कृषिपर्यावरणमध्य प्रदेश

खेत पाठशाला : नरवाई जलाएं नहीं बल्कि कमाई का जरिया बनाएं

भूसा बनाकर कमा सकेंगे अतिरिक्त पैसा
रिपोर्टर : शिवलाल यादव
रायसेन । किसान अगर ज्यादा से ज्यादा नरवाई से भूसा बनाते हैं तो आगामी समय में यह चारे के रूप में काम आएगा। किसान अपने मवेशियों को खिलाने के साथ दूसरे को बेच सकेंगे। भूसे की सप्लाई जिले एवं जिले के बाहर भी कर सकेंगे। इससे उन्हें अतिरिक्त आय मिलेगी। भूसा इस समय 2 से 3 हजार रुपए ट्रॉली में बिक रहा है। यही भूसा जिले की गोशालाओं, कांजी हाउस में भी काम आएगा। सड़कों पर मवेशी आवारा भूखे-प्यासे नहीं भटकेंगे। पन्नियां आदि सड़े-गले फल- सब्जी का कचरा खाकर मवेशियों की मौतें भी रूकेंगी।
हर गांव में किसान पाठशालाएं लगाई जा रहीं…
उप संचालक जिला कृषि विभाग एनपी सुमन बताते हैं कि नरवाई को किसानों की कमाई का जरिया बनाने प्रयास किए जा रहे हैं। जिले के सातों ब्लॉकों के हर गांव में किसान खेत पाठशालाएं लगाई जा रही है। 15 हजार 85 किसानों को नरवाई जलाने से होने वाले नुकसान एवं नहीं जलाने व इससे भूसा तैयार कर बेचने के अतिरिक्त आय फायदे बताए गए हैं। इनमें 1251 जनप्रतिनिधि भी शामिल हुए हैं।
मार्च महीने के शुरू होने के चन्द दिन शेष बचे हैं। खेतों में लगे गेहूं और चने की कटाई जिले में शुरू हो जाएगी। कटाई खत्म होने के बाद किसान नरवाई को जला देते हैं। इस कारण मिट्टी को नुकसान होने के साथ खेत की उत्पादकता प्रभावित होती है। किसान इस नरवाई से कमाई भी कर सकते हैं। कृषि विज्ञान केंद्र नकतरा के वरिष्ठ कृषि वैज्ञानिक डॉ स्वप्निल दुबे बताते हैं कि किसानों को जागरूक करने ग्राम पंचायत स्तर पर किसान खेत पाठशालाएं लगाई जा रहीं। जिसमें कृषि विशेषज्ञ-वैज्ञानिक और फील्ड कर्मचारियों की टीमें चौपाल में नरवाई से भूसा, जैविक खाद तैयार करने सहित खेतों को नरवाई सहित बखरकर दूसरी फसल बुवाई के लिए प्रेरित कर रही हैं। खेतों में नरवाई जलाने से मिट्टी कठोर होने के साथ उर्वरा शक्ति कम हो रही है। लाभदायक जीवाणु नष्ट हो जाते हैं।

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