
आचार्य श्री गोपी राम (ज्योतिषाचार्य) जिला हिसार हरियाणा मो. 9812224501
✦••• जय श्री हरि •••✦
🧾 आज का पंचांग 🧾
रविवार 01 मार्च 2026
01 मार्च 2026 दिन रविवार को फाल्गुन मास के शुक्ल पक्ष कि त्रयोदशी तिथि है। आज प्रदोष का पावन व्रत भी है। आज रवियोग भी है। साथ ही आज पूर्वसर्वार्थसिद्धियोग भी है। आप सभी सनातनियों को “प्रदोष के पावन व्रत” की हार्दिक शुभकामनायें।।
*भगवान सूर्य जी का मंत्र : ऊँ घृणि सूर्याय नम: ।। 🌠 *रविवार को की गई सूर्य पूजा से व्यक्ति को घर-परिवार और समाज में मान-सम्मान की प्राप्ति होती है। रविवार के दिन उगते हुए सूर्य को देव को एक ताबें के लोटे में जल, चावल, लाल फूल और रोली डालकर अर्ध्य करें।
*इस दिन आदित्य ह्रदय स्रोत्र का पाठ करें एवं यथा संभव मीठा भोजन करें। सूर्य को आत्मा का कारक माना गया है, सूर्य देव को जल देने से पितृ कृपा भी मिलती है। *रविवार के दिन भैरव जी के दर्शन, आराधना से समस्त भय और संकट दूर होते है, साहस एवं बल की प्राप्ति होती है। रविवार के दिन जी के दर्शन अवश्य करें ।
*रविवार के दिन भैरव जी के मन्त्र ” ॐ काल भैरवाय नमः “ या ” ॐ श्री भैरवाय नमः “ की एक माला जाप करने से समस्त संकट, भय दूर होते है, रोगो, अकाल मृत्यु से बचाव होता है, मनवांछित लाभ मिलता है। 🔮 *शुभ हिन्दू नववर्ष 2025 विक्रम संवत : 2082 कालयक्त विक्रम : 1947 नल* 🌐 कालयुक्त संवत्सर विक्रम संवत 2082,
✡️ शक संवत 1947 (विश्वावसु संवत्सर), चैत्र
☮️ गुजराती सम्वत : 2081 नल
👸🏻 शिवराज शक 352_
☸️ काली सम्वत् 5126
🕉️ संवत्सर (उत्तर) क्रोधी
☣️ आयन – उत्तरायण
🌧️ ऋतु – सौर बसंत ऋतु
⛈️ मास – फाल्गुन मास
🌖 पक्ष – शुक्ल पक्ष
📅 तिथि – रविवार फाल्गुन माह के शुक्ल पक्ष त्रयोदशी तिथि 07:09 PM तक उपरांत चतुर्दशी
✒️ तिथि स्वामी – त्रियोदशी तिथि के स्वामी कामदेव जी है त्रयोदशी तिथि के स्वामी कामदेव जी हैं। कामदेव प्रेम के देवता माने जाते है ।
💫 नक्षत्र- नक्षत्र पुष्य 08:34 AM तक उपरांत आश्लेषा
🪐 नक्षत्र स्वामी – पुष्य नक्षत्र का स्वामी शनि देव हैं। देव गुरु बृ्हस्पति को पुष्य नक्षत्र का अधिष्ठाता देवता माना गया है।
⚜️ योग – शोभन योग 02:32 PM तक, उसके बाद अतिगण्ड योग
⚡ प्रथम करण : कौलव 07:54 AM तक, बाद तैतिल 07:09 PM तक
✨ द्वितीय करण : गर 06:30 AM तक, बाद वणिज
🔥 गुलिक काल : रविवार को शुभ गुलिक काल 02:53 पी एम से 04:17 पी एम
🤖 राहुकाल (अशुभ) – सायं 4:51 बजे से 6:17 बजे तक। राहु काल में शुभ कार्य करना वर्जित माना गया है।
⚜️ दिशाशूल – रविवार को पश्चिम दिशा की यात्रा नहीं करनी चाहिये, यदि अत्यावश्यक हो तो पान एवं घी खाकर यात्रा कर सकते है।
🌞 सूर्योदयः – प्रातः 06:30:00
🌅 सूर्यास्तः – सायं 05:59:00
👸🏻 ब्रह्म मुहूर्त : रात्रि को 29:07 बजे से रात्रि 29:57 बजे तक
🌇 प्रातः सन्ध्या : रात्रि को 29:32 बजे से 06:46 शाम तक
🌟 अभिजित मुहूर्त : दोपहर को 12:10 बजे से 12:57 दोपहर तक
🔯 विजय मुहूर्त : दोपहर को 14:29 बजे से 15:16 दोपहर तक
🐃 गोधूलि मुहूर्त : शाम 18:18 मिनट से शाम 18:43 शाम तक
🎆 सायाह्न सन्ध्या : शाम को 18:21 से रात्रि में 19:35 बजे तक
💧 अमृत काल : शाम 30:18 बजे से सुबह 07:51 बजे तक
🗣️ निशिता मुहूर्त : शाम 24:08 बजे से 24:58 बजे तक
🌷 रवि पुष्य योग : सुबह 06:46 बजे से 08:34 बजे
⭐ सर्वार्थ सिद्धि योग : सुबह 06:46 बजे से 08:34 बजे तक
❄️ रवि योग : सुबह 08:34 बजे से 30:45 बजे तक
🚓 यात्रा शकुन-इलायची खाकर यात्रा प्रारम्भ करें।
👉🏼 आज का मंत्र-ॐ घृणि: सूर्याय नम:।
💁🏻♀️ आज का उपाय-विष्णु मंदिर में पिताम्बर चढ़ाएं।
🌳 वनस्पति तंत्र उपाय-बेल के वृक्ष में जल चढ़ाएं।
⚛️ *पर्व एवं त्यौहार – रवि प्रदोष व्रत/ गण्ड मूल/ रवि पुष्य योग/ सर्वार्थ सिद्धि योग/ रवि योग/ विडाल योग/ राष्ट्रीय मार्च प्रथम दिवस, विश्व नागरिक सुरक्षा दिवस, राष्ट्रीय सनकिस्ट साइट्रस दिवस, शून्य भेदभाव दिवस, पूजनीय आध्यात्मिक नेता और रहस्यवादी श्री रामकृष्ण परमहंस जयन्ती, राष्ट्रीय अश्व संरक्षण दिवस, विश्व प्रशंसा दिवस, राष्ट्रीय उद्यान (येलोस्टोन) की स्थापना दिवस, भारतीय पैरा एथलीट शरद कुमार जन्म दिवस, बिहार के पूर्व रेल मंत्री नीतीश कुमार जन्म दिवस, हिंदी फिल्म निर्देशक मनमोहन देसाई स्मृति दिवस ✍🏼 तिथि विशेष:- त्रयोदशी तिथि को बैंगन त्याज्य होता है। अर्थात आज त्रयोदशी तिथि में भूलकर भी बैंगन की सब्जी या भर्ता नहीं खाना चाहिए। त्रयोदशी तिथि जयकारी अर्थात विजय दिलवाने वाली तिथि मानी जाती है। यह त्रयोदशी तिथि सर्वसिद्धिकारी अर्थात अनेकों क्षेत्रों में सिद्धियों को देनेवाली तिथि मानी जाती है। यह त्रयोदशी तिथि जया नाम से विख्यात मानी जाती है। यह त्रयोदशी तिथि शुक्ल पक्ष में शुभ और कृष्ण पक्ष में अशुभ फलदायिनी होती है। 🗺️ *_Vastu tips* 🗼
अक्सर लोग घर में झाड़ू को खड़ा करके रख देते हैं जो कि अशुभ माना जाता है। इसे हमेशा जमीन पर लिटाकर रखना चाहिए। साथ ही इस बात का भी ध्यान रखें कि झाड़ू पर किसी का पैर न पड़े। दरअसल झाड़ू को मां लक्ष्मी का प्रतीक माना जाता है इसलिए इसका अपमान नहीं करना चाहिए।
*इन जगहों पर कभी न रखें झाड़ू कभी भी घर के मुख्य द्वार के पास नहीं रखनी चाहिए इससे धन हानि होने की संभावना रहती है। इसके अलावा रसोई में भी इसे नहीं रखना चाहिए क्योंकि इससे अन्न का अभाव होता है। पूजा कक्ष के पास भी झाड़ू नहीं होनी चाहिए। झाड़ू खरीदने के शुभ दिन झाड़ू खरीदने के लिए अमावस्या, मंगलवार, शनिवार और रविवार का दिन सबसे अच्छा माना गया है। ऐसे में आप इनमें से किसी भी दिन झाड़ू की खरीदारी कर सकते हैं। ♻️ *जीवनोपयोगी कुंजियां* ⚜️ 🔅स्वास्थ्य रहने के लिए हमें यही करना चाहिए* 🔅सुबह जल्दी उठने की आदत डालें।*
🔅उठने के बाद ईश्वर में श्रद्धा रखते 10 से 15 मिनट तक शान्त चीत्त से प्रार्थना करने के बाद, अपना एवं दूसरे का अच्छा विचार भाव रखें।* 🔅सुबह रात्रि का रखा हुआ तांबे के बर्तन में रखा पानी 1-से 2 ग्लास पानी पीने की आदत बनाए।*
🔅करंज,बड,बबुल, एवं नीम जैसी औषधीय का दातून करना चाहिए।* 🔅सुबह तील,या सरसों के तेल का मालिश कभी कभी करना चाहिए।*
🔅नियमित हर सुबह सरल व्यायाम करने की आदत बनाए।* 🔅नोर्मल गर्म पानी से स्नान करने बाद ऋतु अनुसार वस्त्र पहनना चाहिए।*
🔅गर्म /ताजा पोष्टीक सुप्रचार आहार, कठोर, शब्जी तथा ऋतु अनुसार फलों का सेवन करना चाहिए।* 🔅दिनभर शरीर के अनूकूल आएं इस तरह पानी पीना चाहिए(दो पहर को 3-5 पानी पीएं पेशाब करना जरूरी हैं)।पानी काफी ठंडा या काफी गर्म नहीं पीएं इसका ध्यान रखें।भोजन मध्य पानी पीना अमृत तुल्य,एवं भोजन बाद विष समान है। 💉 आरोग्य संजीवनी 💊
कच्चा दूध और शहद कच्चा दूध एक बेहतरीन क्लींजर है और शहद त्वचा को नमी प्रदान करता है।*
कैसे इस्तेमाल करें: 2 चम्मच कच्चे दूध में 1 चम्मच शहद मिलाएं। इसे रुई (cotton ball) की मदद से चेहरे पर लगाएं। 10 मिनट बाद ठंडे पानी से धो लें।* फायदा: यह चेहरे की गंदगी को हटाकर उसे तुरंत हाइड्रेटेड और चमकदार बनाता है।*
पपीता और शहद का मास्क पपीते में ‘पेपेन’ (Papain) एंजाइम होता है, जो डेड स्किन सेल्स को हटाकर रंगत निखारता है।* कैसे इस्तेमाल करें: पके हुए पपीते के एक टुकड़े को मैश करें और उसमें थोड़ा शहद मिलाएं। इसे चेहरे पर 15 मिनट के लिए लगाएं और फिर धो लें।*
फायदा: यह टैनिंग कम करता है और चेहरे पर एक फ्रेश चमक लाता है।* बेसन और हल्दी का उबटन यह सदियों पुराना नुस्खा आज भी सबसे कारगर है।*
कैसे इस्तेमाल करें: 2 चम्मच बेसन, एक चुटकी हल्दी और थोड़ा सा दही या गुलाब जल मिलाकर पेस्ट बनाएं। इसे चेहरे पर लगाएं और सूखने के बाद हल्के हाथों से रगड़कर धो लें।* फायदा: बेसन त्वचा को एक्सफोलिएट करता है और हल्दी एंटी-सेप्टिक होने के साथ-साथ सुनहरा निखार देती है।
📖 गुरु भक्ति योग 🕯️
महाशिवरात्रि भगवान शिव को समर्पित वह पवित्र रात्रि है, जिसे भक्त जागरण, उपवास और पूजा के साथ मनाते हैं। इसके पीछे कई पौराणिक कथाएँ प्रचलित हैं। अलग अलग पुराणों में अलग प्रसंग मिलते हैं, लेकिन सभी का केंद्र भगवान शिव ही हैं।
*पहली कथा शिव और पार्वती विवाह की है। मान्यता है कि इसी रात्रि भगवान शिव और माता पार्वती का विवाह हुआ था। हिमालय की पुत्री पार्वती ने कठोर तप किया था, तब जाकर शिव ने उन्हें पत्नी के रूप में स्वीकार किया। इसलिए इस दिन को शिव शक्ति के मिलन का प्रतीक माना जाता है। कई स्थानों पर इस दिन शिव बारात की झांकी भी निकाली जाती है।
*दूसरी कथा समुद्र मंथन से जुड़ी है। जब देवताओं और असुरों ने समुद्र मंथन किया, तब अमृत से पहले भयंकर विष निकला। उस विष का नाम हलाहल था। उसके प्रभाव से सृष्टि संकट में पड़ गई। तब भगवान शिव ने वह विष अपने कंठ में धारण किया, जिससे उनका कंठ नीला पड़ गया और वे नीलकंठ कहलाए। कहा जाता है कि यह घटना भी इसी रात्रि से जुड़ी है। इसलिए भक्त इस दिन शिव का आभार व्यक्त करते हैं। *आचार्य श्री गोपी राम के अनुसार, महाशिवरात्रि की रात शिवलिंग का प्रकट होना हुआ था। ब्रह्मा और विष्णु के बीच श्रेष्ठता को लेकर विवाद हुआ, तब अनंत ज्योति स्तंभ के रूप में शिव प्रकट हुए। दोनों उस ज्योति का आदि और अंत खोज न सके। इससे सिद्ध हुआ कि शिव अनंत और सर्वोच्च हैं। इसलिए इस रात्रि में शिवलिंग की पूजा का विशेष महत्व माना गया है।
*महाशिवरात्रि केवल कथा भर नहीं है। यह साधना की रात्रि मानी जाती है। इस दिन उपवास रखा जाता है, रात्रि जागरण किया जाता है और चार प्रहर में शिवलिंग का अभिषेक किया जाता है। मान्यता है कि इस रात किया गया जप और ध्यान कई गुना फल देता है। *इस प्रकार महाशिवरात्रि भक्ति, संयम और आस्था का पर्व है। यह हमें यह भी सिखाती है कि जब संसार संकट में हो, तब त्याग और धैर्य ही सबसे बड़ी शक्ति होते हैं।
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⚜️ त्रयोदशी तिथि के देवता मदन (कामदेव) हैं। शास्त्रानुसार भगवान कृष्ण और रुक्मिणी के पुत्र हैं भगवान कामदेव। कामदेव प्रेम और आकर्षण के देवता माने जाते हैं। जिन पुरुषों अथवा स्त्रियों में काम जागृत नहीं होता अथवा अपने जीवन साथी के प्रति आकर्षण कम हो गया है, उन्हें आज के दिन भगवान कामदेव का उनकी पत्नी रति के साथ पूजन करके उनके मन्त्र का जप करना चाहिये। कामदेव का मन्त्र – ॐ रतिप्रियायै नम:। अथवा – ॐ कामदेवाय विद्महे रतिप्रियायै धीमहि। तन्नो अनंग: प्रचोदयात्।
*_आज की त्रयोदशी तिथि में सपत्निक कामदेव की मिट्टी कि प्रतिमा बनाकर सायंकाल में पूजा करने के बाद उपरोक्त मन्त्र का जप आपका वर्षों का खोया हुआ प्रेम वापस दिला सकता है। आपके चेहरे की खोयी हुई कान्ति अथवा आपका आकर्षण आपको पुनः प्राप्त हो सकता है इस उपाय से। जो युवक-युवती अपने प्रेम विवाह को सफल बनाना चाहते हैं उन्हें इस उपाय को करना चाहिये। जिन दम्पत्तियों में सदैव झगडा होते रहता है उन्हें अवश्य आज इस उपाय को करना चाहिये।।



