अनोखी शादी में बेसहारों का सहारा बनी अमिता, पशु, पक्षी सेवा के साथ साथ अब मानव सेवा की अनोखी पहल

अक्षय तृतीय पर गरीब कन्या की उठाई जिम्मेदारी, स्वयं किया कन्यादान
ब्यूरो चीफ : मनीष श्रीवास
कटनी। मध्यप्रदेश के कटनी जिले में जहां अक्षय तृतीय को मध्यप्रदेश प्रदेश में जहां राज्य सरकार बड़े बड़े विवाह करा रही हैं वहीं समाज में एक दूसरे के लिए अनेकों जोड़े अपनी शादी में उत्सवों धूम धाम के कराने में व्यस्थ थे। तो दूसरी ओर कटनी जिले में 30 अप्रैल को हर कोई गुड्डा गुड्डे की शादी मे मग्न रहा । पर कटनी मे एक अलग हि नजारा अनोखी शादी का देखने मिला। यहां अक्षय तृतीया के दिन कटनी निवासी निर्धन परिवार की ब्राम्हण बेटी की शादी का जिम्मा सेन समाज की बेटी ने उठाया। यहीं नहीं स्वयं एक कन्या होकर खुद कन्यादान भी किया। साथ ही परिवार सहित अन्य लोगों को भी जागरूक किया। देखा जाएं तो आज कल के शादी विवाह मात्र एक दहेज के बजट पर पक्की होती है। या तो लड़की के माँ बाप धनवान हो या फिर घर और नौकरी वाला लड़का देखते है। या लडके के घर वाले कितना दान दहेज आएगा या लड़की कितना कमाने वाली है ये देखते है। पर इस सोच को गलत साबित किया । ब्राम्हण परिवार ने ज़ब दिव्या दुबे ने अपनी आर्थिक स्थिति समाज सेवी पशु पक्षी प्रेमी अमिता को बताई तब अमिता ने लड़की की हर जरुरत का ध्यान देते हुए दान दहेज का पूरा जिम्मा अपने हांथो पर उठा लिया। हम आपको बताना चाहेंगे कि अमिता श्रीवास ने कम ही उम्र में समाज सेवा और पशु सेवा का कार्य शुरू कर दिया था। महज 30 वर्ष लगभग की उम्र में कुमारी अमित श्रीवास ने सभी रस्मों को निभाते हुए गुरु दीक्षा लेकर कन्या दान किया। जिसमें लड़के वालों ने भी मात्र एक रुपए का दहेज के साथ धूमधाम और खुशी के साथ लड़की की गई विदाई में सहभागी बने।
इस अनोखे विवाह में जब मीडिया ने अमिता से जानना चाहा तो उन्होंने बताया कि दहेज़ प्रथा ने समाज को आर्थिक रूप से कमजोर कर दिया है। जिसमे अब हमारी सरकार को कड़े नियम बनाने बस नहीं इस पर अमल भी करना होगा।
सुबह खुशी खुशी दिव्या दुबे पति गुड्डू दुबे के साथ ससुराल के लिऐ बिदा हुई। इस कार्यक्रम में दिव्या के परिवार के साथ साथ अन्य सहयोगी जन उपस्थित रहे।



