मध्य प्रदेश

सीनियर कन्या छात्रावास भवन निर्माण में देरी से आदिवासी छात्राओं का भविष्य दांव पर

क्षेत्रवासियों ने जल्द निर्माण की उठाई मांग
रिपोर्टर : सतीश चौरसिया
उमरियापान । शासन द्वारा आदिवासी समाज की शिक्षा को बढ़ावा देने के बड़े-बड़े दावे किए जा रहे हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर कई योजनाएं अब भी अधूरी पड़ी हैं । ऐसा ही मामला सिलौंडी स्थित प्रस्तावित सीनियर कन्या छात्रावास का सामने आया है, जहां वर्ष 2022 में लगभग 2 करोड़ 41 लाख रुपये की लागत से भवन निर्माण को स्वीकृति मिलने के बावजूद अब तक टेंडर प्रक्रिया पूरी नहीं हो सकी है । इसके चलते निर्माण कार्य शुरू नहीं हो पाया है ।
स्थानीय लोगों का कहना है कि छात्रावास भवन नहीं बनने से क्षेत्र की अनेक आदिवासी छात्राओं को उच्च शिक्षा प्राप्त करने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। कई छात्राएं अच्छे अंकों से परीक्षा उत्तीर्ण होने के बावजूद रहने और भोजन की समुचित व्यवस्था नहीं होने के कारण आगे की पढ़ाई छोड़ने को मजबूर हो जाती हैं।
बताया जा रहा है कि वर्तमान छात्रावास में क्षमता से अधिक छात्राएं होने के कारण नई छात्राओं को “जगह नहीं है” कहकर वापस कर दिया जाता है। इससे शिक्षा के प्रति उत्साहित छात्राओं के सपने अधूरे रह जाते हैं।
क्षेत्र के जागरूक नागरिकों का आरोप है कि जिम्मेदार जनप्रतिनिधियों और संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों की उदासीनता के कारण स्वीकृत परियोजना वर्षों से कागजों तक सीमित है। उनका कहना है कि यदि शीघ्र ही छात्रावास भवन का निर्माण शुरू नहीं हुआ, तो आने वाले समय में और अधिक आदिवासी छात्राओं की शिक्षा प्रभावित होगी।
स्थानीय लोगों ने शासन और प्रशासन से मांग की है कि सिलौंडी सीनियर कन्या छात्रावास की टेंडर प्रक्रिया तत्काल पूर्ण कर निर्माण कार्य शुरू कराया जाए, ताकि आदिवासी बेटियों को उच्च शिक्षा के लिए आवश्यक सुविधाएं मिल सकें और उनका भविष्य सुरक्षित हो।

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