धार्मिक

गौ माता की सेवा से श्री कृष्ण का नाम गोपाल पड़ा : शास्त्री

ब्यूरो चीफ : शब्बीर अहमद

बेगमगंज । अयोध्या नगर में चल रही श्रीमद् भागवत महापुराण कथा के दूसरे दिन कथावाचक पं.कमलेश कृष्ण शास्त्री ने उपस्थित लोगों को कथा का रसपान कराते हुए बताया की भगवान कृष्ण का गौ-पालन और गौ-भक्ति तो प्रसिद्ध ही है, जिससे उनका नाम ही गोपाल पड़ गया। वे स्वयं गायों को चराते थे, उनकी सब प्रकार से सेवा-सुश्रा करते थे, जो गायों को कष्ट पहुँचाता था उसे दण्ड देते थे। गायों की रक्षा के लिए ही उन्होंने गोवर्धन धारण किया और इन्द्र का मान मिटा दिया। भागवत में बतलाया है कि जब गोपियों के साथ रास करते हुए वे अत्यन्त शान्त हो गए तो अपने बांए अंग से उन्होंने गौ उत्पन्न की, जिससे दूध का एक कुण्ड बन गया और सब किसी ने उसी दूध को पीकर अपनी कान्ति और आभा को प्राप्त किया। योगेश्वर भगवान श्रीकृष्ण जी के सम्बन्ध में ऐसी कथाएँ भरी पड़ी हैं। यह कहने में कोई अतिश्योक्ति नहीं कि भगवान श्रीकृष्ण को गौ-पालन से ही अपूर्व शक्ति प्राप्त हुई थी, जिसके प्रभाव से उन्होंने संसार का उद्धार करने वाली गीता का ज्ञान प्रकट किया। आज वह गौ माता यहां वहां भटक रही है सबका पालन करने वाली स्वयं तरस रही है। सनातन धर्म में ऐसी मान्यता है कि गुरु, गीता, गंगा, गायत्री एवं गो-सेवा से निश्चित ही मुक्ति मिलती है। ऐसा शास्त्रों में भी कहा गया है। आज भी यदि श्रद्धा, भक्ति और विश्वास के साथ गीता पाठ, गायत्री जाप, गंगा स्नान, गुरु और गौ सेवा की जाए तो निश्चय ही मुक्ति मिलेगी। किन्तु यह सब शुद्ध, सदाचारी एवं निःस्वार्थ भाव से होना चाहिए। कलयुग में गौ-सेवा सबसे बड़ा पुनीत कार्य है। गाय सर्वथा पूज्य है। गाय का पञ्चगव्य महा-औषधि है। जिसका करुण स्वर धर्म रक्षण संवर्द्धन हेतु ईश अवतरण को बाध्य करता है, उस गौवंश की रक्षा हेतु आगे आएँ ..! गाय की रक्षा मानवता की रक्षा है, इस स्वीकृति के साथ गौ वंश की धार्मिक, आध्यात्मिक, सांस्कृतिक और वैज्ञानिक महत्ता को अनुभूत करते हुए गौ माता के रक्षण, पालन एवं संवर्धन के साथ-साथ प्रकृति संरक्षण का संकल्प लें। गौ सेवा गोविन्द सेवा है।
कथा श्रवण करने महिला पुरुष सभी पहुंच रहे हैं कथा के प्रारंभ में साहू परिवार द्वारा व्यासपीठ की आरती उतारी गई।

Related Articles

Back to top button