मध्य प्रदेश

अमृत सरोवर तालाब योजना, भ्रष्ट्राचार की भेंट चढ़ी, मजदूरों के स्थान पर मशीनों से काम

रिपोर्टर : प्रशांत जोशी
देवरी अमृत ​​सरोवर योजना शुरू करते हुए देश के प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा अमृत महोत्सव 24 अप्रैल 2022 को इस योजना को शुरू करने की अधिकृत घोषणा की गई थी, इस योजना के माध्यम से प्रत्येक राज्य के प्रत्येक जिले में 75 से अधिक तालाबों का निर्माण किया जाएगा जिससे कि गर्मी के समय में होने वाले भूगर्भ की कमी को काफी हद तक राहत मिल सके, लेकिन अमृत सरोवर योजना सचिव ने भ्र्ष्टाचार के प्रचारकों को मार्च किया। रायसेन जिले में 103 अमृत सरोवर तालाब बनता है जो कि रायसेन पोर्टल पर दो से तीन साल से नीचे है। लेकिन उनमे से 28 शुरू हुए जिनमे कुछ बन गए हैं। मीडिया टीम ने ग्राम बंगनिया, महेश्वर, चैनपुर, मगरधा, टोंगा, बनियाखेड़ी, बागपिपरिया, दिगाबाद, उमरीबहरा, किंगी, सुल्तानपुर, बेर्खेड़ी कला समेत कई गावो का भृमण किया जहां अमृत सरोवर बन रहे हैं।
इस योजना के माध्यम से प्रत्येक जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में 75 से अधिक तालाबों का निर्माण किया जा रहा है। मुख्यता कृषि हेतु जल, जल जीव पालन हेतु और गर्मी में जल की समस्या से छुटकारा पाने के कारण, जिससे कि ग्रामीण क्षेत्रों में पानी की कमी ना हो और ग्राम का विकास बढ़ सके, साथ ही तालाब निर्माण के लिए चयन को रोजगार भी चुना जा सकता है संभव।
जानें क्या है अमृत सरोवर योजना, इससे कैसे मिलेगा किसानों को लाभ लाल का लगातार टैपिंग की वजह से, पूरे देश में भूजल स्तर की कमी की समस्या के रूप में आ रही है। देश के ज्यादातर हिस्सों में पानी की गिरावट को देखते हुए सरकार लगातार कदम उठा रही है, ताकि देश में जल संरक्षण को बल मिले। इसी उद्देश्य से केंद्र सरकार, किसानों के लिए अमृत सरोवर योजना लाई है। योजना के किसानों को 50 हजार तालाब दिए जा रहे हैं। इस योजना के तहत न सिर्फ जल संरक्षण को बल मिलेगा बल्कि किसानों की आय भी तेजी से घटेगी। किसान इन तालाब से सिंचाई और मछलीपालन दोनों का लाभ उठा सकते हैं।
यह तो हुई केंद्र सरकार की मंशा लेकिन इस मंशा पर किस तरह ग्राम सरपंच सचिव पलिता लगा रहे हैं वो हम आपको दिखा रहे हैं कि 100 दिनों का रोजगार दिया जा रहा है। और अमृत सरोवर तालाब में भी लाकर से काम करवाना चाहिए, लेकिन यहां तो वा कानूनी संस्थाओं से काम किया जा रहा है। और तालाब जो मेज कही जगह में तालाब की पाबंदी कर रहा है तो कुछ थोड़ा बहुत गहराकरण कर इस योजना की इतिश्री कर ली 12 लाख रुपये के करीब एक तालाब बनाने में खर्च बताया जा रहा है। लेकिन यहां इन ग्रामों में 12 लाख तो क्या एक दो लाख खर्च कर बाकी राशि भृष्टाचार कि भेटचौड़ रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के इस विजन को भी ग्रामीण सरकार की पलीता लग रही है।
इस संबंध में जिला पंचायत के सीईओ अंजू भदौरिया का कहना है कि पोर्टल पर दो तीन साल से 107 अमृत सरोवर डाला जाता है। जिनमे 28 पूर्ण हो गए। मजदूर के स्थान पर मशीन से काम की जहा की शिकायत आएगी, वहां की जांच की जाएगी।

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