ज्योतिष

आज का पंचाग मंगलवार 01 नवम्बर 2022

आचार्य श्री गोपी राम (ज्योतिषाचार्य) जिला हिसार हरियाणा मो. 9812224501
. ✦•••  *_जय श्री हरि_*  •••✦
    आज का पंचाग

मंगलवार 01 नवम्बर 2022
हनुमान जी का मंत्र : हं हनुमते रुद्रात्मकाय हुं फट् ।
🦚 01 नवम्बर 2022 दिन मंगलवार को कार्तिक शुक्ल अष्टमी अर्थात गोपाष्टमी व्रत है। आज गायों को अलंकृत अर्थात सजा-धजाकर विधिवत पूजन किया जाता है। आज ही भगवान श्रीकृष्ण ने गायों का पूजन करके वृन्दावन में गाय चराना आरम्भ किया था। आप सभी सनातनियों को गोपाष्टमी व्रत हार्दिक मंगलकामनाएँ।।
🌌 दिन (वार) – मंगलवार के दिन क्षौरकर्म अर्थात दाढ़ी काटने या कटाने से उम्र कम होती है। अत: इस दिन बाल और दाढ़ी नहीं कटवाना चाहिए । मंगलवार को बजरंगबली की पूजा का विशेष महत्व है।
मंगलवार को यथासंभव मंदिर में हनुमान जी के दर्शन करके उन्हें लाल गुलाब, इत्र अर्पित करके बूंदी / लाल पेड़े या गुड़ चने का प्रशाद चढ़ाएं । हनुमान जी की पूजा से भूत-प्रेत, नज़र की बाधा से बचाव होता है, शत्रु परास्त होते है।
मंगलवार के व्रत से सुयोग्‍य संतान की प्राप्ति होती है, बल, साहस और सम्मान में भी वृद्धि होती है।
🔮 शुभ विक्रम संवत्-2079, शक संवत्-1944, हिजरी सन्-1443, ईस्वी सन्-2022
🌐 संवत्सर नाम-राक्षस
✡️ शक संवत 1944 (शुभकृत् संवत्सर)
☸️ काली सम्वत 5123
☣️ सायन दक्षिणायन
🌦️ ऋतु – सौर शरद ऋतु
🌤️ मास – कार्तिक माह
🌗 पक्ष – शुक्ल पक्ष
📆 तिथिः- अष्टमी तिथि 23:50:00 तक तदोपरान्त नवमी तिथि
✏️ तिथि स्वामीः- अष्टमी तिथि के स्वामी भगवान शिव जी हैं तथा नवमी तिथि की स्वामिनि दुर्गा जी हैं।
💫 नक्षत्रः- श्रवण 26:53:00 तक तदोपरान्त घनिष्ठा
🪐 नक्षत्र स्वामीः- श्रवण नक्षत्र के स्वामी चन्द्र देव हैं तथा घनिष्ठा नक्षत्र के स्वामी मंगल देव हैं।
📣 योगः- शूल 13:14:31 तक तदोपरान्त गंड
प्रथम करण : विष्टि – 12:06 पी एम तक
द्वितीय करण :- बव – 11:04 पी एम तक बालव
🔥 गुलिक कालः- शुभ गुलिक 12:04:00 P.M से 01:27:00 P.M तक
⚜️ दिशाशूलः आज के दिन उत्तर दिशा की यात्रा नहीं करना चाहिए यदि यात्रा करना ज्यादा आवश्यक हो तो घर से गुड़ खाकर जायें।
🤖 राहुकालः- राहु काल 02:50:00P.M से 04:13:00P.M तक राहू काल में शुभ कार्य करना वर्जित माना गया हैं।
🌞 सूर्योदय – प्रातः 06:27:11
🌅 सूर्यास्त – सायं 17:33:17
👸🏻 ब्रह्म मुहूर्त : 04:49 ए एम से 05:41 ए एम
🌆 प्रातः सन्ध्या : 05:15 ए एम से 06:33 ए एम
🌟 अभिजित मुहूर्त : 11:42 ए एम से 12:27 पी एम
🔯 विजय मुहूर्त : 01:55 पी एम से 02:39 पी एम
🐃 गोधूलि मुहूर्त : 05:25 पी एम से 05:49 पी एम
🌆 सायाह्न सन्ध्या : 05:36 पी एम से 06:54 पी एम
💧 अमृत काल : 05:05 पी एम से 06:35 पी एम
🗣️ निशिता मुहूर्त : 11:39 पी एम से 12:31 ए एम, नवम्बर 02
❄️ रवि योग : 02:53 ए एम, नवम्बर 02 से 06:34 ए एम, नवम्बर 02
🔱 शूल योग – दोपहर 1 बजकर 15 मिनट तक
☄️ स्थायीजय योग – रात 11 बजकर 4 मिनट तक
🌧️ श्रवण नक्षत्र – देर रात 2 बजकर 53 मिनट तक
🚓 यात्रा शकुन- दलिया का सेवन कर यात्रा पर निकलें।
👉🏼 आज का मंत्र-ॐ अं अंगारकाय नम:।
🤷🏻‍♀️ आज का उपाय-बहते जल में 250 ग्राम बताशे प्रवाहित करें।
🪵 वनस्पति तंत्र उपाय- खैर के वृक्ष में जल चढ़ाएं।
⚛️ पर्व एवं त्यौहार – पांडिचेरी विलय दिवस (भारत), आंध्र प्रदेश स्थापना दिवस, कर्नाटक स्थापना दिवस, केरल दिवस, मध्य प्रदेश दिवस, पंजाब दिवस, हरियाणा दिवस, अंतर्राष्ट्रीय रेड क्रास दिवस (सप्ताह), श्री दुर्गाष्टमी, गोपाष्टमी व्रत
✍🏽 विशेष – अष्टमी को नारियल एवं नवमी को काशीफल अर्थात कोहड़ा एवं कद्दू दोनों ही त्याज्य होता है। अष्टमी तिथि बलवती अर्थात स्ट्रांग तिथि मानी जाती है। इतना ही नहीं अपितु अष्टमी तिथि व्याधि नाशक तिथि भी मानी जाती है। यह अष्टमी तिथि जया नाम से विख्यात मानी जाती है। यह अष्टमी तिथि कृष्ण पक्ष में मध्यम फलदायिनी मानी जाती है।
🏘️ Vastu tips 🏚️
इस दिशा में रखें जल निकाय: वास्तु शास्त्र के अनुसार जल निकाय को उत्तर, उत्तर पूर्व दिशा में रखे. वहीं घर में आप कोई फाउंटेन लगवा रहें है तो उसके पानी की धारा को उत्तर से पूर्व की तरफ रखें. वहीं पानी की टंकी को घर के दक्षिण, दक्षिण पूर्व या दक्षिण पश्चिम दिशा में रखें. पानी की टंकी इन दिशाओं में रखने पर घर में धन का प्रवाह बढ़ता है.
घर में इस दिशा में रखें तिजोरी: वास्तु शास्त्र के अनुसार घर में तिजोरी को दक्षिण या दक्षिण पश्चिम दिशा की तरफ रखना चाहिए. वास्तु के अनुसार तिजोरी का दरवाजे को उत्तर दिशा की तरफ रखना चाहिए. इससे घर में धन की वृद्धि होती है.
हमेशा व्यवस्थित रखें घर: कहते है कि जो घर साफ-सुथरा और व्यवस्थित रहता है वहां पर देवी लक्ष्मी का वास हमेशा रहता है. वहीं वास्तु शास्त्र में भी कहा गया है. वास्तु के अनुसार घर के उत्तर दिशा व्यवस्थित रखना चाहिए. ऐसा करने से घर में धन की वृद्धि होती है. वहीं घर के इस हिस्से में कोई भारी फर्नीचर या उपकरण न रखें. ऐसा करने से बचना चाहिए.
घर के दरवाजे और खिड़किया रखें साफ: वास्तु शास्त्र के अनुसार घर के दरवाजे और खिड़कियों को साफ रखना चाहिए. ऐसा करने से घर सकारात्मक ऊर्जा बनी रहती है. जिसके चलते घर में धन-धान्य की वृद्धि होती है.
🔰 जीवनोपयोगी कुंजियां ⚜️
स्ट्रेस दूर करने आसान उपाय:-
खुद के बिजी रखें, जितना खाली वक्त हैगा उतना नेगेटिव विचार दिमाग में आते हैं।
आपने मन का काम करने की कोशिस करें इससे आपका दिमाग रिलैक्स होगा।
तनाव से बचना है तो रुटीन में योग या मेडिटेशन जरूर करना चाहिए, इससे दिमाग शांत रहता है।
कैफीन इनटेक कम करें, इससे आपको रात में सोने में परेशानी हो सकती है और आप रातभर बिना मतलब की बातें सोचने लगते हो।
अच्छी नींद स्ट्रेस को कम करने में मदद करती है इसलिए आप कम से कम 7 से 8 घंटे की नींद लें।
जब भी टेंशन हो डीप ब्रीथिंग करें।
शराब का सेवन करने से भी लोग तनाव के शिकार हो जाते हैं।
तनाव होने पर हमेशा चीजों को सकारात्मक तरीके से देखने की कोशिश करनी चाहिए ।
हरी घास पर टहलने से आपका तनाव दूर होगा और आप फ्रेश महसूस करेंगे।
तनाव कम करने के लिए आप अपना मनपसंद म्यूजिक सुनें। ये म्यूजिक आपको मानसिक शांति देने के साथ तनाव को कम करने में मदद करेगा।
हेल्दी डाइट को रूटीन में शामिल करें, जंक फूड और बाहर की चीजों को डाइट से बिलकुल हटा दें।
🌸 आरोग्य संजीवनी 🌷
महादुर्गा चूर्ण
(भूत-प्रेत प्रकोप, राक्षस, ब्रह्मराक्षस प्रकोप, किया कराया, जादू टोना, तांत्रिक-मान्त्रिक प्रयोग, कृत्या प्रकोप, वातावरण से कीटाणु-विषाणु नष्ट करने वाला धुप)
इस धुप को 10 X 12 फीट के कमरे में 10 ग्राम धूपदानी में जलाने पर सभी प्रकार के जीवाणु-विषाणु नष्ट होते हैं
इसे सूंघने वाले या इससे प्रभावित कमरे में सांस लेने वाले के शरीर में व्याप्त जीवाणु-विषाणु, भूत – प्रेत आदि भाग जाते हैं ।
कमरों में और मकान के बाहर चारो ओर इसका धुप दिखने से वह के सभी अदृश्य उपद्रवी भाग जाते हैं ।
सभी प्रकार के ग्रह-दोषों को भी दूर करता है ।
उपयोग – 15 दिन लगातार, फिर हफ्ते में एक बार ।
📖 गुरु भक्ति योग 🕯️
भक्ति योग का अर्थ अपने को ईश्वर प्रति समर्पण करना है | भक्ति योग के लिए श्रद्धा का होना अत्यंत आवश्यक है | जब तक ईश्वर की आराधना भक्ति से की जाती है तब तक मन में शुद्धता का विकास और ईश्वर के चैतन्य का ज्ञान हो जाता है | भक्ति में प्रेम और प्रेमी का भेद नष्ट हो जाता है तथा दोनों के बीच सम्बन्ध स्थापित हो जाता है | एक भक्त ईश्वर के गुणों का स्मरण कर निरंतर ईश्वर के ध्यान में लीन हो जाता है | जिस प्रकार एक गूंगा व्यक्ति मीठे के स्वाद का वर्णन नही कर सकता | अतः भक्ति योग में प्रेमपूर्वक भगवान के सगुण रूप की आराधना करना , उस पर जल चढ़ाना , फूल अर्पित करना , पूजा अर्चना करना और प्रेम पूर्वक उसे अपना स्वामी , मित्र अथवा प्रेमी मानना आदि इस योग के अंतर्गत आता है |
श्रवण प्रभु के गुणों को सुनना अर्थात वह भक्ति जो सुनने से पैदा हो श्रवण कहलाती है | इस भक्ति के अंतर्गत सन्देश , उपदेश , प्रवचन एवं सत्संग आदि आते हैं जिसमें भक्त अपने गुरु या किसी संत आदि के मुख से भगवान् की महत्ता को सुनता है और विभोर हो जाता है और यही श्रवण भक्त में प्रभु भक्ति की जोत जलाती है और भक्ति की ओर उन्मुख करती है |
कीर्तन इसमें भक्त अपने शरीर के रोम – रोम से परमात्मा का गुणगान करता है | वह प्रभु में इतना लीन हो जाता है कि आनंद में गाता है तथा गाकर उसे रिझाता है | भक्त के गीतों में , भजनों में प्रभु से मिलनें की पुकार होती है | जिस तरह बच्चा रोकर अपनी माँ को बुलाता है और माँकहीं भी हो असकी आवाज सुनकर आ जाती है ठीक उसी प्रकार भक्त भी अपनें करुण स्वर में प्रभु मिलन की तड़प में मिलनें की आस लिए भजन कीर्तन करता है |
स्मरण इस प्रकार की भक्ति में भक्त शरीर की नहीं बल्कि मन की आँखों से प्रभु को देखता है | भक्त की यात्रा बाहर के जगत की नहीं बल्कि अंतर्जगत की होती है | ध्यान , चिंतन , मनन एवं मौन आदि द्वारा भक्त अपने प्रभु को यद् करता है , भीतर के आकाश में वः परमात्मा को पता है , जिससे वह बातें करता है और वह अपनें ध्यान के द्वारा प्रभु में लिप्त हो जाता है।
पादसेवनम इस प्रकार की भक्ति में भक्त स्वयं को अपने अराध्य के चरणों में अर्पित कर देता है | वह स्वयं को इतना तुच्छ समझता है की चरणों को स्पर्श कर उनकी कृपा की राह ताकता रहता है कि कब प्रभु उसको आशीर्वाद देंगे और उनका जीवन सफल बनेगा | ईश्वर की मूर्ति आदि को स्नान करवाना , वस्त्र पहनाना और चरण दबाना आदि पद सेवन कहलाता है |
※══❖═══▩ஜ ۩۞۩ ஜ▩═══❖══※
⚜️ अष्टमी तिथि के देवता भगवान शिव भोलेनाथ जी माने जाते हैं। इसलिये इस अष्टमी तिथि को भगवान शिव का दर्शन एवं पूजन अवश्य करना चाहिए। आज अष्टमी तिथि में कच्चा दूध, शहद, काला तिल, बिल्वपत्र एवं पञ्चामृत शिवलिंग पर चढ़ाने से भगवान शिव की कृपा सदैव बनी रहती है। घर में कोई रोगी नहीं होता एवं सभी मनोकामनाओं की सिद्धि तत्काल होती है।
मंगलवार को छोड़कर बाकि अन्य किसी भी दिन की अष्टमी तिथि शुभ मानी गयी है। परन्तु मंगलवार की अष्टमी शुभ नहीं होती। इसलिये इस अष्टमी तिथि में भगवान शिव के पूजन से हर प्रकार की सिद्धियाँ प्राप्त होती है। इस अष्टमी तिथि को अधिकांशतः विष्णु और वैष्णवों का प्राकट्य हुआ है। इसलिये आज अष्टमी तिथि में भगवान शिव और भगवान नारायण दोनों का पूजन एक साथ करके आप अपनी सम्पूर्ण मनोकामनायें पूर्ण कर सकते हैं।
अष्टमी तिथि को जिस व्यक्ति का जन्म होता है वह व्यक्ति धर्मात्मा होता है। मनुष्यों पर दया करने वाला तथा हरेक प्रकार के गुणों से युक्त गुणवान होता है। ये कठिन से कठिन कार्य को भी अपनी निपुणता से पूरा कर लेते हैं। इस तिथि के जातक सत्य का पालन करने वाले होते हैं यानी सदा सच बोलने की चेष्टा करते हैं। इनके मुख से असत्य तभी निकलता है जबकि किसी मज़बूर को लाभ मिले।

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