चांद के दर्शन कर सुहागिनों ने व्रत संपन्न किया
ब्यूरो चीफ : शब्बीर अहमद
बेगमगंज। पति पत्नी के अटूट प्यार का पर्व करवाचौथ नगर सहित ग्रामीण क्षेत्रों में परंपरागत रूप से मनाया गया दिनभर निर्जला व्रत रखकर सुहागिनों ने अपने पति की लंबी उम्र की कामना करते हुए चांद के दर्शन के साथ व्रत संपन्न किया। और अपने बुजुर्गों से आशीर्वाद प्राप्त किया।
कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को करवा चौथ का त्योहार मनाया जाता है। इस साल 13 अक्टूबर को करवा चौथ का त्योहार मनाया गया । हिंदू धर्म में यह त्योहार सुहागिन महिलाओं के लिए सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण माना जाता है। करवा चौथ के दिन सुहागिन महिलाओं ने पति की लंबी उम्र के लिए पूरा दिन निर्जल उपवास रखा और मां करवा से सुखी दांपत्य जीवन की प्रार्थना की उनकी कथा सुनी पूरे दिन महिलाएं चांद के निकलने का इंतजार करती हैं। रात को छलनी से पति का दीदार करके चंद्र दर्शन के बाद ही व्रत पारण किया गया।
यह व्रत सौभाग्य, सुख और समृद्धि का प्रतीक माना जाता है। व्रतीयों ने शिव परिवार और भगवान गणपति की पूजा की। उन परिवारों में मार्मिक दृश्य उत्पन्न हुए जिन के पति सीमा पर देश की सुरक्षा में तैनात हैं ऐसे फौजियों की पत्नियों ने शिद्दत के साथ यह व्रत रखा और जब चांद के दर्शन हुए तो छलनी से अपने पति की फ़ोटो दर्शन करके व्रत खोला और अपने सुहाग की रक्षा की कामना नम आंखों और लरज़ते लबों (होंटों) से की तो उपस्थित परिजन अपने आंसू नहीं रोक पाए।
करवा चौथ के दिन सुहागिन महिलाओं ने सूर्योदय से पहले उठाकर स्नानादि से निवृत होकर स्वच्छ कपड़े धारण करके घर के मंदिर की साफ-सफाई की। फिर व्रत का संकल्प लिया।
पीले रंग की मिट्टी से मां पार्वती की मूर्ति बनाई और उनकी गोद में गणेश जी को विराजित किया। फिर इस मूर्ति का श्रृंगार कर और लाल रंग की चुनरी ओढ़ाकर चौकी पर स्थापित किया। मां गौरी के सामने एक करवे में जल भरकर रखा। फिर गणेश और गौरी की विधि- विधान से पूजा की और करवा चौथ की कथा सुनी। कथा सुनते समय हाथ में गेहूं या फिर चावल के 13 दाने रखे, शाम को चांद के दर्शन के बाद, उसे अर्घ्य देंकर पति को छलनी से देखा फिर पति के हाथों से जल ग्रहण कर, व्रत का पारण किया।



