क्राइममध्य प्रदेश

रेंजर का कारनामा, मुखबिर से मिलकर मोर के शिकार में फंसा दिया बेगुनाह को

नकाबधारी युवक ने रखा था मीडियाकर्मी की बाईक के साइड बैग में शिकार का गोश्त
सीसीटीवी फुटेज में हुआ साजिश का खुलासा

ब्यूरो चीफ : शब्बीर अहमद
भोपाल । राजधानी भोपाल के नवीन नगर कालोनी में रहने वाले एक मीडियाकर्मी को रेंजर ने मुखबिर के साथ मिलकर मोर के शिकार के आरोप में फंसा दिया। पहले तो मीडियाकर्मी के घर की रैकी की गई, उसके बाद सुनियोजित तरीके से नकाबधारी युवक ने उनकी बाईक के साईड बैग में शिकार का मांस रख दिया और वहां से चला गया। यह पूरा घटनाक्रम मीडियाकर्मी के घर पर लगे सीटीटीवी कैमरे में रिकार्ड हो गया। जब मीडियाकर्मी खाने के बाद घर से संस्थान जाने के लिए निकले तो षडय़ंत्र के तहत मीडियाकर्मी को अशोका गार्डन दुर्गा मंदिर के सामने से शिकार के मांस के साथ रेंजर अनिल शर्मा ने गिरफ्तार कर लिया।
जानकारी के मुताबिक वारिस मोहम्मद, 201 नवीन नगर में पानी की टंकी के पास मो. लईक कुरैशी के मकान में किराए से निवास करते हैं। वह प्रतिष्ठित समाचार पत्र समूह दैनिक भास्कर में डिप्टी सर्कुलेशन मैनेजर के पद पर कार्यरत हैं। वह हर रोज लंच के समय अपने घर पर ही खाना खाने के लिए आते हैं। खाने के बाद वारिस तकरीबन साढ़े 3 बजे वापस संस्थान के लिए निकल जाते हैं। मंगलवार को भी दोपहर में वह खाना खाने के लिए घर पर आए। गाड़ी उन्होंने अपने मकान के सामने सडक़ किनारे खड़ी कर दी और भीतर खाना खाने चले गए। उनके वापस संस्थान जाने के लिए निकलने से तकरीबन 5 मिनट पहले काली जींस और डिजाईनदार महरून कलर की जैकेट पहने एक हट्टा-कट्टा शख्स मुंह पर बड़ा सा रुमाल बांधे और काला चश्मा लगाए हुए एक्टिवा से आया। उसके हुलिए से साफ जाहिर था कि वह अपनी पहचान छिपाना चाहता है। उसने अपनी एक्टिवा को मीडियाकर्मी के निवास से कुछ दूरी पर खड़ा कर दिया। इसके बाद वह हल्के लाल रंग की एक थैली हाथ में लिए टहलता हुआ मीडियाकर्मी के घर के सामने पहुंच गया। उसने यहां कुछ देर इधर-उधर देखा और मौका पाकर थैली बाईक के साइड में लगे बैग में रख दी। इसके बाद उसने फोन निकाला और नम्बर डॉयल करता हुआ वहां से चल दिया।
अब शुरू होता है फ्लाईट स्क्वाड के रेंजर अनिल शर्मा का असली खेल। जैसे ही मीडियाकर्मी अपने घर से संस्थान जाने के लिए निकला, वह कुछ ही दूरी पर अशोका गार्डन स्थित दुर्गा मंदिर के करीब पहुंचा, रेंजर अनिल शर्मा ने अपनी टीम के साथ उसे दबोच लिया। इसके बाद वह मीडियाकर्मी को चार इमली स्थित अपने दफ्तर ले गए। जब वारिस ने रेंजर से कहा कि ये मांस का थैला मेरा नहीं है यह किसी ने मेरी बाईक में रख दिया है, लेकिन रेंजर ने उसकी बात को अनसुना कर दिया और इससे पहले कि वह अपने घर से सीसीटीवी फुटैज मंगवा पाता, उसके खिलाफ आनन-फानन में मामला दर्ज कर दिया। इससे रेंजर की भूमिका संदेह के घेरे में आ गई हैं। सीसीटीवी फुटैज सामने आने के बाद रेंजर ने मुखबिर को तलब नहीं किया और न ही उससे यह पूछताछ की कि तुमने यह मुखबिरी की है, इस मामले में यह फुटैज सामने आया है।
उठ रहे हैं ये सवाल

  • प्रश्न यह उठता है कि जब भी कोई वन्य प्राणी के शिकार का मामला पकड़ाया जाता है तो सबसे पहले आरोपी से ये सवाल किया जाता है कि शिकार कहां किया तुमने? उसके बाद मौके पर जाकर वन्य प्राणी के अवशेष बरामद किए जाते हैं। शिकार के लिए उपयोग में लाई गई बंदूक और वाहन जप्त किए जाते हैं। इस मामले में रेंजर अनिल शर्मा ने कोई सवालात नहीं किए। ताबड़तोड़ कार्यवाही करते हुए एक बेगुनाह शख्स को गुनाहगार बनाकर थाने के लॉकअप में अपराधियों के बीच भेज दिया।
    रेंजर का जंगलराज
  • प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान का कहना है कि प्रदेश में कानून का राज है, लेकिन जंगल के अधिकारी उनकी इस मंशा को पलीता लगा रहे हैं। ऐसा लग रहा है कि जंगल के अधिकारी राजधानी में भी जंगलराज स्थापित करना चाहते हैं। प्रदेश के हर एक व्यक्ति को इस बारे में सोचना पड़ेगा कि कहीं अगला निशाना वह तो नहीं ..। कार्यवाही करने से पहले रेंजर को इस बात का भी ख्याल नहीं आया कि आरोपी मीडियाकर्मी है और एक प्रतिष्ठित अखबार समूह से जुड़ा हुआ है।
    जांच का विषय
  • इस मामले में परिजनों का कहना है कि यह सुनियोजित षडय़ंत्र है। जिसका जल्द से जल्द खुलासा होना चाहिए। उन्होंने मांग की है कि इस मामले की पारदर्शी और निष्पक्ष तरीके से जांच करवाई जाए। ताकि बेगुनाह व्यक्ति को फंसाने वालों का पर्दाफाश हो सके। इस संबंध परिजनों की ओर से थाने में शिकायत की जा रही है।
    तो मुझ पर ही उठने लगती ऊंगलियां
    इस मामले में रेंजर अनिल शर्मा का तर्क है कि यदि वह इस व्यक्ति को जांच करके छोड़ देते तो उन पर ही ऊंगलियां उठने लगती और लेन-देन के आरोप लगने लगते। इसी बात को ध्यान में रखते हुए उन्होंने जल्द से जल्द मामला दर्ज कर दिया।

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