ज्योतिष

आज का पंचांग आज का पंचांग शुक्रवार, 02 फरवरी 2024

आचार्य श्री गोपी राम (ज्योतिषाचार्य) जिला मुख्यालय हरियाणा मो. 9812224501
✦••• जय श्री हरि •••✦
🧾 आज का पंचाग 🧾
शुक्रवार 02 फरवरी 2024

02 फरवरी 2024 दिन शुक्रवार को माघ मास के कृष्ण पक्ष की सप्तमी तिथि है। आज के इस सप्तमी को सर्वाप्ति सप्तमी कहा जाता है। आज स्वामी रामानंदाचार्य एवं स्वामी विवेकानंद जैसे दो महापुरुषों की जन्म जयन्ती है। आप सभी सनातनियों को “स्वामी रामानंदाचार्य एवं स्वामी विवेकानंदजी के जन्म जयन्ती” की हार्दिक शुभकामनायें।।
ॐ श्री महालक्ष्म्यै च विद्महे विष्णु पत्न्यै च धीमहि तन्नो लक्ष्मी प्रचोदयात् ॐ॥
🌌 दिन (वार) – शुक्रवार के दिन दक्षिणावर्ती शंख से भगवान विष्णु पर जल चढ़ाकर उन्हें पीले चन्दन अथवा केसर का तिलक करें। इस उपाय में मां लक्ष्मी जल्दी प्रसन्न हो जाती हैं।
शुक्रवार के दिन नियम पूर्वक धन लाभ के लिए लक्ष्मी माँ को अत्यंत प्रिय “श्री सूक्त”, “महालक्ष्मी अष्टकम” एवं समस्त संकटो को दूर करने के लिए “माँ दुर्गा के 32 चमत्कारी नमो का पाठ” अवश्य ही करें ।
शुक्रवार के दिन माँ लक्ष्मी को हलवे या खीर का भोग लगाना चाहिए ।
शुक्रवार के दिन शुक्र ग्रह की आराधना करने से जीवन में समस्त सुख, ऐश्वर्य की प्राप्ति होती है, दाम्पत्य जीवन सुखमय होता है बड़ा भवन, विदेश यात्रा के योग बनते है।
🔮 शुभ हिन्दू नववर्ष 2023 विक्रम संवत : 2080 नल, शक संवत : 1945 शोभन
🌐 संवत्सर नाम अनला
🔯 शक सम्वत : 1945 (शोभकृत् संवत्सर)
☸️ काली सम्वत् 5124
🕉️ संवत्सर (उत्तर) पिंगल
☣️ आयन – उत्तरायण
☀️ ऋतु – सौर शिशर ऋतु
⛈️ मास – माघ मास
🌗 पक्ष – कृष्ण पक्ष
📆 तिथि – शुक्रवार माघ माह के कृष्ण पक्ष सप्तमी तिथि 04:03 PM तक उपरांत अष्टमी
📝 तिथि स्वामी : सप्तमी तिथि के देवता हैं चित्रभानु। सप्तमी तिथि को चित्रभानु नाम वाले भगवान सूर्यनारायण का पूजन करने से सभी प्रकार से रक्षा होती है।
💫 नक्षत्र – नक्षत्र स्वाति 05:57 AM तक उपरांत विशाखा
🪐 नक्षत्र स्वामी – स्वाति नक्षत्र स्वामी राहु यानि अधंकार है। स्वाति नक्षत्र के देवता पवन देव हैं।
🔊 योग – शूल योग 12:54 PM तक, उसके बाद गण्ड योग
प्रथम करण : बव – 04:02 पी एम तक
द्वितीय करण – बालव – 04:47 ए एम, फरवरी 03 तक कौलव
🔥 गुलिक काल : – शुक्रवार को शुभ गुलिक प्रात: 7:30 से 9:00 तक ।
⚜️ दिशाशूल – शुक्रवार को पश्चिम दिशा का दिकशूल होता है।यात्रा, कार्यों में सफलता के लिए घर से दही में चीनी या मिश्री डालकर उसे खाकर जाएँ ।
🤖 राहुकाल -दिन – 10:30 से 12:00 तक राहु काल में कोई भी शुभ कार्य नहीं करना चाहिए |
🌞 सूर्योदयः- प्रातः 06:34:00
🌅 सूर्यास्तः- सायं 05:26:00
👸🏻 ब्रह्म मुहूर्त : 05:24 ए एम से 06:17 ए एम
🌇 प्रातः सन्ध्या : 05:50 ए एम से 07:09 ए एम
🌟 अभिजित मुहूर्त : 12:13 पी एम से 12:57 पी एम
🔯 विजय मुहूर्त : 02:23 पी एम से 03:07 पी एम
🐃 गोधूलि मुहूर्त : 05:58 पी एम से 06:25 पी एम
🌌 सायाह्न सन्ध्या : 06:01 पी एम से 07:19 पी एम
💧 अमृत काल : 08:22 पी एम से 10:07 पी एम
🗣️ निशिता मुहूर्त : 12:08 ए एम, फरवरी 03 से 01:01 ए एम, फरवरी 03
🚓 यात्रा शकुन-शुक्रवार को मीठा दही खाकर यात्रा पर निकलें।
👉🏽 आज का मंत्र-ॐ द्रां द्रीं द्रौं स: शुक्राय नम:।
🤷🏻‍♀️ आज का उपाय-लक्ष्मी मंदिर में चांदी की श्रंगार सामग्री चढ़ाएं।
🪵 वनस्पति तंत्र उपाय-गूलर के वृक्ष में जल चढ़ाएं।
⚛️ पर्व एवं त्यौहार – देवदर्शन, रामानंदाचार्य जयन्ती, स्वामी विवेकानंदजी जन्म जयन्ती”, वर्ल्ड वेटलैंड्स डे, बैरी डिलर जन्म दिवस, क्रिस्टी ब्रिंकले जन्म दिवस, ग्राहम नैश जन्म दिवस, इना गार्टन जन्म दिवस, शकीरा जन्म दिवस, ज़ोसिया मैमेट जन्म दिवस, विश्व आर्द्रभूमि दिवस, रुमेटीइड जागरूकता दिवस, ग्राउंडहॉग दिवस, श्रीलंका राष्ट्रीय दिवस, नेशनल टेटर टोट डे, विश्व विसर्जन दिवस, आचार्य चतुरसेन शास्त्री स्मृति दिवस,महर्षि अन्नासाहेब पटवर्धन स्मृति दिवस, अभिनेत्री शमिता शेट्टी जन्म दिवस, स्वतंत्रता सेनानी राजकुमारी अमृत कौर जन्म दिवस, वन अग्नि सुरक्षा दिवस (सप्ताह)
✍🏼 विशेष – सप्तमी तिथि को आँवला त्याज्य बताया गया है। सप्तमी तिथि मित्रप्रद तिथि मानी जाती है। इतना ही नहीं यह सप्तमी तिथि एक शुभ तिथि भी मानी जाती है। इस सप्तमी तिथि के स्वामी भगवान सूर्य देवता हैं। यह सप्तमी तिथि भद्रा नाम से विख्यात मानी जाती है। यह सप्तमी तिथि कृष्ण पक्ष में मध्यम फलदायीनी मानी जाती है। इस सप्तमी तिथि को सुबह सर्वप्रथम स्नान करके भगवान सूर्य को सूर्यार्घ देकर उनका पूजन करना चाहिये। उसके बाद आदित्यह्रदयस्तोत्रम् का पाठ करना चाहिये। इससे जीवन में सुख, समृद्धि, हर्ष, उल्लास एवं पारिवारिक सुखों कि सतत वृद्धि होती है। सप्तमी तिथि में भगवान सूर्य की पुजा करने से सभी मनोकामनाओं की पूर्ति होती है।
🗽 Vastu tips 🗼
रोटी बनाते समय रखें इस बात का ध्यान जब भी आप रोटी बनाएं तो चकले और बेलन से आवाज नहीं आनी चाहिए। इसके लिए जरूरी है कि चकला स्लैब पर स्थिर रहे। यदि रोटी बनाते समय आवाज आती है तो इससे घरेलू कलह बढ़ता है और धन हानि भी होती है।
गंदा चकला बेलन न रखें रोटियां बनाने के बाद आप चकले और बेलन को अच्छी तरह से धोकर सुखा लें ताकि उसमें नमी न रहे। गंदे चकले बेलन से वास्तु दोष पैदा होता है।
यहां न रखें चकले और बेलन को आटे या किसी भी अनाज के डिब्बे के ऊपर न रखें। ऐसा करने से घर में दरिद्रता आती है।
ऐसे न रखें चकला और बेलन कभी भी चकले और बेलन को उल्टा रखने की गलती न करें। यह भी एक वास्तु दोष होता है।
लकड़ी का चकला होता है शुभ अगर आप पत्थर की जगह लकड़ी का चकला बेलन खरीदतीं है तो यह ज्यादा अच्छा होगा। हालांकि इसकी साफ सफाई का आपको अधिक ध्यान रखना होगा। लकड़ी के अलावा स्टील का चकला भी शुभ माना जाता है।
टूटा चकला बेलन यदि आपका चकला या बेलन टूटा है तो उसे तुरंत बाहर फेंक दें। टूटे चकले बेलन को घर में रखने से आपकी किस्मत भी आपसे रूठ सकती है।
♻️ जीवनोपयोगी कुंजियां ⚜️
ब्रह्मविद्या में आए उपरोक्त सूत्र का भावार्थ है — परमेश्वर व्यवस्था जीव को अवतारों या अन्य निमित्तों के माध्यम से मोक्ष प्राप्त करने का ज्ञान पहुँचाती रहती है। जीव (मनुष्य) उस ज्ञान पर चलते हुए तदनुसार आचरण करता है या नहीं, यह उसकी स्वतंत्रता है। यदि वह निष्काम भाव से मोक्ष प्राप्ति के मार्ग पर चलेगा तो परमेश्वर व्यवस्था उसके लिए मोक्ष यानि परमेश्वर के स्वरूप में पावन होने की परिस्थिति उपलब्ध कराएगी और यदि उसका आचरण सांसारिक आसक्तियों के कारण ज्ञान की बजाय अज्ञान और अन्यथा ज्ञान के अनुसार हुआ तो उसे मोक्ष की प्राप्ति न होकर उसे परमेश्वर व्यवस्था के द्वारा उसके द्वारा किए गए पाप और पुण्य के कर्म-फलों के रूप में विभिन्न योनियों के दुःख और सुख मिलने वाले हैं — जिसे जीव का भाग्य या प्रारब्ध कहा जाता है।
☘️ आरोग्य संजीवनी 🍃
आज हम कुछ ऐसे खाद्य पदार्थों के सुझाव देने वाले हैं जिन्हें अपने नियमित आहार में शामिल करने से अनेक स्वास्थ्य लाभ प्राप्त होने के साथ-साथ बॉडी में गर्माहट भी लाई जा सकती है।
सर्दियों में गर्म तासीर के खाद्य या पेय पदार्थ शरीर के लिए लाभदायक होते हैं। सर्दी के मौसम में अदरक, कड़ी पत्ता, काली मिर्च, लौंग, इलायची, जीरा, टमाटर जैसी विभिन्न सामग्रियां खाद्य या पेय पदार्थों को स्वादिष्ट और पौष्टिक बनाने के साथ-साथ सर्दी-जुकाम, बुखार, गले की खराश, खांसी आदि समस्याओं से भी मुक्ति पाने के लिए एक अच्छा उपाय है तथा यह इनको खाने से शरीर में गर्माहट भी सदैव बनी रहती है।
इनके साथ साथ ठंड का मौसम पौष्टिक आहार को पचाने के लिए काफी अनुकूल होता है इसलिए सर्दियों में कुछ विशेष खाद्य पदार्थों का इस्तेमाल किया जाना सम्पूर्ण स्वास्थ्य के लाभकारी सिद्ध होता है।
📖 गुरु भक्ति योग 🕯️
किसी के प्रति ऋण चुकाना, किसी के एहसान का बदला चुकाना, किसी की मदद करना या किसी को नुक़सान पहुँचाना आदि इस संसार में किए जाने वाले कर्म हैं, जिनका संबंध केवल और केवल हमारे अपने पिछले या वर्तमान कर्मों और उनके फलों से होता है।
हम कोई भी कर्म या तो किसी पिछले कर्म के फल के रूप में अच्छी या बुरी उत्प्रेरक परिस्थिति उपस्थित होने पर करते हैं, या मन में कोई प्रवृत्ति जागने पर करते हैं या अपनी किसी आवश्यकता की पूर्ति के लिये नए कर्म के तौर पर करते हैं।
सभी कर्म परमेश्वर के निज़ाम के द्वारा हमारे खाते में लिखे जाते हैं और उनके फलों को हमें देर-सवेर वर्तमान जन्म में या अगले जन्मों में भोगना पड़ता है।
हमारे संपर्क में आने वाला कोई भी व्यक्ति-विशेष सही मायनों में मनुष्य योनि में आया एक स्वतंत्र जीवात्मा है, जैसे कि हम स्वयं हैं। उससे हमारा जितनी भी देर का संबंध है, वह केवल इस जन्म भर का है। उससे न तो हमारा कोई संबंध पिछले जन्म में था और न ही इस जन्म के बाद रहने वाला है।
अनंत जीवात्माएँ बस अपने अपने कर्मों को भोगते हुए विभिन्न योनियों में जन्म-जन्मांतरों से घूम रही हैं। दूसरे शब्दों में कहें तो हम केवल स्वयं के कर्मों के क़र्ज़दार हैं।
मनुष्य योनि में हमें सुख-दुःख उठाते हुए उन कर्मफलों का भुगतान किसी के बेटा या बेटी बन कर, किसी के माँ या बाप बनकर, किसी का दोस्त बनकर, किसी का मालिक बनकर तो किसी का नौकर आदि बनकर करना पड़ता है।
समस्या यह है कि कर्मफलों का भुगतान करते हुए हम पिछले कर्मफल तो समाप्त करते जाते हैं, परंतु अच्छे-बुरे नए कर्मफल जोड़ते जाते हैं, जिन्हें हमें परमेश्वर के निज़ाम के अटूट नियमों के अनुसार फिर विभिन्न योनियों में भोगना पड़ता है। यह सिलसिला जन्म-जन्मांतरों से चलता आ रहा है।
श्रीमद्भगवद्गीता में बताये गये निष्काम कर्मयोग और ब्रह्मविद्या शास्त्र में निरूपित आचरणीय जीवन तत्व प्रणाली का आचरण उपरोक्त सिलसिले का एक-मात्र तोड़ है।
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⚜️ सोमवार और शुक्रवार कि सप्तमी विशेष रूप से शुभ फलदायी नहीं मानी जाती बाकी दिनों कि सप्तमी सभी कार्यों के लिये शुभ फलदायी मानी जाती है। सप्तमी को भूलकर भी नीला वस्त्र धारण नहीं करना चाहिये तथा ताम्बे के पात्र में भोजन भी नहीं करना चाहिये। सप्तमी को फलाहार अथवा मीठा भोजन विशेष रूप से नमक के परित्याग करने से भगवान सूर्यदेव कि कृपा सदैव बनी रहती है।
शास्त्र के अनुसार जिस व्यक्ति का जन्म सप्तमी तिथि में होता है, वह व्यक्ति बहुत ही भाग्यशाली होता है। इस तिथि में जन्म लेनेवाला जातक गुणवान और प्रतिभाशाली होता है। ये अपने मोहक व्यक्तित्व से लोगों को अपनी ओर आकर्षित करने की योग्यता रखते हैं। इनके बच्चे भी गुणवान और योग्य होते हैं। धन धान्य के मामले में भी यह व्यक्ति काफी भाग्यशाली होते हैं। ये संतोषी स्वभाव के होते हैं और इन्हें जितना मिलता है उतने से ही संतुष्ट रहते हैं।

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