21 नवम्बर 2023 : अक्षय नवमी साल में कब ? जानें डेट, मुहूर्त, क्यों होती है इसमें आंवले के पेड़ की पूजा
Astologar Gopi Ram : आचार्य श्री गोपी राम (ज्योतिषाचार्य) जिला हिसार हरियाणा मो. 9812224501
जय श्री लक्ष्मी
🔮 21 नवम्बर 2023 : अक्षय नवमी साल में कब ? जानें डेट, मुहूर्त, क्यों होती है इसमें आंवले के पेड़ की पूजा
🥏 हाइलाइट्स
🔸 आंवला नवमी के दिन व्रत रखकर आंवले के पेड़ और भगवान विष्णु की पूजा करते हैं.
🔸 आंवला नवमी की पूजा का शुभ मुहूर्त सुबह 06 बजकर 48 मिनट से दोपहर 12 बजकर 07 मिनट तक है.
🔸 धार्मिक मान्यता के अनुसार, आंवला नवमी से ही द्वापर युग का प्रारंभ हुआ था.
कार्तिक माह के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को अक्षय नवमी के नाम से जाना जाता है. इस दिन श्रीहरि और आंवले के पेड़ की विशेष पूजा की जाती है. इस दिन भगवान विष्णु आंवले के पेड़ पर निवास करते हैं इसलिए इसे आंवला नवमी भी कहा जाता है.
मान्यता है कि इस दिन आंवले के पेड़ की पूजा और दान करने पर अक्षय (जिसका क्षय न होता हो) पुण्य की प्राप्ति होती है. मां लक्ष्मी की कृपा से साधक को आर्थिक लाभ मिलता है.
📆 नवमी तिथि का प्रारंभ
21 नवंबर- सुबह 3 बजकर 16 मिनट से.
नवमी तिथि का समापन-22 नवंबर रात 1 बजकर 8 मिनट तक.
उदयातिथि को मानते हुए 21 नवंबर 2023 दिन मंगलवार को आंवला नवमी का पर्व मनाया जाएगा.
🕉️ शुभ मुहूर्त
सुबह 6 बजकर 48 मिनट से दोपहर 12 बजकर 7 मिनट तक रहेगा.
⚛️ आंवला नवमी शुभ योग
आंवला नवमी के दिन शाम 8 बजकर 1 मिनट से अगले दिन 6 बजकर 49 मिनट तक रवि योग रहेगा. इसके साथ ही इस दिन हर्षण योग भी बन रहा है. इस पूरे दिन पंचक भी लग रहा है.
💁🏻♀️ ऐसे करें आंवला नवमी की पूजा और व्रत
आंवला नवमी की पूजा और व्रत के लिए इस दिन सुबह उठकर स्नान करें. इसके बाद आंवले के पेड़ के नीचे पूर्व की दिशा की तरफ मुंह करके भगवान विष्णु का पूजन करें. इसके साथ ही पेड़ की जड़ में दूध की अर्पित करें. पेड़ के चारों तरफ सूत लपेटकर कपूर या फिर देसी घी की बाती जलाकर पूजा करें. इसके बाद भगवान की आरती के साथ ही पेड़ की 108 बार परिक्रमा करें. इसके बाद किसी ब्राह्मण, ब्राह्मणी या फिर गरीब को भोजन कराकर वस्त्र तथा दक्षिणा दें. इस दिन भोजन में आंवला जरूर शामिल करें. साथ ही आंवला दान करें. इससे भगवान विष्णु प्रसन्न होते हैं. साथ ही सभी मनोकामनाओं को पूर्ण करते हैं.
🗣️ यह है आंवला नवमी की व्रत कथा
ज्योतिषाचार्य श्री गोपी राम के अनुसार, आंवला की कथा इस प्रकार है कि किसी समय में एक साहूकार था. वह कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष में नवमी के दिन आंवला के पेड़ के नीचे ब्राह्मणों को भोजन कराता था. इस दिन सोने का दान करता था, लेकिन उसके बच्चों को यह सब देखकर अच्छा नहीं लगता था. वह इसके खिलाफ थे. बेटों के इसका विरोध और परेशान करने से तंग होकर साहूकार दूसरे गांव में जाकर एक दुकान करने लगा. दुकान के आगे आंवले का पेड़ लगाया और उसे सींच कर बड़ा करने लगा. इसी के प्रभाव से उसकी दुकान खूब चलने लगी. वहीं बेटों का कारोबार धीरे धीरे कर बंद हो गया. वह सब अपने पिता के पास पहुंचे और क्षमा मांगी. तो पिता ने उन्हें क्षमा कर आंवले के वृक्ष की पूजा करने को कहा. उनका काम धंधा पहले की तरह चलने लगा.
🤷🏻♀️ आंवला नवमी के 4 महत्व
🔹 आंवला नवमी से आंवले के वृक्ष में भगवान विष्णु का वास होता है, इस वजह से आंवले के पेड़ की पूजा करते हैं और आंवले का भोग लगाते हैं. आंवले को ही प्रसाद स्वरूप ग्रहण करते हैं. विष्णु कृपा से अक्षय पुण्य प्राप्त होता है.
🔹 धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, आंवला नवमी के दिन आंवले के पेड़ से अमृत की बूंदें टपकती हैं, इसलिए इस दिन आंवले के पेड़ के नीचे बैठने और भोजन करने की परंपरा है. ऐसा करने से सेहत अच्छी रहती है.
🔹 आंवला नवमी को भगवान विष्णु ने कूष्मांड राक्षस का वध किया था, इसलिए इसे कूष्मांड नवमी कहते हैं. आंवला नवमी पर कूष्मांड यानि कद्दू का दान करते हैं.
🔹 धार्मिक मान्यता के अनुसार, आंवला नवमी से ही द्वापर युग का प्रारंभ हुआ था.

