मध्य प्रदेश

आग और पानी से नहीं खेलना चाहिए…

हरीश मिश्र “वृक्ष मित्र”, लेखक ( स्वतंत्र पत्रकार )
जब नाले में पानी हो, तो नाला पार करने का जोखिम नहीं लेना चाहिए। लोक निर्माण विभाग सड़क किनारे संदेश लिखता है,
“रपटे पर पानी होने पर रपटा पार न करें।”
और एक संदेश तो हम बचपन से सुनते आए है
“सावधानी हटी, दुर्घटना घटी।”
पूर्व मुख्यमंत्री एवं केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान के पुत्र और भाजपा युवा नेता कार्तिक चौहान का कांवड़ यात्रा का एक वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आया है। उन्होंने लिखा
“जब मन में भक्ति और महादेव पर विश्वास हो, तो मार्ग की हर बाधा छोटी लगती है…”
बात अपनी जगह सही है। आस्था मनुष्य को साहस देती है, लेकिन आस्था के साथ विवेक और संयम भी जरूरी है।
जिस रपटे पर घुटनों से अधिक पानी बह रहा हो, उसे पार करना साहस नहीं, बल्कि अनावश्यक जोखिम हो सकता है। बड़े-बुजुर्गों की सीख है, आग और पानी से नहीं खेलना चाहिए।
सोचिए, यदि कोई हादसा हो जाता तो ? एक युवा नेता को बचाने के लिए न जाने कितने युवा अपनी जान जोखिम में डालकर पानी में कूद पड़ते। नेतृत्वकर्ता का जीवन केवल उसका अपना जीवन नहीं होता, उसके साथ चलने वालों की जिम्मेदारी भी उससे जुड़ी होती है।
नेतृत्व का उद्देश्य केवल आगे बढ़ना नहीं, बल्कि सही समय पर सही मार्ग दिखाना भी है। महादेव की कृपा से जीवन मिला है। इसलिए जीवन में साहस के साथ संयम और विवेक भी जरूरी है।
और यह सीख अपने पिता से अवश्य लेनी चाहिए। कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने अपने लंबे राजनीतिक जीवन में हर रपटे को जल्दबाजी में पार करने की कोशिश नहीं की, कई बार धैर्य रखा, परिस्थितियों के अनुकूल होने का इंतजार किया और कई बाधाओं के ऊपर पुल बनाकर मंजिल तक पहुंचे।
युवा हैं, ऊर्जा है, उत्साह है,इसे बनाए रखिए। लेकिन मंजिल पर नजर रखिए, हर बाधा से भिड़ना जरूरी नहीं। कभी-कभी पीछे हटना कायरता नहीं, बल्कि सच्चे नेतृत्व की पहचान होता है। महादेव साहस दें, लेकिन उस साहस के साथ विवेक भी दें।

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