आज का पंचाग सोमवार 31 अक्टूबर 2022
आचार्य श्री गोपी राम (ज्योतिषाचार्य) जिला हिसार हरियाणा मो. 9812224501
✦••• जय श्री हरि •••✦
🧾 आज का पंचाग 🧾
सोमवार 31 अक्टूबर 2022
महा मृत्युंजय मंत्र – ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्। उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय माऽमृतात्।।
🌚 31 अक्टूबर 2022 दिन सोमवार को कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष का सप्तम दिवस है। आज सूर्यषष्ठी (छठ) व्रत का सातवाँ और अंतिम दिन है। आज छठ व्रत का सातवाँ दिन अर्थात प्रातःकालीन भगवान सूर्य को सूर्यार्घ्य अर्थात अर्घ्यदान (सायं 06:27) का समय है। सभी छठ व्रती सूर्योदय के सूर्यार्घ्य के उपरान्त 07 बजे के बाद पारण कर सकते हैं। आप सभी सनातनियों को छठ व्रत की हार्दिक शुभकामनायें।।
☄️ दिन (वार) – सोमवार के दिन क्षौरकर्म अर्थात बाल, दाढ़ी काटने या कटाने से पुत्र का अनिष्ट होता है शिवभक्ति को भी हानि पहुँचती है अत: सोमवार को ना तो बाल और ना ही दाढ़ी कटवाएं ।
सोमवार के दिन भगवान शंकर की आराधना, अभिषेक करने से चन्द्रमा मजबूत होता है, काल सर्प दोष दूर होता है।
सोमवार का व्रत रखने से मनचाहा जीवन साथी मिलता है, वैवाहिक जीवन में लम्बा और सुखमय होता है।
जीवन में शुभ फलो की प्राप्ति के लिए हर सोमवार को शिवलिंग पर पंचामृत या मीठा कच्चा दूध एवं काले तिल चढ़ाएं, इससे भगवान महादेव की कृपा बनी रहती है परिवार से रोग दूर रहते है ।
🔮 शुभ विक्रम संवत्-2079, शक संवत्-1944, हिजरी सन्-1443, ईस्वी सन्-2022
🌐 संवत्सर नाम-राक्षस
✡️ शक संवत 1944 (शुभकृत् संवत्सर)
☸️ काली सम्वत 5123
☣️ सायन – दक्षिणायन
🌦️ ऋतु – सौर शरद ऋतु
🌤️ मास – कार्तिक माह
🌗 पक्ष – शुक्ल पक्ष
📆 तिथिः- पंचमी तिथि 08:14:00 बजे तक तथा षष्ठी 04:53:00 तिथि
✏️ तिथि स्वामीः- पंचमी तिथि के स्वामी नागदेवता हैं तथा षष्ठी तिथि के स्वामी कार्तिकेय जी हैं।
💫 नक्षत्रः-पूर्वा आषाढ़ा नक्षत्र 25:36:22 बजे तक।
🪐 नक्षत्र स्वामीः- पूर्वा आषाढ़ा नक्षत्र के स्वामी शुक्र देव जी हैं ।
🔔 योगः- सुकर्म 19:15:09 बजे तक तदोपरान्त धृति
⚡ प्रथम करण : गर – 02:18 पी एम तक
✨ द्वितीय करण :- वणिज – 01:11 ए एम, नवम्बर 01 तक विष्टि
🔥 गुलिक कालः- शुभ गुलिक काल 02:51:00P.M से 04:14:00 P.M बजे तक
⚜️ दिशाशूलः- रविवार को पश्चिम दिशा की यात्रा नहीं करना चाहिए यदि यात्रा करना आवश्यक हो तो घर से पान या घी खाकर निकलें।
🤖 राहुकालः- आज का राहु काल 04:14:00 से 05:37:00 बजे तक राहू काल में शुभ कार्य करना वर्जित माना जाता है।
🌞 सूर्योदयः- प्रातः 06:26:00
🌅 सूर्यास्तः- सायं 05:24:00
👸🏻 ब्रह्म मुहूर्त : 04:49 ए एम से 05:40 ए एम
🌇 प्रातः सन्ध्या : 05:15 ए एम से 06:32 ए एम
🌟 अभिजित मुहूर्त : 11:42 ए एम से 12:27 पी एम
🔯 विजय मुहूर्त : 01:55 पी एम से 02:40 पी एम
🐃 गोधूलि मुहूर्त : 05:26 पी एम से 05:50 पी एम
🏙️ सायाह्न सन्ध्या : 05:37 पी एम से 06:54 पी एम
💧 अमृत काल : 10:16 पी एम से 11:46 पी एम
🗣️ निशिता मुहूर्त : 11:39 पी एम से 12:31 ए एम, नवम्बर 01
⭐ सर्वार्थसिद्धि योग – आज का पूरा दिन पार कर के अगली भोर 4 बजकर 15 मिनट तक
☄️ धृति योग – आज शाम 4 बजकर 13 मिनट तक
🌊 पाताल लोक की भद्रा – आज देर रात 1 बजकर 11 मिनट तक
🚓 यात्रा शकुन- मीठा दूध पीकर यात्रा करें।
👉🏼 आज का मंत्र-ॐ सौं सोमाय नम:।
🤷🏻♀️ आज का उपाय-मंदिर में मखाने की खीर अर्पण करें।
🪵 वनस्पति तंत्र उपाय- पलाश के वृक्ष में जल चढ़ाएं।
⚛️ पर्व एवं त्यौहार – इन्दिरा गांधी शहिद दिवस, राष्ट्रीय एकता दिवस, सरदार वल्लभ भाई पटेल जयंती, बेल्जियम में टेलीविजन प्रसारण दिवस, सप्तमी 25 : 13 तक तत्पश्चात अष्टमी शुरू, सूर्य षष्ठी व्रत का पारण, भानु सप्तमी
✍🏽 विशेष – सप्तमी तिथि को आँवला त्याज्य बताया गया है। सप्तमी तिथि मित्रप्रद तिथि मानी जाती है। इतना ही नहीं यह सप्तमी तिथि एक शुभ तिथि भी मानी जाती है। इस सप्तमी तिथि के स्वामी भगवान सूर्य देवता हैं। यह सप्तमी तिथि भद्रा नाम से विख्यात मानी जाती है। यह सप्तमी तिथि कृष्ण पक्ष में मध्यम फलदायीनी मानी जाती है। इस सप्तमी तिथि को सुबह सर्वप्रथम स्नान करके भगवान सूर्य को सूर्यार्घ देकर उनका पूजन करना चाहिये। उसके बाद आदित्यह्रदयस्तोत्रम् का पाठ करना चाहिये। इससे जीवन में सुख, समृद्धि, हर्ष, उल्लास एवं पारिवारिक सुखों कि सतत वृद्धि होती है। सप्तमी तिथि में भगवान सूर्य की पुजा करने से सभी मनोकामनाओं की पूर्ति होती है।
🌷 Vastu Tips 🌸
अगर आप भी अपने घर में बजरंगबली की तस्वीर लगाना चाह रहें हैं, तो कोई परेशानी की बात नहीं है क्योंकि संकटमोचन की तस्वीर लगाने से आप संकटों से तो बचे ही रहेंगे। लेकिन फिर भी हनुमान जी की तस्वीर लगाने से पहले आपको कुछ नियम और वास्तु शास्त्र की बातों का पालन जरूर करना चाहिए। जिससे की आपके द्वारा स्थापित भगवान की प्रतिमूर्ति या कहें तस्वीर के लिए सही स्थान कौन सा रहेगा
एकात्म चिंतन पर्वत उठाते हुए हनुमान जी की तस्वीर वास्तु शास्त्र के अनुसार पर्वत उठाते हुए हनुमान जी की तस्वीर को उस व्यक्ति को लगाना चाहिए जिसे अपने अंदर आत्मविश्वास की कमी महसूस होती है. हनुमान जी की इस तस्वीर को लगाने के बाद आपका कॉन्फिडेंस अपने आप बढ़ने लगेगा।
सफ़ेद हनुमान जी की तस्वीर कार्यक्षेत्र में सफलता के लिए और जॉब में प्रमोशन के लिए आपको यह तस्वीर लगानी चाहिए। पंचमुखी हमुमान जी पांच मुखों वाले हनुमान की तस्वीर को काफी ज्यादा शुभ माना जाता है, इससे घर की सभी बाधाएं और दोष दूर होते हैं। यह आपको बुरी नज़रों से बचाये रखती है।
⏹️ जीवनोपयोगी कुंजियां ⚜️
जोड़े कुत्ते-बिल्लियों की तरह लड़ते-झगड़ते हैं
कुछ जोड़े कुत्ते-बिल्लियों की तरह लड़ते-झगड़ते रहते हैं, जिनके कारण उनका वैवाहिक जीवन एकदम खराब हो जाता है। इसे दूर करने के लिए आप सूर्योदय से पहले स्नान आदि के बाद किसी मंदिर में जाकर शिवलिंग पर जल चढ़ाएं और इस मंत्र का जाप करें।
ओम् नम: संभवाय च मयो भवाय च नम:
शंकराय च मयस्कराय च नम: शिवाय च शिवतराय च।।
पति-पत्नी के मतभेद को दूर करने के लिए कुछ लोग मंत्र जाप का भी सहारा लेते हैं। कहते हैं यदि यह जप विधि-विधान से किया जाए तो पति-पत्नी के बीच कभी अनबन नहीं होती साथ ही प्रेम भी बढ़ता है।
अक्ष्यौ नौ मधुसंकाशे अनीकं नौ समंजनम्।
अंत: कृणुष्व मां ह्रदि मन इन्नौ सहासति।।
☕ आरोग्य संजीवनी 🍶
मुरली एवं देवदाली का काढ़ा
यह गुरुदेव द्वारा शोधित औषधि है। इसमें से एक को 10 % कालीमिर्च के साथ 20 ग्राम चूर्ण को 160 ग्राम पानी में उबालें। जब 40 ग्राम जल रह जाये, तो छान कर फ्रीज़ में डाल दें। यह दिनरात में चार-बार भोजन से एक घंटा पहले लें।
(यह दवा बहुत कड़वी है। 108 दिन में मधुमेह, प्रमेह एवं लीवर के रोग नष्ट हो जाते है।)
📖 गुरु भक्ति योग 🕯️
बद्रीनाथ धाम चार धामों में से एक धाम यहां भगवान विष्णु बद्रीनारायण के रूप में विराजमान हैं। भगवान विष्णु से जुड़े इस स्थान को पृथ्वी का बैकुंठ कहा जाता है. अगर आप कभी भी बद्रीनाथ धाम गए होंगे तो आपने नोटिस किया होगा की वहां पूजा और आरती के दौरान शंख की ध्वनि सुनाई नहीं देती है, क्योंकि वहां शंख बजाया ही नहीं जाता है. बद्रीनाथ में शंख क्यों नहीं बजाया जाता है? इसके पौराणिक और वैज्ञानिक दोनों ही कारण को आपको बताएंगे।
बद्रीनाथ में शंख क्यों नहीं बजाया जाता है? पौराणिक कारण बद्रीनाथ में शंख न बजाने के पीछे यहां से जुड़ी एक पौराणिक कथा है, शास्त्रों के अनुसार माता लक्ष्मी, बद्रीनाथ धाम में ध्यान कर रहीं थीं, उसी दौरान भगवान विष्णु का एक राक्षस जिसका नाम शंखचूर्ण था उससे युद्ध होने लगा, और युद्ध में भगवान ने राक्षस का वध कर दिया। युद्ध में विजय होने के बाद शंखनाद करके विजय की घोषणा की जाती है, लेकिन भगवान विष्णु माता लक्ष्मी का ध्यान भंग नहीं करना चाहते थे। इसलिए उन्होंने शंख नहीं बजाया।
इसी से जुड़ी एक और कथा सुनाई जाती है एक सिद्ध ऋषि इस स्थान पर राक्षसों का वध कर रहे थे ऋषि के डर अतापी और वतापी नाम के राक्षस छिप गए. अतापी अपनी जान बचाने के लिए मन्दाकिनी नदी में छिप गया तो वहीं वतापी शंख में छिप गया था। इसके विषय में कहा जाता है की अगर कोई उस समय शंख बजाता तो वह राक्षस शंख से निकलकर भाग जाता।
बद्रीनाथ में शंख क्यों नहीं बजाया जाता है? वैज्ञानिक कारण : बद्रीनाथ धाम में वर्ष भर ठण्ड पड़ती है, यह क्षेत्र बर्फ से लदा रहता है. शंख को जब बजाया जाता है उससे निकली ध्वनि ठन्डे और बर्फीले पहाड़ों से टकराकर प्रतिध्वनि उत्पन्न कर सकती है. जिससे की हिमस्खलन की भी नौबत बन सकती है। हो सकता है इस कारण से भी वहां शंख नहीं बजाया जाता हो।
●●●●●★᭄ॐ नमः श्री हरि नम: ★᭄●●●●●
⚜️ सोमवार और शुक्रवार कि सप्तमी विशेष रूप से शुभ फलदायी नहीं मानी जाती बाकी दिनों कि सप्तमी सभी कार्यों के लिये शुभ फलदायी मानी जाती है। सप्तमी को भूलकर भी नीला वस्त्र धारण नहीं करना चाहिये तथा ताम्बे के पात्र में भोजन भी नहीं करना चाहिये। सप्तमी को फलाहार अथवा मीठा भोजन विशेष रूप से नमक के परित्याग करने से भगवान सूर्यदेव कि कृपा सदैव बनी रहती है।
जिस व्यक्ति का जन्म सप्तमी तिथि में होता है, वह व्यक्ति बहुत ही भाग्यशाली होता है। इस तिथि में जन्म लेनेवाला जातक गुणवान और प्रतिभाशाली होता है। ये अपने मोहक व्यक्तित्व से लोगों को अपनी ओर आकर्षित करने की योग्यता रखते हैं। इनके बच्चे भी गुणवान और योग्य होते हैं। धन धान्य के मामले में भी यह व्यक्ति काफी भाग्यशाली होते हैं। ये संतोषी स्वभाव के होते हैं और इन्हें जितना मिलता है उतने से ही संतुष्ट रहते हैं।


