कृषिमध्य प्रदेश

नवनिर्मित मृदा परीक्षण प्रयोगशाला में ग्रामीण थोप रहे कंडे, अफसरों की लापरवाही से 36 लाख का भवन हुआ खंडहर

घटने से पहले ही हजारों रुपये का बिजली का बिल छँट गया किसानों को नहीं मिल रहा लाभ
क्षेत्र की कृषि भूमि की घट रही क्षमता, शर्मिंदगी के उत्पादन पर रहा असर
सिलवानी
एक ओर जहां प्रदेश वि केंद्र की सरकारें किसानों को समृद्व बनाने के लिए ढेर योजना चला रही हैं, लेकिन इन योजनाओं का ठीक ढंग से न होने व अधिकारियों की रुचि के अनुसार नहीं होने से योजना धरातल पर निश्चित प्रमाणित नहीं हो रही है। यही कारण है कि तहसील में बनी नई पहेली पहेली का भवन होने से पहले ही रोशनी में निगरानी हो गई है। अधिकारियों की अनदेखी ऐसी कि यहां हैंडओवर के बाद से न तो रखरखाव हुआ न भवन के खुले। परिणाम स्वरूप के बारे में इस भवन और यहां आसपास लगी जगह को अपना बाड़ा बना लिया और यहां कंडे थोपने लगे। शोक भवन चालू नहीं होने के कारण किसान अपने आप को ठगा सा महसूस कर रहे हैं। क्योंकि भवन निर्माण के बाद किसानों को उम्मीद थी कि अब उनके क्षेत्रों की मिट्टी की संभावनाओं की जांच होगी और वह भी सुधार कर आने वाली कंपनियों का बेहतर उत्पादन कर सकेंगे, लेकिन अफसरों की वजह से किसानों की उम्मीदों पर पानी फिर गया। चार साल से अधिक समय के आकलन के बाद भी भवन चालू नहीं हो सकता है। ऐसे में किसानों ने सवाल उठाया है कि जिन योजनाओं का करार हो सकता है और किसानों का लाभ मिल सकता है उनकी ही सरकार को घोषणा करनी चाहिए।
खरीदारी बोर्ड ने आवंटन किया था

कृषि भविष्यवाणी के निकट शेयर बोर्ड ने 36 लाख रुपए की राशि से इस भवन का निर्माण किया। भवन 4 साल पहले बनकर तैयार हो गया कृषि विभाग का हैंडओवर हो गया है। अधिकारियों की वजह से भवन का फ़र्श चटक गया, टाईल्स उखड़ने लगे, हर तरह से छात्रावास का काम हुआ। अब इस भवन में गठबंधन चालू हो गया है तो विभाग को इसके काम के लिए बड़े राशि खर्च करने की सलाह दी जा रही है।
विधानसभा में विधायक ने लगाया सवाल
दर्ज चालू नहीं होने और उनका लाभ किसानों को लेकर विधायक रामपाल सिंह राजपूत ने विधानसभा में सवाल किया है। लगभग सात हजार किसान अपने खेतों की जमीन की संभावनाओं की जांच के लिए परेशान हो रहे हैं। यदि प्रतिबद्ध हो जाती हैं तो किसानों को भी इसका लाभ मिलता है और शिकायत के उतपादन में सुधार होने से किसानों के साथ क्षेत्र भी समृद्व होता है।
30 हजार बिजली बिल स्कैच
मकान में बिजली कनेक्शन हुआ है। भवन हैंडओवर के बाद से कृषि विभाग का बिल नहीं भरा है। वास्तव में भवन बंद है और बिजली बिल बराबर है। जानकारी के मुतायबक 30 हजार 792 रुपए बिल छंटनी है।
किसानों ने बताया कि सूचना सिर्फ शासन के लिए बर्बाद कर रहे हैं।
प्रयोगशाला में मिट्टी के इन तत्वों की होती है जांच
सटीक सटीक वृद्वि एवं विकास के लिए सर्वमान्य रूप से छितरे पोषक तत्वों की आवश्यकता है। ये कार्बन, हाईड्रोजन, ऑक्सीजन, नटजन, फॉस्फोरस, पोटाश, कैल्शियम, मैग्निशियम एवं सल्फर, इन पोषक तत्वों से प्रथम तीन तत्वों को संयो में प्राय: वायु व पानी से प्राप्त करते हैं, शेष 13 पोषक तत्व के लिए ये भूमि पर अपलोड होते हैं करते हैं। सामान्य: यह पौषक तत्व भूमि में प्राकृतिक रूप से रहते हैं।
इस संबंध में नफीस खान, राज्यो, कृषि सिलवानी का कहना है कि प्रयोशाला का संचालन करने के लिए कर्मचारियों की कमी है। इसे लेकर बरिष्ठों से भी अनुरोध किया जाता है। वहीं विधायक ने भी विधानसभा में सवाल किया है। शासन से कर्मचारी मिलने पर ही जुड़ेंगे।

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