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पारसनाथ भगवान की मूर्ति के मूल स्वरुप मे परिवर्तन किए जाने से जैन समाज आक्रोशित

कलेक्टर के नाम तहसीलदार को दिया ज्ञापन
सिलवानी । मालेगांव प्रशासन के द्वारा पारसनाथ भगवान की मूर्ति के मूल स्वरुप में छेड़छाड़ किए जाने से जैन समाज खासी आक्रोशित है। अखण्ड दिगंबर जैन समाज सिलवानी के द्वारा सोमवार को बड़ी संख्या में एकत्रित हुए जैन समाज ने कलेक्टर के नाम तहसीलदार को ज्ञापन साैंप कर मालेगांव प्रशासन के इस कृत्य की निंदा की है। तथा मूर्ति के मूल स्वरुप के साथ छेड़छाड़ ना करने का आग्रह किया है।
ज्ञापन में उल्लेख किया गया है कि महाराष्ट्र के तहसील मालेगांव जिला वासिम स्थित श्री आंतरिक्ष पारसनाथ भगवान शिरपुर की मूर्ति की लेप प्रक्रिया करने के संदर्भ में उच्चतम न्यायालय का आदेश 5 अप्र्रैल 23 जिला प्रशासन की निगरानी में लेप करने का था। लेकिन लेप के दौरान मूर्ति के मूल स्वरुप में छेड़छाड़ की गई है। जिसमें श्वेतांबर ट्रस्टी एवं लेपन
कारीगर के तरफ से श्री आंतरिक्ष पारसनाथ भगवान की मूर्ति के पेट पर मोटा सा बलै बनाया गया है। मूर्ति की सप्तफणी (नागमणि) के ऊपर एक एक मोटी मणि बनाई गई है। मूर्ति के कान के पीछे का भाग बढ़ाया गया है। मूर्ति की आखों में बदलाव किया गया है। मूर्ति के चरणो के नीचे तीन रेखाएं बना कर मूल स्वरुप में बदलाव किया गया है।
ज्ञापन में यह भी उल्लेख किया गया है कि मूर्ति में यह बदलाव प्रशासन की देखरेख में किया गया र्है । ज्ञापन में यह भी कहा गया है कि श्वेतांबर ट्रस्टीयों व लेप का कार्य करने वाले कारीगरों की तरफ से मूर्ति की लेपन प्रक्रिया में मूर्ति के मूल स्वरुप में जो परिवर्तन किया गया है। उसे शीध्र हटा कर मूल स्वरुप में लाया जावे। अन्यथा जैन समाज इसके विरुद्व तीव्र आंदोलन प्रारंभ करने को मजबूर होगी । तथा न्यायालय के आदेश की अवहेलना के लिए प्रशासन के खिलाफ अवमानना का प्रकरण न्यायालय में चलाने को मजबूर होगा। ज्ञापन की प्रति राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री तथा मुख्यमंत्री राज्य मंत्रालय मुम्बई को भी प्रेषित की गई हैं।

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