कब है सावन विनायक चतुर्थी 2024? जानें तिथि, शुभ मुहूर्त और महत्व
Astologar Gopi Ram : आचार्य श्री गोपी राम (ज्योतिषाचार्य) जिला हिसार हरियाणा मो. 9812224501
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🔮 कब है सावन विनायक चतुर्थी 2024? जानें तिथि, शुभ मुहूर्त और महत्व
🔘 HIGHLIGHTS
🔹 चतुर्थी तिथि को बहुत ही महत्वपूर्ण माना जाता है।
🔹 इस दिन भगवान गणेश की पूजा की जाती है।
🔹 गणपति बप्पा को प्रिय चीजों का भोग लगाना चाहिए।
👉🏽 विनायक चतुर्थी व्रत सावन माह में श्रावण माह के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि को मनाया जाता है। इस दिन विनायक चतुर्थी का व्रत करने और विघ्नहर्ता भगवान गणेश की पूजा करने की परंपरा है। जिस प्रकार चतुर्दशी की मासिक तिथि भगवान शिव को समर्पित है, उसी प्रकार चतुर्थी की मासिक तिथि भी भगवान शिव के पुत्र श्री गणेश को समर्पित है। सावन विनायक चतुर्थी के व्रत के दिन शिव योग और रवि योग बन रहा है। इस दिन उत्तरा फाल्गुनी नक्षत्र भी है। ऐसा माना जाता है कि विनायक चतुर्थी व्रत के दौरान चंद्रमा को देखना वर्जित है। धार्मिक मान्यता है कि चतुर्थी व्रत करने से जीवन के सभी संकट दूर हो जाते हैं और जीवन में सुख-समृद्धि बनी रहती है। यह सावन की दूसरी चतुर्थी होगी। वहीं, पहली चतुर्थी सावन कृष्ण पक्ष की थी। आइए जानते हैं आचार्य श्री गोपी राम से सावन में विनायक चतुर्थी किस दिन होगी और कौन से शुभ योग बनेंगे ।
⚛️ श्रावन विनायक चतुर्थी 2024 कब है?
पंचांग के अनुसार, श्रावण माह के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि आरंभ: 7 अगस्त, बुधवार, रात्रि 10: 05 मिनट से
श्रावण माह के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि समाप्त: 8 अगस्त, गुरुवार, देर रात 12 बजकर 36 मिनट पर
ऐसे में उदयातिथि के अनुसार, सावन की विनायक चतुर्थी 8 अगस्त को है। इसी दिन चतुर्थी का व्रत रखा जाएगा।
💮 श्रावन विनायक चतुर्थी 2024 मुहूर्त
विनायक चतुर्थी के दिन पूजा का मुहूर्त : प्रातः 11:07 मिनट से दोपहर 01: 46 मिनट तक।
सावन की विनायक चतुर्थी के दिन पूजा के लिए 2 घंटे 40 मिनट का शुभ मुहूर्त है।
🪐 शुभ योग में सावन विनायक चतुर्थी 2024
श्रावन विनायक चतुर्थी के दिन शिव योग और रवि योग बनता है। विनायक चतुर्थी व्रत के दिन सुबह से 12:39 तक शिव योग है, उसके बाद सिद्ध योग बनता है। योगाभ्यास के लिए शिव योग अच्छा माना जाता है। विनायक चतुर्थी के व्रत वाले दिन रवि योग भी बनता है। रवि योग शाम 5:47 से 23:34 तक रहेगा।
🌙 विनायक चतुर्थी पर न देखें चंद्रमा
8 अगस्त को विनायक चतुर्थी पर चंद्रमा का उदय रात्रि 8 बजकर 59 मिनट पर होगा। वहीं, चंद्रमा का अस्त रात्रि 9 बजकर 21 मिनट पर होगा। विनायक चतुर्थी के दिन चंद्रमा को देखने की मनाही है, क्योंकि इस दिन देखने से झूठा कलंक लगता है। इसलिए इस दिन चंद्रमा को देखना वर्जित माना जाता है।
🌝 चंद्रोदय टाइम
सकट चौथ पर चांद देखकर अर्घ्य दिया जाता है और उसकी पूजा होती है, इसलिए इस दिन महिलाओं को चांद का इंतजार रहता है। अगर आप दिल्ली-एनसीआर में रहते हैं, तो आपको बता दें कि दिल्ली में रात 9:10, इसके बाद 9:09 बजे नोएडा और इसी समय गाजियाबाद में भी चांद के दर्शन होंगे।
💫 श्रावन विनायक चतुर्थी बन रहे हैं 3 शुभ योग
श्रावन विनायक चतुर्थी के दिन शिव योग और रवि योग का निर्माण हो रहा है। इस दिन दिन शिव योग प्रात:काल से लेकर दोपहर 12 बजकर 39 मिनट तक रहेगा, उसके बाद सिद्ध योग शुरू हो जाएगा। साथ ही इस दिन रवि योग सुबह 5 बजकर 47 मिनट से शुरू होकर रात 11 बजकर 33 मिनट तक रहेगा। इस दोनों योग में गणेश जी की आराधना दोगुना फल प्राप्त होता है।
🙇🏻 पूजा विधि
विनायक चतुर्थी व्रत के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और व्रत संकल्प लें।
🪶 पूजा के एक स्थान पर चौकी लगांए और भगवान गणेश जी प्रतिमा स्थापित करें।
🪶 इसके बाद देसी घी का दीपक प्रज्ज्वलित करें।
🪶 भगवान गणेश को चंदन, फल, अक्षत और फूल अर्पित करें।
🪶 इसके साथ ही मोदक लड्डू या मिठाई का भोग अर्पित करें।
🪶 अंत में गणेश चालीसा का पाठ कर आरती करें।
💁🏻 श्रावन विनायक चतुर्थी का महत्व_
श्रावन के महीने में आने वाली विनायक चतुर्थी के दिन भगवान गणेश की अराधना की जाती है. धर्म शास्त्रों में गणेश जी को बुद्धि का देवता कहा गया है. मान्यता है कि इनकी पूजा करने से जातक के सभी संकट मिट जाते है इसलिए गणेश जी को संकटमोचन भी कहा जाता है. विनायक चतुर्थी के दिन व्रत रखने व पूजा करने से जातक को ज्ञान, बद्धि और धैर्य का आशीर्वाद मिलता है. इस दिन गणेश जी को दूर्वा जरूर अर्पित करें और गणेश स्रोत का पाठ करें. इससे वह प्रसन्न होकर भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूरी करते हैं।

