कड़ाके की सर्दी फिर भी नगर परिषद नहीं जला रही अलाव

सार्वजनिक स्थानों पर आमजन को ठंड से बचाव के लिए स्वयं करने पड़ रहे उपाए
सिलवानी। शीतलहर और कड़ाके की सर्दी ने अपना असर दिखाना शुरू कर दिया है, लेकिन अब तक नगर परिषद के जन प्रतिनिधियों, अधिकारियों को शायद इसका आभास नहीं हुआ है। इसलिए नगर के सार्वजनिक स्थानों पर नगर परिषद अलाव नहीं जला पाई है यूं कहे कि पूर्व की तरह इस बार भी अलाव के नाम पर नगर परिषद अधिकारी लाखों की लकड़ी चट कर जाने की योजना के तहत इसे जलाना ही नहीं चाह रहे हैं स्थिति यह है कि आमजन स्वयं लकड़ी खरीदकर अलाव जला रहे हैं और स्वयं तथा जानवरों को सर्दी से राहत दे रहे हैं।
कड़ाके की ठंड में रात और सुबह हाड़ कपाने वाली सर्दी पड़ रही है, इसलिए आमजन तो जैसे-तैसे खुद को इस सर्दी से सुरक्षित रखे हुए है, लेकिन नगर की सड़कों पर घूम रहे आवारा मवेशी इस सर्दी से बैचेन है फिर भी नगर परिषद अधिकारी ऐसे दृश्य को देखकर भी अनदेखी कर रहे हैं, तब मजबूरन आमजन को इन जानवरों पर दया खाकर इनके लिए अलाव की व्यवस्था करनी पड़ रही है।
हर दफा रहा यही ढर्रा
नगर परिषद की ओर से आमजन को सर्दी से राहत देने के लिए जिम्मेदारी से अलाव जलाने का दायित्व सौंपा गया है, लेकिन पूर्व से लेकर अब तक इसका निर्वाहन जिम्मेदारी से होता नहीं देखा गया। इस पर नगर परिषद को कई बार फजीहत झेलनी पड़ी, लेकिन बदलाव की स्थिति फिर भी नहीं देखी गई। नगर वासियों का कहना है कि नगर परिषद की ओर से जब कभी खाना पूर्ति के लिए नगर के सार्वजनिक स्थानों पर अलाव जलाए जाते हैं तब तब इसके लिए सिफारिशें लगाई जाए। जिस पर वे एक दो जगह अलाव जलाकर उनकी कई ऐंगल से फोटो खींचकर सोशल मीडिया पर डाल रहे हैं जिससे आमजन को लगे कि अलाव लगाया जा रहा है जबकि हकीकत कोसों दूर हैं। प्रतिदिन बेजुवानों की अकाल मृत्यु ठंड के ठिठुरन से हो रही है।
अलाव के नाम पर भी ठगी
सर्दी से राहत देने के लिए सार्वजनिक स्थलों पर अलाव न जलाकर लकड़ी की खरीद लाखों रूपए की होती रही है, लेकिन फिर भी अलाव नहीं जलाए जाते है, इससे साफ होता है कि अलाव के नाम पर भी नगर परिषद आमजन को ठग रही है और अधिकारी अपनी जेब गर्म करने में व्यस्त हैं। यह स्थिति नगर परिषद के प्रति आमजन का विश्वास तो खो रही है, लेकिन फिर भी नगर परिषद को इससे फर्क पड़ता नहीं दिख रहा है।



