छुट्टी, छुट्टियों का मध्य प्रदेश, काम क्या खाक होगा, हफ्ते में 5 दिन ही काम के, शेष छुट्टी के

रिपोर्टर : कुन्दनलाल चौरसिया
गौरझामर । कर्मवीरों के लिए कर्म ही पूजा है, कर्म बिना सब बेकार है कहा भी है, कर्म प्रधान विश्व कर राखा,, इन सब के बावजूद भी मध्यप्रदेश सरकार लोगों को अकर्मण्यता का पाठ पढ़ा रही है महीने में हफ्ते के 7 दिन होते हैं जिसमें 1 दिन रविवार का छुट्टी के रूप में निकल जाता है शेष बचे 6 दिन में ही देश प्रदेश के कामकाज संपादित होते हैं जब सर्व विदित है कि कर्म से ही लोग महान बनते हैं बिना कर्म के कुछ भी संभव नहीं है फिर राज्य सरकार वोट की खातिर देश व प्रदेश का हिताहित सोचे बिना छुट्टियों की घोषणा कैसे कर देती है देखा जाता है कि प्रदेश सरकार द्वारा रविवार के अलावा अब शनिवार के दिन की भी छुट्टियों की घोषणा कर रखी है अब हफ्ते में शेष बचे 5 दिनों में अन्य प्रकार की छुट्टियों के आ जाने के कारण या शासकीय कार्यालयों में अधिकारी कर्मचारियों की अनुपस्थिति के कारण लोगों के शेष दिन भी बेकार चले जाते है इस प्रकार छुट्टियां ही छुट्टियां होने के कारण शासकीय कार्यों में लोगों के कामकाज पिछड़ते ही जा रहे है। यहां बता दें कि सरकार ने छुट्टियों की घोषणा तो कर दी है लेकिन शेष बचे कामकाज के महत्वपूर्ण दिनों में काम की देखरेख अथवा समीक्षा नहीं की, कि शासकीय कार्यालयों में सक्रियता के साथ दुगनी गति से काम हो रहे है अथवा नहीं, यह बिल्कुल भी नहीं देखा और ना ही देखने की फुर्सत है छुट्टियों पर छुट्टियों की घोषणा करने से देश और प्रदेश का भला होने वाला नहीं है देखा जाता है कि इन छुट्टियों के मिलने के बावजूद भी शासकीय कार्यालयों में कामकाज पूर्वानुसार ढर्रा से ही चल रहे हैं यदि प्रदेश को अग्रणी राज्य बनाना है तो रविवार को छोड़कर कैलेंडर से शेष छुट्टियों को हटाना पड़ेगा इसमें से शेष सामाजिक धार्मिक राजनैतिक छुट्टियों को ऐक्छिक छुट्टीयों का दर्जा दिया जाए इससे छुट्टियों का महत्व भी पूर्ण हो जाएगा और शासकीय कामकाज भी यथावत सुचारू रूप से चलते रहेंगे मध्यप्रदेश शासन इस ओर गंभीरता पूर्वक ध्यान दें जिससे छुट्टियों पर छुट्टियों के कारण आम जनता को जो परेशानी हो रही है उससे उन्हें राहत व छुटकारा मिलेगा।



