एम से 05:42 ए एम🌟 अभिजित मुहूर्त : कोई नहीं✡️ विजय मुहूर्त : दोपहर 02:31 पी एम से 03:24 पी एम🐃 गोधूलि मुहूर्त : शाम 06:54 पी एम से 07:15 पी एम🏙️ सायाह्न सन्ध्या : शाम 06:55 पी एम से 08:00 पी एम💧 अमृत काल : शाम 05:51 पी एम से 07:34 पी एम🗣️ निशिता मुहूर्त : रात्रि 11:57 पी एम से 12:40 ए एम, अप्रैल 30⭐ सर्वार्थ सिद्धि योग : प्रातः 05:42 ए एम से 12:16 ए एम, अप्रैल 30❄️ रवि योग : दोपहर 12:16 ए एम, अप्रैल 30 से 05:41 ए एम, अप्रैल 30🚓 यात्रा शकुन- बुधवार को हरे फ़ल खाकर अथवा दूध पीकर यात्रा पर निकलें।👉🏼 आज का मंत्र-ॐ ब्रां ब्रीं ब्रौं स: बुधाय नम:।🤷🏻‍♀️ आज का उपाय-किसी बटुक को सवाकिलो साबुत मूंग परिपूरित कांस्य पात्र भेंट करें।🪵 वनस्पति तंत्र उपाय-अपामार्ग के वृक्ष में जल चढ़ाएं।⚛️ पर्व एवं त्यौहार – सर्वार्थ सिद्धि योग/ रवि योग/ विडाल योग/ भगवान श्री परशुराम जयन्ती/ लाल किला आधारशिला स्थापना दिवस, रामानन्द सागर के सीरियल ‘रामायण’ में सीता का किरदार निभाने वाली अभिनेत्री दीपिका चिखालिया जन्म दिवस, क्रांतिकारी राजा महेन्द्र प्रताप शाहिद दिवस, क्रिकेटर आशीष नेहरा जन्म दिवस, तबला वादक अल्ला रक्खा ख़ाँ जन्म दिवस, भारतीय कवि भारतीदासन जन्म दिवस, विश्व स्टेशनरी दिवस, अंतर्राष्ट्रीय गाइड डॉग दिवस, अंतर्राष्ट्रीय शोर जागरूकता दिवस, राष्ट्रीय झींगा स्कैम्पी दिवस, शांति गुलाब दिवस, बसव जयन्ती, गंगा एक्सप्रेसवे का उद्घाटन दिवस, प्रसिद्ध भारतीय चित्रकार राजा रवि वर्मा जन्म दिवस, अंतर्राष्ट्रीय नृत्य दिवस, विश्व वन्यजीव कोष वर्षगांठ✍🏼 *तिथि विशेष:- त्रयोदशी तिथि को बैंगन त्याज्य होता है। अर्थात आज त्रयोदशी तिथि में भूलकर भी बैंगन की सब्जी या भर्ता नहीं खाना चाहिए। त्रयोदशी तिथि जयकारी अर्थात विजय दिलवाने वाली तिथि मानी जाती है। यह त्रयोदशी तिथि सर्वसिद्धिकारी अर्थात अनेकों क्षेत्रों में सिद्धियों को देनेवाली तिथि मानी जाती है। यह त्रयोदशी तिथि जया नाम से विख्यात मानी जाती है। यह त्रयोदशी तिथि शुक्ल पक्ष में शुभ और कृष्ण पक्ष में अशुभ फलदायिनी होती है। 🗽 *_Vastu tips* 🗼रात को सोते समय पर्स, पैसे, मोबाइल, किताबें और जूते-चप्पल पास रखने से वास्तु दोष पैदा होता है, जिससे तनाव और नकारात्मक प्रभाव बढ़ता है। इस वास्तु टिप्स को अपनाकर मानसिक शांति, बेहतर स्वास्थ्य और आर्थिक स्थिरता पाई जा सकती है। चलिए आचार्य श्री गोपी राम से इसके बारे में यहां विस्तार से जानते हैं।*रात को सोते समय सावधानी वास्तु शास्त्र कहता है कि बेहतर और सुकून भरी नींद के लिए रात को सोते समय व्यक्ति को कुछ चीजों को खुद से दूर रखना चाहिए। ये चीजें सिरहाने या बेड के पास रखकर सोने से से व्यक्ति कई तरह की आर्थिक और मानसिक परेशानियों से घिरा रहता है। 🔰 *जीवनोपयोगी कुंजियां* ⚜️ आयुर्वेद के अनुसार, भोजन को धीमी आंच पर पकाने से उसका स्वाद और पोषण बेहतर बना रह सकता है। मिट्टी के बर्तनों में खाना धीरे पकता है, जिससे भोजन अधिक संतुलित और सुपाच्य बन सकता है। *सस्ते और आसानी से उपलब्ध मिट्टी के बर्तन अन्य धातुओं की तुलना में किफायती होते हैं और विभिन्न आकारों में आसानी से मिल जाते हैं। इन्हें स्थानीय बाजार या ऑनलाइन माध्यम से खरीदा जा सकता है।*स्वाद में प्राकृतिक सुधार मिट्टी के बर्तनों में पकाया गया भोजन हल्की प्राकृतिक सुगंध के साथ आता है, जिससे खाने का स्वाद अलग और पारंपरिक अनुभव देता है। *विविध आकार और उपयोग मिट्टी के बर्तन विभिन्न आकार और डिजाइन में उपलब्ध होते हैं। कुल्हड़ में चाय पीना या मटकी का पानी उपयोग करना पारंपरिक और आकर्षक अनुभव देता है।💊 *आरोग्य संजीवनी* 🩸पेशाब के रंग का सामान्य अर्थ हल्का पीला या स्ट्रॉ रंग आमतौर पर सामान्य हाइड्रेशन को दर्शाता है।*गाढ़ा पीला रंग शरीर में पानी की कमी का संकेत हो सकता है। *नारंगी रंग कभी-कभी कुछ दवाइयों, भोजन या लिवर से जुड़ी स्थितियों के कारण दिखाई दे सकता है।*भूरा या चाय जैसा रंग कुछ स्वास्थ्य स्थितियों या डिहाइड्रेशन से जुड़ा हो सकता है। *गुलाबी या लाल रंग कभी-कभी भोजन (जैसे चुकंदर) या अन्य कारणों से हो सकता है, लेकिन यदि यह बार-बार दिखे तो डॉक्टर से परामर्श लेना चाहिए।*नीला या हरा रंग दुर्लभ होता है और कुछ दवाइयों या फूड कलर के कारण हो सकता है। *पेशाब की गंध से जुड़े संकेत तेज या असामान्य गंध कभी-कभी संक्रमण या डिहाइड्रेशन से जुड़ी हो सकती है।*हल्की मीठी गंध कुछ स्थितियों में ब्लड शुगर स्तर से संबंधित हो सकती है। *मछली जैसी गंध दुर्लभ मामलों में मेटाबॉलिक कारणों से जुड़ी हो सकती है।*दवाइयों या विटामिन लेने के बाद गंध में बदलाव सामान्य हो सकता है। 📖 *गुरु भक्ति योग* 🕯️ गरुड़ पुराण में मृत्यु, आत्मा और पुनर्जन्म के संबंध में विस्तार से बताया गया है। भगवान विष्णु ने अपने पक्षी गरुड़ राज को जन्म-मृत्यु का जो ज्ञान दिया था उसे ही गरुड़ पुराण में संग्रहित किया गया है। गरुड़ पुराण में यह भी जानकारी दी गई है कि मृत्यु के ठीक बात आत्मा के साथ क्या होता है। खासकर मृत्यु के बाद के 13 दिन आत्मा के लिए बेहद अहम होते हैं। ऐसे में आज हम आपको बताने वाले हैं कि मृत्यु के 13 दिनों के भीतर आत्मा कहां रहती है, किन परिस्थितियों का सामना आत्मा को करना पड़ता है और 13 दिन के बाद कहां जाती है। *मृत्यु के बाद 13 दिनों तक आत्मा का प्रवास गरुड़ पुराण में वर्णित है कि मृत्यु के तुरंत बाद आत्मा यमलोक के लिए प्रस्थान नहीं करती। 13 दिनों तक आत्मा अपने घर के लोगों के बीच ही रहती है और आत्मा को मोह, अनिश्चितता का अनुभव होता रहता है। आत्मा ने जीवित होते हुए जो अच्छे-बुरे कर्म किए होते हैं उन पर विचार करती है। इन 13 दिनों के भीतर घर के लोगों को मृतक की उपस्थिति का अहसास होता रहता है।यमदूत आत्मा को छोड़ते हैं परिजनों के पास गरुड़ पुराण में बताया गया है कि मृत्यु के बाद यमदूत आत्मा को ले जाते हैं और कुछ समय बाद वापस उसे उसके घर पर छोड़ देते हैं। ऐसा इसलिए किया जाता है कि आत्मा अंतिम संस्कार और पिंडदान की आहुति को ग्रहण कर सके।*पिंडदान और पाथेय मृत्यु के 13 दिनों के भीतर घर के लोग मृत व्यक्ति का पिंडदान और उसके निमित्त तर्पण करते हैं। आचार्य श्री गोपी राम और गरुड़ पुराण के अनुसार पिंडदान करने से आत्मा को यमलोक की लंबी यात्रा तय करने के लिए पाथेय मिलता है। पाथेय यानि यात्रा करने के लिए पर्याप्त भोजन और शक्ति। जो लोग अपने परिजनों का पिंडदान और तर्पण नहीं करते उने पूर्वजों की आत्मा भटकती रहती है, इसलिए 13 दिनों के भीतर पिंडदान करना बेहद आवश्यक माना गया है। *तेरहवीं क्यों है आवश्यक गरुड़ पुराण के अनुसार मृत्यु के 13वें दिन पर संपिंडीकरण और अन्य संस्कार अवश्य पूरे किए जाने चाहिए। संपिडीकरण के बाद ही आत्मा को यमलोक की यात्रा के लिए अनुमति मिलती है और आत्मा परिजनों के मोह से मुक्त होकर आगे बढ़ जाती है।*गरुड़ पुराण का पाठ अब आप जान गए होंगे कि मृत्यु के 13 दिनों तक आत्मा घर के लोगों के बीच ही रहती है। इसलिए इन 13 दिनों के भीतर गरुड़ पुराण का पाठ घर में करना शुभ माना जाता है। गरुड़ पुराण का पाठ करके आत्मा को मोक्ष प्राप्त करने और मोह के बंधन तोड़ने में मदद मिलती है। ◄┉┉┉┉┉┉༺✦ᱪ✦༻┉┉┉┉┉┉► ⚜️ त्रयोदशी तिथि के देवता मदन (कामदेव) हैं। शास्त्रानुसार भगवान कृष्ण और रुक्मिणी के पुत्र हैं भगवान कामदेव। कामदेव प्रेम और आकर्षण के देवता माने जाते हैं। जिन पुरुषों अथवा स्त्रियों में काम जागृत नहीं होता अथवा अपने जीवन साथी के प्रति आकर्षण कम हो गया है, उन्हें आज के दिन भगवान कामदेव का उनकी पत्नी रति के साथ पूजन करके उनके मन्त्र का जप करना चाहिये। कामदेव का मन्त्र – ॐ रतिप्रियायै नम:। अथवा – ॐ कामदेवाय विद्महे रतिप्रियायै धीमहि। तन्नो अनंग: प्रचोदयात्। *आज की त्रयोदशी तिथि में सपत्निक कामदेव की मिट्टी कि प्रतिमा बनाकर सायंकाल में पूजा करने के बाद उपरोक्त मन्त्र का जप आपका वर्षों का खोया हुआ प्रेम वापस दिला सकता है। आपके चेहरे की खोयी हुई कान्ति अथवा आपका आकर्षण आपको पुनः प्राप्त हो सकता है इस उपाय से। जो युवक-युवती अपने प्रेम विवाह को सफल बनाना चाहते हैं उन्हें इस उपाय को करना चाहिये। जिन दम्पत्तियों में सदैव झगडा होते रहता है उन्हें अवश्य आज इस उपाय को करना चाहिये।

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