
आचार्य श्री गोपी राम (ज्योतिषाचार्य) जिला हिसार हरियाणा मो. 9812224501
✦••• *जय श्री हरि* •••✦
🧾 *_आज का पंचांग_* 🧾
*रविवार 14 जून 2026_*
*_भगवान सूर्य जी का मंत्र : ऊँ घृणि सूर्याय नम: ।।_*
🌠 *_रविवार को की गई सूर्य पूजा से व्यक्ति को घर-परिवार और समाज में मान-सम्मान की प्राप्ति होती है। रविवार के दिन उगते हुए सूर्य को देव को एक ताबें के लोटे में जल, चावल, लाल फूल और रोली डालकर अर्ध्य करें।
*_इस दिन आदित्य ह्रदय स्रोत्र का पाठ करें एवं यथा संभव मीठा भोजन करें। सूर्य को आत्मा का कारक माना गया है, सूर्य देव को जल देने से पितृ कृपा भी मिलती है।
*_रविवार के दिन भैरव जी के दर्शन, आराधना से समस्त भय और संकट दूर होते है, साहस एवं बल की प्राप्ति होती है। रविवार के दिन जी के दर्शन अवश्य करें ।
*_रविवार के दिन भैरव जी के मन्त्र ” ॐ काल भैरवाय नमः “ या ” ॐ श्री भैरवाय नमः “ की एक माला जाप करने से समस्त संकट, भय दूर होते है, रोगो, अकाल मृत्यु से बचाव होता है, मनवांछित लाभ मिलता है।
🔮 *_शुभ हिन्दू नववर्ष 2026 विक्रम संवत : 2083 सिद्धार्थी विक्रम : 1969 शर्वरी_*
🌐 *_रौद्र संवत्सर विक्रम संवत 2083,_*
✡️ *_शक संवत 1948 (पराभव संवत्सर), चैत्र_*
☮️ *_गुजराती सम्वत : 2082 पिङ्गल_*
☸️ *_काली सम्वत् 5127_*
🕉️ *_संवत्सर (बृहस्पति) पराभव_*
☣️ *_आयन – उत्तरायण_*
☂️ *_ऋतु – सौर ग्रीष्म ऋतु_*
☀️ *_मास – ज्यैष्ठ मास_*
🌒 *_पक्ष – कृष्ण पक्ष_*
📅 *_तिथि – रविवार ज्येष्ठ माह के कृष्ण पक्ष चतुर्दशी तिथि 12:20 PM तक उपरांत अमावस्या_*
🖍️ *_तिथि स्वामी :- चतुर्दशी तिथि के स्वामी भगवान भोलेनाथ जी है। प्रत्येक माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को मासिक शिवरात्रि मनाई जाती है । चतुर्दशी को चौदस भी कहते हैं। चतुर्दशी तिथि के स्वामी भगवान शिव हैं।_*
💫 *_नक्षत्र- नक्षत्र रोहिणी 10:13 PM तक उपरांत म्रृगशीर्षा_*
🪐*_नक्षत्र स्वामी – नक्षत्र के स्वामी ग्रह चंद्रमा हैं। रोहिणी नक्षत्र के मुख्य देवता प्रजापति (भगवान ब्रह्मा) हैं।_*
⚜️ *_योग – धृति योग 01:15 PM तक, उसके बाद शूल योग_*
⚡ *_प्रथम करण : शकुनि 12:20 PM तक_*
✨ *_द्वितीय करण : चतुष्पद 10:22 PM तक, बाद नाग_*
🔥 *_गुलिक काल : रविवार को शुभ गुलिक काल 02:53 पी एम से 04:17 पी एम_*
🤖 *_राहुकाल (अशुभ) – सायं 4:51 बजे से 6:17 बजे तक। राहु काल में शुभ कार्य करना वर्जित माना गया है।_*
⚜️ *_दिशाशूल – रविवार को पश्चिम दिशा की यात्रा नहीं करनी चाहिये, यदि अत्यावश्यक हो तो पान एवं घी खाकर यात्रा कर सकते है।_*
🌞 *_सूर्योदयः – प्रातः 05:21:54_*
🌅 *_सूर्यास्तः – सायं 19:20:14_*
👸🏻 *_ब्रह्म मुहूर्त : प्रातः काल 04:02 ए एम से 04:43 ए एम_*
🌆 *_प्रातः सन्ध्या : प्रातः काल 04:23 ए एम से 05:23 ए एम_*
🌟 *_अभिजित मुहूर्त : सुबह 11:54 ए एम से 12:49 पी एम_*
✡️ *_विजय मुहूर्त : दोपहर 02:41 पी एम से 03:37 पी एम_*
🐃 *_गोधूलि मुहूर्त : सायं काल 07:19 पी एम से 07:39 पी एम_*
🌌 *_सायाह्न सन्ध्या : सायं काल 07:20 पी एम से 08:20 पी एम_*
💧 *_अमृत काल : सायं काल 07:26 पी एम से 08:50 पी एम_*
🗣️ *_निशिता मुहूर्त : रात्रि काल 12:01 ए एम, जून 15 से 12:42 ए एम, जून 15_*
🚓 *_यात्रा शकुन-इलायची खाकर यात्रा प्रारम्भ करें।_*
👉🏼 *_आज का मंत्र-ॐ घृणि: सूर्याय नम:।_*
💁🏻♀️ *_आज का उपाय-विष्णु मंदिर में पिताम्बर चढ़ाएं।_*
🌳 *_वनस्पति तंत्र उपाय-बेल के वृक्ष में जल चढ़ाएं।_*
⚛️ *_पर्व एवं त्यौहार – पुरुषोत्तम मास का 29वाँ दिन/ रोहिणी व्रत/ अधिक दर्श अमावस्या/ अमावस्या प्रारम्भ दोपहर 12.20/ अन्वाधान/ आडल योग/ भारतीय अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत स्मृति दिवस, विश्व रक्तदाता दिवस, राष्ट्रीय ध्वज दिवस, अभिनेता शेखर सुमन जन्म दिवस, अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप जन्म दिवस, राष्ट्रीय बाल दिवस, भारतीय उद्योगपति ‘आदित्य बिड़ला ग्रुप’ के अध्यक्ष कुमार मंगलम बिड़ला जन्म दिवस, भारतीय राजनीतिज्ञ केदार पांडे जन्म दिवस, सिक्खों के छठे गुरु गुरु हरगोविंद सिंह जयन्ती, अभिनेता भरत भूषण जन्म दिवस, सरबजीतचीमा पंजाबी गायक जन्म दिवस, भौतिक वैज्ञानिक कार्यमाणिवकम श्रीनिवास कृष्णन स्मृति दिवस, प्रसिद्ध संगीत साधिका हीराबाई बारोदकर जन्म दिवस
✍🏼 *_तिथि विशेष – चतुर्दशी तिथि को शहद त्याज्य होता है। चतुर्दशी तिथि को एक क्रूरा तिथि मानी जाती है। इतना ही नहीं चतुर्दशी तिथि को उग्रा तिथि भी माना जाता है। यह चतुर्दशी तिथि रिक्ता नाम से विख्यात मानी जाती है। यह चतुर्दशी तिथि शुक्ल पक्ष में शुभ और कृष्ण पक्ष में अशुभ फलदायिनी मानी जाती है। इस चतुर्दशी तिथि के देवता भगवान शिवजी हैं।।
🍃 *_Vastu tips_* ☘️
क्रासुला प्लांट को कई मनी मैग्नेट भी कहा जाता है। इसकी गोल और मोटी पत्तियां समृद्धि और उन्नति का प्रतीक मानी जाती हैं। मान्यता है कि यह पौधा घर और कार्यस्थल में सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह बढ़ाता है, जिससे आर्थिक प्रगति और नए अवसरों के रास्ते खुलते हैं।
*_उत्तर दिशा: वास्तु में उत्तर दिशा का संबंध धन के देवता कुबेर से बताया है। इस दिशा में क्रासुला प्लांट रखने से करियर में आगे बढ़ने के अवसर मिल सकते हैं। साथ ही व्यापार और नौकरी में सकारात्मक परिणाम देखने को मिलते हैं।
*_पूर्व दिशा: पूर्व दिशा सूर्य देव की दिशा मानी जाती है। इस स्थान पर क्रासुला रखने से घर में सकारात्मक माहौल बना रहता है। इससे परिवार के लोगों के बीच सुख-शांति बनी रहती है।
*_दक्षिण-पूर्व दिशा: वास्तु में दक्षिण-पूर्व दिशा का संबंध धन और वैभव से बताया जाता है। इस कोने में क्रासुला प्लांट रखने से आर्थिक स्थिरता बढ़ने और आय के नए स्रोत बनने की संभावना मानी जाती है।
❇️ *जीवनोपयोगी कुंजियां* ⚜️
वजन होता है कम: ओट्स को शहद में भिगोकर खाने से वजन कम होता है। ओट्स फाइबर से भरपूर होता है जो भूख को कंट्रोल करता है और आपके मेटाबॉल्ज़िम को भी बूस्ट करता है। वहीं, शहद में नेचुरल मिठास होती है जो मीठे की क्रेविंग को पूरा करता है। यानी ये दोनों मिलकर आपके खाने की इच्छा को कम करते हैं जो वजन कम करने में आपके लिए बेहद कारगर है।
*_शरीर को मिलती है ऊर्जा: ओट्स फाइबर से भरपूर होता है और शहद नेचुरल स्वीटनर का काम करता है जो आपको तुरंत एनर्जी प्रदान करता है। सुबह खाली पेट इसका सेवन करने से आप दिन भर ऊर्जा से भरपूर रहेंगे।
*_पाचन होता है बेहतर: ओट्स को शहद में भिगोकर खाने से पाचन बेहतर होता है। दरअसल, ओट्स में मौजूद घुलनशील फाइबर पाचन को बेहतर करते हैं और शहद आपके ओवरऑल डाइजेस्टिव सिस्टम को सपोर्ट करता है।
*_स्किन होती है बेहतर: ओट्स को शहद में भिगोकर आप इसका इस्तेमाल खाने की बजाय स्किन के निखार के लिए भी कर सकते हैं। शहद से जहां आपकी स्किन में नमी बनाए रखता है वहीं, ओट्स डेड स्किन का सफाया करता है।
🍒 *आरोग्य संजीवनी* 🫐
*गर्मी में काली मिर्च का सेवन कैसे करें?_*
*_गर्मियों में सीमित मात्रा में काली मिर्च का उपयोग सब्जी में किया जा सकता है। इसके अलावा छाछ, सलाद, सूप या किसी चटनी में भी काली मिर्च डाल सकते हैं। अगर आपको पेट में जलन रहती है या बहुत गर्मी रहती है तो किसी एक्सपर्ट की सलाह से ही काली मिर्च का सेवन शुरू करें।
काली मिर्च के फायदे गर्मी में पाचन क्रिया धीमी हो जाती है। ऐसे में अगर आप काली मिर्च को डाइट में शामिल करते हैं तो इसमें पाए जाने वाले कुछ तत्व खाने में पाए जाने वाले पोषक तत्वों को आसानी से शरीर तक पहुंचाने में मदद करते हैं। इसके लिए काली मिर्च में पाइपरीन नामक तत्व असरदार साबित होता है। काली मिर्च खाने से गैस या बदहजमी जैसी समस्या नहीं होती है। इससे खाना जल्दी और आसानी से पच जाता है। सीजनल बीमारियों को दूर करने में, संक्रमण से लड़ने में भी काली मिर्च मददगार हैं।
📖 *_गुरु भक्ति योग_* 🕯️
क्या आप जानते हैं कि धरती पर भगवान शिव के आंसुओं से बने दो ऐसे पवित्र कुंड हैं जहां स्नान करने से मनुष्य के सभी पाप धुल जाते हैं। पौराणिक कथाओं अनुसार इनमें से एक कुंड राजस्थान के पुष्कर में स्थित है। जिसे आज पवित्र पुष्कर झील के रूप में जाना जाता है। कहते हैं यहां पवित्र स्नान करने से व्यक्ति को उसके सभी पापों से छुटकारा मिलने के साथ-साथ मानसिक शांति भी मिलती है। तो वहीं दूसरा कुंड पड़ोसी देश पाकिस्तान के पंजाब प्रांत में स्थित है, जिसे ‘कटास राज कुंड’ के नाम से जाना जाता है।
*पाकिस्तान में स्थित है भगवान शिव के आंसू से बना पवित्र कुंड_*
पाकिस्तान के पंजाब प्रांत के चकवाल जिले में स्थित कटासराज मंदिर का इतिहास काफी पुराना है। वैसे तो यहां पूरे साल भक्तों का आना-जाना लगा रहता है, लेकिन महाशिवरात्रि पर्व के दौरान यहां श्रद्धालुओं की सबसे ज्यादा भीड़ उमड़ती है। धार्मिक मान्यताओं अनुसार इस मंदिर में स्थित कुंड का पानी कभी सूखता नहीं है। जिसे देख हर कोई हैरान रह जाता है। इतना ही नहीं इस पवित्र कुंड का पानी औषधीय गुणों से भरपूर माना जाता है। यहां आने वाले श्रद्धालुओं का ऐसा मानना है इस कुंड में स्नान करने से मनुष्य को शारीरिक कष्टों से मुक्ति मिल जाती है। ऐसी मान्यता है कि वनवास के दौरान पांडवों ने भी अपने जीवन के कुछ साल यहां बिताए थे। इसके अलावा ये भी कहा जाता है कि यही वह स्थान है जहां यक्ष ने पांडवों की परीक्षा ली थी। जिसमें युद्धिष्ठिर ने सफलता पाकर अपने भाइयों को जीवनदान दिलाया था।
*इन पवित्र कुंडों से जुड़ी पौराणिक कथा_*
पौराणिक कथाओं अनुसार जब राजा दक्ष ने अपने यहां यज्ञ का आयोजन किया था तब उन्होंने माता सती और भगवान शिव को आमंत्रित नहीं किया था। लेकिन फिर भी माता सती वहां जाने की जिद्द करने लगीं। महादेव के समझाने पर भी जब सती नहीं मानीं तो भगवान ने उन्हें जाने की आज्ञा दे दी। शिव जानते थे कि यहां जो कुछ भी होगा उसे देवी सती सहन नहीं कर पाएंगी। जैसे ही सती यज्ञ में शामिल होने के लिए पहुंची तो उनके पिता ने उनके पति यानी भगवान शिव का खूब अपमान किया। पिता द्वारा किया गया ये अपमान माता सहन नहीं कर पाईं। जिस कारण उन्होंने यज्ञ कि अग्नि में कूदकर अपने प्राण त्याग दिए। जब यह बात भगवान शिव को पता चली तो वे महाशोक में डूब गए और उनके आंखों से आंसू बहने लगे। इसी समय भगवान के आंसू की दो बूंदे धरती के दो स्थानों पर जा गिरीं। जहां इन पवित्र कुंडों का निर्माण हुआ।
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⚜️ *_चतुर्दशी तिथि को भगवान शिव का ज्यादा-से-ज्यादा पूजन, अर्चन एवं अभिषेक करना करवाना चाहिये। सामर्थ्य हो तो विशेषकर कृष्ण पक्ष कि चतुर्दशी तिथि को विद्वान् वैदिक ब्राह्मणों से विधिवत भगवान शिव का रुद्राभिषेक करवाना चाहिये। आज चतुर्दशी तिथि में भगवान् शिव का रुद्राभिषेक यदि शहद से किया करवाया जाय तो इससे मारकेश कि दशा भी शुभ फलदायिनी बन जाती है। जातक के जीवन कि सभी बाधायें निवृत्त हो जाती है और जीवन में सभी सुखों कि प्राप्ति सजह ही हो जाती है।।


