गंगा सप्तमी कब मनाई जाएगी ? जानें सही डेट, शुभ मुहूर्त और पूजा विधि
Astologar Gopi Ram : आचार्य श्री गोपी राम (ज्योतिषाचार्य) जिला हिसार हरियाणा मो. 9812224501
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🔮 गंगा सप्तमी कब मनाई जाएगी? जानें सही डेट, शुभ मुहूर्त और पूजा विधि
👉🏽 हिंदू धर्म में गंगा सप्तमी सबसे शुभ दिनों में से एक माना गया है. इस दिन मां गंगा की पूजा-अर्चना की जाती है. पंचांग के अनुसार, यह पर्व हर साल वैशाख माह के शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि को मनाया जाता है. मान्यता है कि इस दिन देवी गंगा की पूजा करने से मनचाहे वर की प्राप्ति होती है और पापों का नाश होता है.
गंगा सप्तमी का दिन मां गंगा के जन्मदिवस के रूप में मनाया जाता है. यह पर्व हर साल वैशाख माह के शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि को पड़ता है.पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन ब्रह्मा जी के कमंडल से मां गंगा प्रकट हुई थीं. हिंदू धर्म में इस दिन का विशेष महत्व है, आइए जानते हैं आचार्य श्री गोपी राम से इस साल गंगा सप्तमी कब है और इस दिन पूजा कैसे की जाती है.
🌊 गंगा सप्तमी 2024 कब है?
हिंदू पंचांग के अनुसार, वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि 13 मई, 2024 शाम 5 बजकर 20 मिनट पर शुरू होगी, जो कि अगले दिन यानी 14 मई, 2024 शाम 6 बजकर 49 मिनट पर समाप्त होगी. उदया तिथि को देखते हुए इस साल गंगा सप्तमी 14 मई, 2024 को मनाई जाएगी.
⚛️ गंगा सप्तमी पूजा विधि
▪️ इस दिन सुबह सूर्योदय से पहले उठें और पवित्र गंगा नदी में स्नान करें.
▪️ देवी गंगा को फूल माला अर्पित करें और घर में बनी मिठाई का भोग लगाएं.
▪️ इसके बाद मां गंगा की आरती करें. गंगा सप्तमी पर दीपदान विधान माना जाता है.
▪️ इस दिन पवित्र गंगा नदी के तट पर मेलों का भी आयोजन किया जाता है.
▪️ गंगा सप्तमी के दिन गंगा सहस्रनाम स्तोत्र और गायत्री मंत्र का जाप करना शुभ माना जाता है.
▪️ गंगा सप्तमी के दिन किसी भी प्रकार की तामसिक चीजों का सेवन न करें.
▪️ इस दिन ज्यादा से ज्यादा धार्मिक कार्य करते रहना चाहिए.
▪️ साथ ही इस दिन शिव जी और भगवान विष्णु की पूजा करना भी फलदाई होता है.
🗣️ गंगा सप्तमी पूजा मंत्र
ॐ नमो गंगायै विश्वरुपिणी नारायणी नमो नम:
गंगा गंगेति यो ब्रूयात, योजनानाम् शतैरपि। मुच्यते सर्वपापेभ्यो, विष्णुलोके स गच्छति
💁🏻 गंगा सप्तमी का महत्व
ऐसा कहा जाता है कि गंगा सप्तमी के दिन गंगा नदी में स्नान करने से व्यक्ति को जीवन में चल रही सभी समस्याओं से छुटकारा मिलता है और उसे वैभव की प्राप्ति होती है. इसके साथ सेहत में सुधार आता है. अगर आप इस दिन गंगा नदी में स्नान न कर पाएं, तो अपने स्नान के पानी में गंगा जल की कुछ बूंदें डालकर, उसमें गंगा मैय्या का आवाह्न करें. ऐसा करके भी आप गंगा नदी में स्नान करने का लाभ पा सकते हैं. कहा जाता है कि इससे शुभ फलों की प्राप्ति होती है. गंगा पूजा के साथ ही इस दिन दान-पुण्य करने का भी खास महत्व है. ऐसा करने से व्यक्ति को जीवन में तमाम तरह के सुख-साधन प्राप्त होते हैं.
📖 गंगा सप्तमी कथा
गंगा सप्तमी के पीछे की कहानी: गंगा दशहरा के दिन ही मां गंगा इस धरती पर अवतरित हुई थीं । गंगा का प्रवाह इतना तेज था कि गंगा के पाताल में समा जाने या इस धरती पर असंतुलित हो जाने का खतरा था। इस कारण महादेव शिव ने गंगा को अपनी जटाओं में समाहित कर लिया।
कुछ समय बाद महादेव शिव ने गंगा को अपनी जटाओं से मुक्त कर दिया, ताकि गंगा भागीरथ के पूर्वजों को मोक्ष दे सकें। गंगा भगीरथ के बताये मार्ग पर चलने लगीं। रास्ते में गंगा के प्रचंड वेग से ऋषि जह्नु का आश्रम नष्ट हो गया। इससे ऋषि जाह्नु ऋषि क्रोधित हो गए । उन्होंने पूरा गंगा जल पी लिया।
इस घटना के बाद भागीरथ और अन्य देवताओं ने ऋषि जाह्नु से गंगा को मुक्त करने की प्रार्थना की ताकि गंगा इस संसार के लोगों का कल्याण कर सकें। इस पर ऋषि जाह्नु ने अपने कान के माध्यम से गंगा को प्रवाहित कर मुक्त कर दिया और गंगा अपने पथ पर आगे बढ़ती रहीं।

