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Today Panchang आज का पंचांग सोमवार, 04 मई 2026

आचार्य श्री गोपी राम (ज्योतिषाचार्य) जिला हिसार हरियाणा मो. 9812224501

✦••• जय श्री हरि •••✦

🧾 आज का पंचाग 🧾

सोमवार 04 मई 2026

महा मृत्युंजय मंत्र – ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्‌। उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय माऽमृतात्।।☄️ दिन (वार) – सोमवार के दिन क्षौरकर्म अर्थात बाल, दाढ़ी काटने या कटाने से पुत्र का अनिष्ट होता है शिवभक्ति को भी हानि पहुँचती है अत: सोमवार को ना तो बाल और ना ही दाढ़ी कटवाएं ।*सोमवार के दिन भगवान शंकर की आराधना, अभिषेक करने से चन्द्रमा मजबूत होता है, काल सर्प दोष दूर होता है। *सोमवार का व्रत रखने से मनचाहा जीवन साथी मिलता है, वैवाहिक जीवन में लम्बा और सुखमय होता है।जीवन में शुभ फलो की प्राप्ति के लिए हर सोमवार को शिवलिंग पर पंचामृत या मीठा कच्चा दूध एवं काले तिल चढ़ाएं, इससे भगवान महादेव की कृपा बनी रहती है परिवार से रोग दूर रहते है।सोमवार के दिन शिव पुराण के अचूक मन्त्र “श्री शिवाये नमस्तुभ्यम’ का अधिक से अधिक जाप करने से समस्त कष्ट दूर होते है. निश्चित ही मनवाँछित लाभ मिलता है।🔮 शुभ हिन्दू नववर्ष 2026 विक्रम संवत : 2083 सिद्धार्थी विक्रम : 1969 शर्वरी🌐 रौद्र संवत्सर विक्रम संवत 2083,✡️ शक संवत 1948 (पराभव संवत्सर), चैत्र☮️ गुजराती सम्वत : 2082 पिङ्गल☸️ काली सम्वत् 5127🕉️ संवत्सर (बृहस्पति) पराभव☣️ आयन – उत्तरायण☂️ ऋतु – सौर ग्रीष्म ऋतु☀️ मास – ज्यैष्ठ मास🌔 पक्ष – कृष्ण पक्ष📆 तिथि – सोमवार ज्येष्ठ माह के कृष्ण पक्ष तृतीया तिथि 05:24 AM तक उपरांत चतुर्थी✏️ तिथि स्वामी – तृतीया तिथि की स्वामी माँ गौरी और कुबेर जी है ।तृतीया: किसी भी पक्ष की तीसरी तारीख को तृतीया तिथि या तीज कहते है।💫 नक्षत्र- नक्षत्र अनुराधा 09:57 AM तक उपरांत ज्येष्ठा🪐 नक्षत्र स्वामी – अनुराधा नक्षत्र का स्वामी शनि है, जो राशि स्वामी मंगल का शत्रु है। इस नक्षत्र के देवता मित्र (बारह आदित्यों में से एक) हैं।⚜️ योग – परिघ योग 11:19 PM तक, उसके बाद शिव योग⚡ प्रथम करण – वणिज 04:12 PM तक✨ द्वितीय करण – विष्टि 05:24 AM तक, बाद बव🔥 सोमवार का शुभ गुलिक कालः-शुभ गुलिक काल 01:42:00 P.M से 02:59:00 P.M बजे तक⚜️ दिशाशूलः- आज के दिन पूर्व दिशा की यात्रा नहीं करना चाहिए यदि यात्रा करना ज्यादा आवश्यक हो तो घर से दर्पण देखकर या दूध पीकर जायें।🤖 राहुकालः- आज का राहु काल 08:26:00 A.M से 09:39:00 A.M बजे तक🌞 सूर्योदयः – प्रातः 05:31:00🌅 सूर्यास्तः – सायं 06:35:00👸🏻 ब्रह्म मुहूर्त : प्रातः 04:13 ए एम से 04:55 ए एम🌇 प्रातः सन्ध्या : प्रातः 04:34 ए एम से 05:38 ए एम🌟 अभिजित मुहूर्त : दोपहर 11:51 ए एम से 12:45 पी एम✡️ विजय मुहूर्त : दोपहर 02:31 पी एम से 03:25 पी एम🐃 गोधूलि मुहूर्त : शाम 06:57 पी एम से 07:18 पी एम🌌 सायाह्न सन्ध्या : शाम 06:58 पी एम से 08:02 पी एम💧 अमृत काल : प्रातः 03:02 ए एम, मई 05 से 04:49 ए एम, मई 05🗣️ निशिता मुहूर्त : रात्रि 11:56 पी एम से 12:39 ए एम, मई 05⭐ सर्वार्थ सिद्धि योग : प्रातः 05:38 ए एम से 09:58 ए एम🚓 यात्रा शकुन-मीठा दूध पीकर यात्रा करें।👉🏼 आज का मंत्र-ॐ सौं सौमाय नम:।🤷🏻‍♀️ आज का उपाय-शिवजी का दुग्धाभिषेक करें।🪵 वनस्पति तंत्र उपाय-पलाश के वृक्ष में जल चढ़ाएं।⚛️ *पर्व एवं त्यौहार – अग्नि नक्षत्रम् प्रारम्भ/ भद्रा/ विंछुड़ो/ गण्ड मूल/ सर्वार्थ सिद्धि योग/ आडल योग/ विडाल योग/ मैसूर शासक टीपू सुल्तान शहादत दिवस, महिला न्यायाधीश अन्ना चांडी जन्म दिवस, स्टार वार्स दिवस, कर्नाटक के प्रथम मुख्यमंत्री के. सी. रेड्डी जन्म दिवस, भारतीय राजनीतिज्ञ नित्यानंद कानूनगो जन्म दिवस, भारतीय इतिहासकार हेमचंद्र रायचौधरी स्मृति दिवस, बिहार के स्वतंत्रता सेनानी रामदेनी सिंह पुण्य तिथि, विख्यात तबला वादक पंडित किशन महाराज स्मृति दिवस, महान मध्ययुगीन महात्मा बसवेश्वर जयन्ती, विश्व अस्थमा दिवस, विश्व कोयला श्रमिक दिवस, अंतर्राष्ट्रीय अग्निशामक दिवस (International Firefighters’ Day) ✍🏼 *तिथि विशेष – तृतीया तिथि में नमक का दान तथा भक्षण दोनों ही त्याज्य बताया गया है। तृतीया तिथि एक सबला अर्थात बल प्रदान करने वाली तिथि मानी जाती है। इतना ही नहीं यह तृतीया तिथि आरोग्यकारी रोग निवारण करने वाली तिथि भी मानी जाती है। इस तृतीया तिथि की स्वामिनी माता गौरी और इसके देवता कुबेर देवता हैं। यह तृतीया तिथि जया नाम से विख्यात मानी जाती है। यह तृतीया तिथि शुक्ल पक्ष में अशुभ फलदायिनी मानी जाती है।🏘️ Vastu tips 🏚️● पूजा घर का दरवाजा गेट दो पल्ले वाला होना चाहिए सरकने वाला या खिसकाने वाला उचित नही रहता है ।● *पूजा घर को रसोई या बैडरूम मे नही रखना चाहिए यदि जगह कम हो तो अलग व्यवस्था के रूप मे छोटा गेट या परदा से ढककर छोटे मंदिर का उपयोग करना चाहिए। ● *सम्मलित दीवार के रूप मे शौचालय से जुड़ा हुआ मंदिर नही रखना चाहिए नकारात्मक प्रभाव उत्पन्न होता है ।● *पूजा घर मे ताँबे के बर्तनो का पूजा मे जल आदि के लिए उपयोग करना श्रेष्ठ माना गया है । ● *पूजा स्थल के स्लेव मे ऊपर या नीचे अनुपयोगी सामान नही रखना चाहिए नकारात्मक प्रभाव प्रदान करता है का ध्यान रखना चाहिए।● *पूजाघर मे रंग सफेद, क्रीम कलर, गुलाबी रंग उत्तम रहता है पूजा करते समय आपका मुख पूर्व या उत्तर की ओर रहे तो श्रेष्ठ रहता है 🗝️ *जीवनोपयोगी कुंजियां* ⚜️ चिड़चिढ़ापन दूर करने के लिए….अगर किसी इंसान का मानसिक संतुलन बिगड़ गया हो, चिड़चिड़ापन सता रहा हो, तो पिसित व्यक्ति के ऊपर से 27 राई, हींग एवं 7 मिर्ची उसार कर जलायेन और उसे देखते रहें। इससे बात बात पर गुस्सा आना, क्रोध करना व उसका चिड़चिड़ापन दूर हो जाएगा। बच्चों का पढ़ने में मन न लगे तो….*बच्चों के हाथ से राई के दाने दोनों मुट्ठी भरकर, बाजार का नमकीन, भूंजे चने दोनों मुट्ठी भरकर लेकर सभी को एक काले रंग के कपड़े में बाँधकर बच्चे की नज़र दोष दूर करने की प्रार्थना करते हुए ऊपर सात बार घुमाकर किसी पेड़ के नीचे छोड़ आएं। यह प्रयोग 9 दिन तक नियमित करें, तो पढ़ाई में मन लगने लगता है। *चुटकी भर राई, बढ़ा देगी कमाई…*व्यापार वृद्धि के लिए करें यह अदभुत उपाय…अगर उद्योग-व्यापार या दुकान में लगातार हानि हो रही हो, तो 9 गुरुवार सवा किलो चने सवा किलो गेहूं तथा स्व किलो गुड़ तीनों मिलाकर कारोबार स्थल पर से 8 बार उसारकर नन्दी या बैल को खिलाएं। फिर गंगाजल में थोड़ी सी केसर, हल्दी मिलाकर व्यापार स्थान में छिड़के। *अंत में एक सफेद वस्त्र में करीब 10 ग्राम खड़ा धनिया, राई 5 ग्राम, हल्दी खड़ी 2 नग मुख्य द्वार पर टाँग दें। यह उपाय 9 गुरुवार नियमित करें।🥔 आरोग्य संजीवनी 🍶इस में कफशामक और कफनिःसारक गुण होने के कारण इसका मुख्य उपयोग खांसी, अस्थमा, गले में खराश, ब्रोंकाइटिस जैसे श्वसन मार्ग के व्याधियों में होता है।मुलेठी का काढ़ा पीना या इस के जड़ के छोटे टुकड़े मुँह में रखकर चूसना फायदेमंद होता है।*अम्लपित्त या एसिडिटी में यह अपने पित्त शामक गुण के कारण उपयोगी है। वरण रोपक होने के कारण यह अल्सर के व्रणों को भरने में मदत करती है। *शीत और एंटी माइक्रोबियल होने से यह मूत्रमार्ग के संक्रमणों में लाभदायक है। पेशाब में होनेवाली जलन को दूर करती है।*इस के कार्यकारी तत्व ग्लाइसीर्रिज़िन में यकृत रक्षक गतिविधि होती है। इस कारण मुलेठी हेपेटाइटिस जैसे यकृत या लिवर की बीमारियों में उपयोगी है। *इस में एंटी इंफ्लेमेटरी और नर्व प्रोटेक्टिव क्रियाये होने के कारण यह याददाश्त और एकाग्रता बढ़ाती है और नर्वस सिस्टम के Alzheimer’s disease जैसे बीमारियों में फायदेमंद हो सकती है।*त्वचा विकारों में भी मुलेठी काफी असरदार है। डर्मेटाइटिस, एक्जिमा, प्रुरिटस और अल्सर जैसे त्वचा विकारों में यह एंटी इंफ्लेमेटरी, एन्टीऑक्सिडन्ट होने के कारण फायदा पहुंचाती है।मुलेठी में स्थित Glabridin नामक प्रभावी रंगद्रव्य सबसे सुरक्षित पिगमेंट-लाइटनिंग एजेंट है जो त्वचा के डेग धब्बों को दूर कर वर्ण निखारने में मदत करता है।यह अल्ट्रा वायलेट किरणों से त्वचा की रक्षा कर उसे नमी और लचीलापन बनाये रखने में मदत करती है। *मुलेठी चूर्ण को दूध के साथ मिलाकर पीने से यह स्तन्य वर्धक होता है।*मुलेठी के नामक तत्व में बहुत अच्छी एंटीमैरलियल एक्टिविटी देखी गयी है। 📖 *गुरु भक्ति योग* 🕯️ 32 पूर्णिमा व्रत का महात्म्य :माता यशोदा ने कृष्ण से पूछा कि आज मुझे कोई ऐसा व्रत बताओ, जिससे मृत्युलोक में स्त्रियों को विधवा होने का भय न रहे और जो सभी की मनोकामनाएं पूर्ण करने वाला हो। कृष्ण बोले कि सौभाग्य की प्राप्ति के लिए स्त्रियों को द्वात्रिंशत् अर्थात बत्तीस पूर्णिमाओं का व्रत करना चाहिए। इस व्रत से स्त्रियों को सौभाग्य और संपत्ति प्राप्त होती है। यह व्रत अचल सौभाग्य देने वाला और भगवान शिव के प्रति भक्ति बढ़ाने वाला है।*यशोदा जी ने पूछा कि सर्वप्रथम मृत्युलोक में यह व्रत किसने किया था? मुझे विस्तारपूर्वक बताओ।*कृष्ण बोले, राजा चंद्रहास द्वारा पालित, अनेक रत्नों से परिपूर्ण कांतिका नाम की एक नगरी थी। वहां धनेश्वर नाम का एक ब्राह्मण अत्यंत सुशील और रूपवती पत्नी के साथ प्रेमपूर्वक रहता था। उनके घर में धन-धान्य की कोई कमी नहीं थी, उन्हें सिर्फ नि:संतान होने का दुख था। *एक दिन उस नगरी में एक महान तपस्वी आए। वह योगी सभी घरों से भिक्षा लेते थे, परंतु उस ब्राह्मण के घर से भिक्षा नहीं मांगते थे। एक दिन धनेश्वर ने योगी को गंगा किनारे भिक्षा मांगकर प्रेमपूर्वक भोजन करते देखा।*धनेश्वर योगी के पास गए और दुखी होकर बोले, महाराज! आप अन्य सभी घरों से भिक्षा लेते हैं, परंतु मेरे घर कभी नहीं आते, इसका क्या कारण है? योगी ने कहा, ब्राह्मण! निःसंतान के घर का अन्न ग्रहण करना मेरे धर्म के विरुद्ध है। जिस दिन तुम्हारे घर संतान होगी, मैं तुम्हारे यहाँ से भी भिक्षा स्वीकार कर लूँगा। *यह सुनकर धनेश्वर अत्यंत दुखी हुआ और योगी के चरणों में गिरकर संतान प्राप्ति का उपाय पूछने लगा। योगी ने उसे मां चंडी की आराधना करने का परामर्श दिया। धनेश्वर ने घर आकर पत्नी को सब बताया और स्वयं वन में जाकर तपस्या करने लगा।*मां चंडी ने सोलहवें दिन उसे स्वप्न में दर्शन दिए और कहा, हे धनेश्वर! तेरे पुत्र तो होगा, परंतु उसकी आयु केवल सोलह वर्ष होगी। यदि तुम दोनों पति-पत्नी 32 पूर्णिमाओं का व्रत करोगे, तो वह दीर्घायु हो जाएगा। अपनी सामर्थ्य के अनुसार आटे के दीपक जलाकर शिवजी का पूजन करना। कल सुबह तुम्हें यहाँ एक आम का वृक्ष दिखेगा, उस पर चढ़कर एक फल तोड़ लेना और अपनी पत्नी को खिला देना। *धनेश्वर ने वैसा ही किया। भगवान गणेश की स्तुति कर उसने फल तोड़ा और पत्नी को खिलाया। माता पार्वती और शिव की कृपा से उन्हें एक सुंदर पुत्र रत्न की प्राप्ति हुई, जिसका नाम देवीदास रखा।*देवीदास धीरे-धीरे बड़ा होने लगा। वह अत्यंत सुंदर, सुशील और विद्या में निपुण था। माता ने नियमानुसार 32 पूर्णिमा का व्रत प्रारंभ किया। जब देवीदास सोलहवें वर्ष में प्रवेश कर गया, तो माता-पिता को उसकी मृत्यु की चिंता सताने लगी। उन्होंने देवीदास को उसके मामा के साथ पढ़ने के लिए काशी भेज दिया। *मार्ग में वे एक गाँव में रुके जहाँ एक ब्राह्मण कन्या का विवाह होने वाला था। जिस वर से विवाह होना था, वह अचानक बीमार पड़ गया। वर के पिता ने देवीदास को देखा और उसके मामा से आग्रह किया कि कुछ समय के लिए देवीदास को वर बना दिया जाए ताकि लग्न का कार्य संपन्न हो सके। मामा के मान जाने पर देवीदास का विवाह उस कन्या से हो गया।*विवाह के पश्चात देवीदास उदास था। जब उसकी पत्नी ने कारण पूछा, तो उसने अपनी अल्पायु की बात बता दी। कन्या ने कहा, स्वामी! आप ही मेरे पति हैं, मैं किसी अन्य का वरण नहीं करूँगी। जाते समय देवीदास ने अपनी पत्नी को एक अंगूठी और रुमाल दिया। उसने कहा, प्रिय! मेरे जीवन और मृत्यु का संकेत जानने के लिए एक पुष्प वाटिका बना लो। जब तक यह वाटिका हरी रहेगी, मैं जीवित रहूँगा। यदि फूल सूख जाएं, तो समझ लेना मेरा प्राणांत हो गया है। *काशी में जब देवीदास का सोलहवां वर्ष पूर्ण हुआ, तब यमराज (काल) उसके प्राण लेने आए। परंतु उसकी माता द्वारा किए गए 32 पूर्णिमा व्रत के प्रभाव से और माता पार्वती व भगवान गणेश के हस्तक्षेप से, भगवान शिव ने उसे जीवनदान दे दिया।*उधर उसकी पत्नी ने देखा कि पुष्प वाटिका फिर से हरी-भरी हो गई है, जिससे वह समझ गई कि उसके पति जीवित हैं। शिक्षा पूर्ण कर देवीदास अपनी पत्नी के पास लौटा। ससुर ने बहुत धन-दहेज देकर उन्हें विदा किया। जब देवीदास अपने माता-पिता के पास पहुँचा, तो उनकी खुशी का ठिकाना न रहा। *श्री कृष्ण अंत में बोले, हे माता! इस प्रकार 32 पूर्णिमा व्रत के प्रभाव से धनेश्वर का पुत्र दीर्घायु हुआ। जो स्त्रियां इस व्रत को करती हैं, वे जन्म-जन्मांतर तक वैधव्य का दुख नहीं भोगतीं और सदैव सौभाग्यवती रहती हैं। यह व्रत संतान देने वाला और सभी मनोकामनाएं पूर्ण करने वाला है।🙏 जय श्री कृष्ण 🙏─━━━━━━━⊱✿⊰━━━━━━━─⚜️ तृतीया तिथि केवल बुधवार की हो तो अशुभ मानी जाती है। अन्यथा इस तृतीया तिथि को सभी शुभ कार्यों में लिया जा सकता है। आज तृतीया तिथि को माता गौरी की पूजा करके व्यक्ति अपनी मनोवाँछित कामनाओं की पूर्ति कर सकता है। आज तृतीया तिथि में एक स्त्री माता गौरी की पूजा करके अचल सुहाग की कामना करे तो उसका पति सभी संकटों से मुक्त हो जाता है। आज तृतीया तिथि को भगवान कुबेर जी की विशिष्ट पूजा करनी चाहिये। देवताओं के कोषाध्यक्ष की पूजा आज तृतीया तिथि को करके मनुष्य अतुलनीय धन प्राप्त कर सकता है।।

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