मध्य प्रदेश

पशु विभाग का अमला बेपरवाह : गाैवंश में लंपी के साथ अब खुरपका-मुंहपका राेग के भी लक्षण, खतरा बढ़ा

पशुओं पर रोग नियंत्रण को लेकर विभाग द्वारा नहीं कराए पुख्ता इंतजाम
वैक्सीनेशन नहीं हुआ, पशु पालन विभाग ने एक भी सैंपल नहीं भेजा

रिपोर्टर : शिवलाल यादव
रायसेन। गाैवंशीय पशुओं में जानलेवा लंपी के साथ अब खुरपका-मुंहपका राेग के लक्षण देखे जा रहे हैं। शहर से लेकर ग्रामीण इलाकाें में पशु पालक गाय, बैल व बछड़ाें काे इन दाेनाें राेगाें से बचाने के लिए अपने स्तर पर जतन कर रहे हैं। लेकिन पशु विभाग का अमला पूरी तरह से बेपरवाह बना हुआ है। वेटरनरी डाॅक्टर सरकारी दवाओं से निजी स्तर पर इलाज कर रहे हैं।साथ ही वे जमकर कमाई कर रहे हैं उन्हें पशुओं का इलाज पशु अस्पताल में करने से कोई मतलब नहीं है।
लंपी की राेकथाम के लिए वैक्सीन के 8 हजार डाेज की डिमांड भेजकर विभाग का अमला अपनी जिम्मेदारी से बचता दिख रहा है। मैदान में पशु विभाग के जिम्मेदार अधिकारियाें की टीम नजर नहीं आ रही। जिससे पशुओं में इन दाेनाें बीमारियाें के तेजी से फैलने का खतरा बढ़ गया है।
मुंह में छाले हाेने से मर जाते हैं पशु …..
उप संचालक पशु चिकित्सा सेवा डॉ पीके अग्रवाल का कहना है कि खुरपका-मुंहपका रोग से पीड़ित पशु के खुर से बीमारी की शुरुआत हाेती है। उसके पैर सूज जाते हैं। जब संक्रमण मुंह तक पहुंचता है ताे छाले हाेने से पशु कुछ खा नहीं पाते। जिससे उनकी माैत तक हाे जाती है। पशु का लंगड़ाना व मुंह से लगातार लार टपकाना भी इस रोग के प्रमुख लक्षण हैं।
टीकाकरण कराना भी जरूरी है….
इस रोग से बचाव के लिए पशुओं का हर 6 माह के अंतराल से टीकाकरण हाेता है, लेकिन पशु विभाग इसमें लापरवाही बरत रहा है। पशु पालक बलराम पटेल, विजय यादव, पिंकू यादव, लक्ष्मीनारायण धाकड़ ने बताया कि उनकी गाय का अचानक पैर सूज गया था। वेटरनरी डाॅक्टर काे बुलाकर इलाज कराया। अब ठीक है।
गाय व बछड़ाें में लंपी का असर, शरीर पर देखी जा रही गांठे
लंपी रोग एक वायरस के जरिए पशुओं में फैल रहा है। इसे गांठदार त्वचा रोग वायरस (एलएसडीवी) भी कहा जाता है। इस वायरस की तीन प्रजातियां हैं। पहली प्रजाति कैप्रिपॉक्स वायरस, दूसरी गोटपॉक्स वायरस और तीसरी शीपपॉक्स वायरस हैं। गाैवंशीय पशुओं को पहले बुखार आता है।उसके साथ ही वजन कम होना, लार निकलना, आंसू-नाक का बहना, दूध कम होना है। पशुओं के शरीर पर गांठें बन जाती हैं। शहर के तजपुरा पाटनदेव भादनेर नेबली भुंआरा और खरगावली पिपलई आसपास के हाईवे से लगे गांवाें में लंपी का असर देखा जा रहा है। पशु विभाग अपनी जिम्मेदारी से बचते हुए सैंपल जांच के लिए नहीं भेज रहा।
लंपी का केस नहीं मिला, वैक्सीन की डिमांड भेजी है: डिप्टी डायरेक्टर……
पशु विभाग के डिप्टी डायरेक्टर डॉ पीके अग्रवाल कैलाश रघुवंशी का कहना है कि लंपी से ग्रसित काेई पशु मेरे पास नहीं आया। न ही किसी ने मुझसे संपर्क किया है। यदि किसी पशु में इसके लक्षण देखे जा रहे हैं ताे मुझसे या वेटरनरी अस्पताल में संपर्क करें। वैक्सीन के लिए काफी पहले डिमांड भेजी गई थी, लेकिन अभी तक आई नहीं है।

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