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कब है माघ मास की पहली कालाष्टमी, जानें काल भैरव की पूजा का शुभ मुहूर्त और महत्व

Astologar Gopi Ram : आचार्य श्री गोपी राम (ज्योतिषाचार्य) जिला हिसार हरियाणा मो. 9812224501
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🔮 कब है माघ मास की पहली कालाष्टमी, जानें काल भैरव की पूजा का शुभ मुहूर्त और महत्व
HIGHLIGHTS
◼️ सनातन धर्म में काल भैरव की पूजा का खास महत्व है।
◼️ हर माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को कालाष्टमी मनाई जाती है।
◼️ इसके लिए काल भैरव की पूजा निशिता मुहूर्त में की जाती है.
🧾 प्रत्येक महीने के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को कालाष्टमी मनाई जाती है। इस दिन भगवान भोलेनाथ के भैरव स्वरूप की पूजा का विधान है। भैरव बाबा के तीन रूप हैं- काल भैरव, बटुक भैरव और रूरू भैरव। कालाष्टमी के दिन काल भैरव की उपासना की जाती है। कहते हैं कि कालाष्टमी के दिन काला भैरव बाबा की पूजा करने से जातकों के जीवन से सारी परेशानियां दूर हो जाती हैं और मनचाही मनोकामनाओं की भी पूर्ति होती है। तो आइए जानते हैं आचार्य श्री गोपी राम से माघ मास में किस कालाष्टमी का व्रत रखा जाएगा और पूजा के लिए क्या शुभ मुहूर्त रहेगा।
🤷🏻‍♀️ कालाष्टमी के दिन कुछ कार्यों को भूलकर भी नहीं करने चाहिए।
⚛️ कालाष्टमी व्रत 2024 शुभ मुहूर्त
👉🏽 कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि का आरंभ- 2 फरवरी को शाम 4 बजकर 2 मिनट पर
👉🏽 कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि समाप्त- 3 फरवरी को शाम 5 बजकर 20 मिनट पर
📆 कालाष्टमी व्रत तिथि- 2 फरवरी 2024
➡️ ब्रह्म मुहूर्त- 2 फरवरी को सुबह 05 बजकर 24 मिनट से सुबह 06 बजकर 17 मिनट तक
➡️ अभिजीत मुहूर्त- 2 फरवरी को दोपहर 12 बजकर 13 मिनट से दोपहर 12 बजकर 57 मिनट तक
➡️ निशिता काल पूजा मुहूर्त- 2 फरवरी को देर रात 12 बजकर 8 मिनट से रात के 1 बजकर 1 मिनट तक
⚛️ कालाष्टमी की पूजन विधि
▪️ कालाष्टमी के दिन सबसे पहले स्नान करें.
▪️ इसके बाद पूजा स्थल को साफ करें.
▪️ फिर काल भैरव की मूर्ति या चित्र स्थापित करें.
▪️ घर में गंगाजल छिड़कें और उन्हें फूल अर्पित करें
▪️ अब काल भैरव को धूप, दीप से पूजन कर नारियल, इमरती, पान, मदिरा का भोग लगाएं.
▪️ फिर काल भैरव के समक्ष चौमुखी दीपक जलाएं.
▪️ पूजा के दौरान भैरव चालीसा और मंत्रों का पाठ करें.
▪️ पूजा के अंत में आरती करें और काल भैरव का आशीर्वाद प्राप्त करें.
🤷🏻‍♀️ मासिक कालाष्टमी व्रत का महत्व
कालाष्टमी व्रत कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि के दौरान मनाई जाती है. यह दिन भैरवबाबा की पूजा के लिए समर्पित है. ऐसा कहा जाता है कि इसी दिन भोलेबाबा भैरव रूप में प्रकट हुए थे. कालाष्टमी के दिन व्रत रखकर बाबा काल भैरव की पूजा करने से सभी तरह के भय से मुक्ति मिल जाती है, इस दिन व्रत करने से सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं और शुभ फल की प्राप्ति होती है. बाबा भैरव की पूजा से शत्रुओं से छुटकारा भी मिलता है.
🗣️ कालाष्टमी व्रत कथा
आज हम आपको कालाष्टमी व्रत से जुड़ी कुछ पौराणिक कथा बताने जा रहे हैं, जो प्राचीन काल से ही विख्यात है तो बिना किसी देर के शुरू करते हैं। प्राचीन ग्रंथ शिव महापुराण के अनुसार एक बार भगवान विष्णु जी ने ब्रह्मा जी से पूछा कि इस ब्रह्मांड का सर्वश्रेष्ठ रचनाकार कौन है, तब भगवान विष्णु की इस बात को सुनकर ब्रह्मा जी बोले कि इस ब्रह्मांड में “में” स्वयं ही सर्वश्रेष्ठ हूं। ब्रह्मा जी के इस कथन को सुनकर विष्णु भगवान को उनके शब्दों में बहुत ही अहंकार दिखाई दिया और इसके बाद वह क्रोधित हो गए। इसके बाद भगवान विष्णु ने ब्रह्मा जी से कहा कि इस संसार की रचना आपने मेरी आज्ञा के अनुसार ही की है और फिर दोनों मिलकर चारों वेदों के पास गए। सबसे पहले भी ऋग्वेद के पास पहुंचे और अपने सवाल का जवाब ढूंढने लगे ऋग्वेद के समक्ष उन्होंने अपना प्रश्न रखा कि इस ब्रह्मांड में सर्वश्रेष्ठ कौन है। ऋग्वेद ने जवाब दिया कि शिव ही सर्वश्रेष्ठ हैं और वह सर्वशक्तिमान है सभी जीव जंतु उनमें समाहित हैं। इसके बाद जब यही सवाल यजुर्वेद से पूछा गया की यज्ञों के द्वारा जिसे हम पूजते हैं वह भी सबसे श्रेष्ठ है और वो भगवान शिव के अलावा कोई और सर्वश्रेष्ठ हो ही नहीं सकता और सामवेद ने भी इसी प्रश्न का यही उत्तर दिया, की विभिन्न साधक और योगी जिसकी उपासना करते हैं वहीं सर्वश्रेष्ठ है और जो पूरे विश्व को नियंत्रित करता है वहीं सर्वश्रेष्ठ है और वह भगवान शिव ही हैं। इसके बाद अर्थवेद के अनुसार भी इस प्रश्न का यही उत्तर दिया गया कि शिव ही सर्वश्रेष्ठ है। चारों वेदों की बात सुनकर ब्रह्मा जी का अहंकार नहीं मिटा और वह उनके जवाबों पर जोर-जोर से हंसने लगे। इतने में वहां दिव्य प्रकाश के रूप में महादेव प्रकट हुए भगवान शंकर को देखकर ब्रह्मा जी का पांचवा मुख उन पर मन ही मन जलने लगा। योजना के इतना सब होने के बाद भगवान शिव ने अपना एक रूप प्रकट किया जिस काल भैरवनाथ के नाम से जाना जाने लगा। भगवान शिव ने बताया कि यह मृत्यु काल के राजा है जो कोई और नहीं भैरवनाथ ही थे। भैरव जी ने क्रोध में आकर ब्रह्मा जी का पांचवा सिर धड़ से अलग कर दिया ऐसा करने के बाद भैरव जी को ब्रह्म हत्या का पाप लगा। तब भगवान शंकर ने भैरव जी से बोला कि तुम्हें ब्रह्म हत्या का दोष लग चुका है, इसलिए अब तुम्हें एक सामान्य व्यक्ति की तरह तीनों लोकों पर भ्रमण करना होगा। जिस स्थान पर तुम्हारे हाथ से यह शीश छूट जाएगा, वही पर तुम इस पाप से मुक्त हो जाओगे। भगवान शिव से आज्ञा पाकर काल भैरव जी तीनों लोकों की यात्रा पर चल दिए और उनके हाथ में ब्रह्मा जी का पांचवा मुख भी था। यात्रा करने के बाद भगवान भैरव जी काशी पहुंचे और काशी तो भगवान शिव की ही नगरी ही मानी जाती है, जहां पर वह बाबा विश्वनाथ के रूप में पूजे जाते हैं। काशी में गंगा के तट पर पहुंचे ही भैरव बाबा के हाथ से ब्रह्मा जी का शीश छूट गया और भैरव बाबा को ब्रह्म हत्या के पाप से मुक्ति मिल गई काल भैरव जी को पाप से मुक्त होते ही, उनके समक्ष भगवान शंकर प्रकट हो गए भगवान शिव ने काल भैरव को आशीर्वाद दिया और उन्हें वही तप करने का आदेश दिया और उन्होंने यह आशीर्वाद भी दिया कि तुम अब से इस नगर के कोतवाल भी कहलाओगे और इसी रूप में यहां युगों युगों तक पूजे जाओगे।

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