मध्य प्रदेश

सेवारत शिक्षकों के लिए टीईटी नियमों में बदलाव की मांग, मप्र शिक्षक संघ ने सीएम को सौंपा ज्ञापन

ऑफलाइन ओएमआर परीक्षा कराने, परीक्षा शुल्क माफ करने और जिलावार केंद्र बनाने की उठाई मांग
भोपाल। मध्यप्रदेश शिक्षक संघ ने सेवारत शिक्षकों के लिए प्रस्तावित शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) के नियमों में बदलाव की मांग की है। संघ के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. क्षत्रवीर सिंह राठौर, प्रदेश महामंत्री राकेश गुप्ता एवं प्रांतीय कोषाध्यक्ष विनोद कुमार पूनी ने मुख्यमंत्री, शिक्षा मंत्री, मुख्य सचिव और आयुक्त को ज्ञापन सौंपकर परीक्षा प्रक्रिया को शिक्षक हितैषी बनाने की मांग की। संघ का कहना है कि वर्षों से सेवाएं दे रहे शिक्षकों को नए अभ्यर्थियों के समान मापदंड पर परखना उचित नहीं है। इसलिए उनके अनुभव, आयु और पूर्व सेवा को ध्यान में रखते हुए पृथक संक्रमणकालीन व्यवस्था बनाई जाए तथा परीक्षा उत्तीर्ण करने के लिए पर्याप्त अवसर दिए जाएं।
ओएमआर से परीक्षा और हर जिले में केंद्र की मांग
संघ ने दूरस्थ क्षेत्रों में पदस्थ शिक्षकों की सुविधा के लिए टीईटी को डिजिटल मोड के बजाय ऑफलाइन ओएमआर शीट के माध्यम से कराने का सुझाव दिया है। आवेदन की अंतिम तिथि 30 सितंबर 2026 निर्धारित कर प्रथम चरण की परीक्षा नवंबर में कराने की मांग की गई है। साथ ही शिक्षकों को अनावश्यक यात्रा और आर्थिक बोझ से बचाने के लिए प्रत्येक जिले में आवश्यकतानुसार परीक्षा केंद्र बनाए जाने की मांग रखी गई है।
परीक्षा शुल्क नहीं लेने और 33 प्रतिशत पासिंग मार्क्स का सुझाव
संघ ने कहा कि जो शिक्षक पहले से शासकीय सेवा में हैं, उनसे दोबारा परीक्षा शुल्क लेना उचित नहीं है, इसलिए परीक्षा निशुल्क कराई जाए। न्यूनतम उत्तीर्णांक को भी व्यावहारिक बनाते हुए 50 अंक अथवा 33 प्रतिशत निर्धारित करने का सुझाव दिया गया है।
2010 से पहले नियुक्त शिक्षकों के अधिकार सुरक्षित रखने की मांग
संघ ने वर्ष 2010 से पहले तत्कालीन नियमों के तहत नियुक्त शिक्षकों के पूर्व अर्जित अधिकारों की रक्षा की गारंटी मांगी है। साथ ही यदि कक्षा 1 से 8 तक के शिक्षकों के लिए टीईटी अनिवार्य की जाती है तो जिलावार पात्र शिक्षकों की सूची तत्काल पोर्टल पर जारी कर तैयारी के लिए पर्याप्त समय देने की मांग की गई है। संघ ने शासन से आग्रह किया कि दूरस्थ अंचलों में कार्यरत शिक्षकों को मानसिक, आर्थिक और प्रशासनिक परेशानियों से बचाने के लिए टीईटी की पूरी प्रक्रिया पारदर्शी, व्यावहारिक और शिक्षक हितैषी बनाई जाए।

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