अक्षय तृतीया पर झण्डा तोड़ने की अनोखी परम्परा, महिला डंडे से पिटती है पुरुषो को

सिलवानी । मध्य प्रदेश के रायसेन जिले की तहसील सिलवानी के अंतर्गत में आदिवासियों बाहुल्य क्षेत्र में आज भी आदिवासी अपनी पुरानी परंपरा संस्कृति को बचा कर रखे हुए हैं, जी हां यह अपनी सामाजिक संस्कृति पुरानी परंपराओं से करते हुए आ रहे है,
और ये अपनी पुरानी परंपरा, संस्कृति, आने वाली पीढियां को को भी उन्हें सिखाते हैं।
बता दें कि आदिवासी यह परंपरा का कार्यक्रम 3 साल में एक बार किया जाता है, और ये कार्यक्रम
अक्षय तृतीया पर झण्डा तोड़ने की अनोखी परम्परा के रूप में मनाते हैं जहां महिला पुरुष को डंडे से पिटती हैं।
रायसेन जिले के सिलवानी तहसील के ग्राम खैरी खोदरा में झंडा तोड़ने की अनोखी परम्परा कई वर्षों से चल रही है। आदिवासी बाहुल्य क्षेत्र तीन वर्ष में एक बार अक्षय तृतीया पर होता है जहाँ 40 फिट ऊँचें एक लकड़ी के ऊपरी नोक पर झंडे पर प्रसाद बांधा जाता है, जिसे पुरुष तोड़ने के लिए उसे लकड़ी के ऊपर चढ़ते हैं, महिलाएं पुरुषों को लकड़ी के ऊपर चढ़ने से रोकने के लिए उन पर डंडों से पीटती है।
आपको बता दे सिलवानी तहसील के आदिवासी बाहुल्य क्षेत्र खैरी खोदरा में आदिवासी परंपरा अनुसार झंडा तोड़ो कार्यक्रम आयोजित किया गया। जिसमे आदिवासी महिलाएं पुरषों को डंडों से मारपीट करती है और पुरुष बचने का प्रयास करते है। और अंत में पुरुष झंडा तोड़ने में सफल हो जाते है।
वहीं इस कार्यक्रम में सिलवानी विधानसभा के विधायक देवेंद्र पटेल सम्मिलित हुए, विधायक पटेल ने आदिवासी परंपराओं की झंडा टोड कार्यक्रम की पूजा अर्चना की एवं समस्त सगा समाज के भाई बहनों से मिलकर उन्हें बधाई और शुभकामनाएं प्रेषित की।



