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कई गुणों से भरपूर है मुनगा की खेती, विभाग नहीं कर रहा प्रेरित

सिलवानी। उद्यान विभाग द्वारा संचालित विभिन्न योजनाओं के माध्यम से रोपित की जाने वाली फसलों में मुनगा का स्थान अलग है। लेकिन संतुलित आहार की पूर्ति और किसानों की आमदनी दोगुनी करने के लिए इसकी खेती के लिए विभाग की ओर से किसानों को जानकारी व जागरुक नहीं किया जा रहा है। जिससे तहसील में मुनगा मांग के अनुसार नहीं आ पा रहा है। मुनगा न केवल सब्जी के लिए उपयोगी है बल्कि यह औषधी गुणों से भी भरपूर है। शरीर में आवश्यक खनिजों की पूर्ति व बीमारियां को दूर करने के लिए मुनगा और इसकी भाजी का उपयोग किया जाता है। इसको ध्यान में रखते हुए किसानों को मुनगा की खेती के लिए प्रेरित नहीं किया जा रहा है। उद्यान विभाग की ओर से इससे जुड़ी जानकारी देने और लोगों को मुनगा की खेती के लिए प्रेरित नहीं किया जा रहा है। अगर किसानों को इसकी खेती के बारे में जानकारी दी जाए और योजनाओं का लाभ दिलाया जाए। तो किसानों को अधिक मुनाफा हो सकेगा। आम तौर पर बुवाई के दो से तीन वर्ष में फली देने वाले इस मुनगा की खेती किसानों के लिए बेहतर आमदनी का जरिया हो सकता है।
कोरोना के बाद बढ़ी मुनगा की मांग
कोरोना महामारी के साथ ही औषधीय गुणों वाले फल, सब्जी और अन्य चीजों की मांग बढ़ी हुई है। ऐसे ही औषधीय गुणों से भरपूर मुनगा की मांग भी बढ़ी है। मुनगा दक्षिण भारत में सांभर में उपयोग किया जाता है। इसके बीज में औषधीय गुण होते हैं, इसलिए इसकी मांग विदेशों में भी होने लगी है। इसकी फसल से जहां लोगों को अतिरिक्त आय मिल रहा है, वहीं औषधीय गुणों ने इसकी डिमांड बढ़ा दी है।

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