मध्य प्रदेश

डॉक्टर जावेद अली की याद में फ्री हिजामा, कपिंग थेरेपी कैंप आयोजित

ब्यूरो चीफ : शब्बीर अहमद
बेगमगंज । हिजामा, कपिंग थेरेपी से विभिन्न रोगों का इलाज किया जाता है इस थेरेपी का चलन तेजी से बढ़ रहा है। स्वर्गीय डॉक्टर जावेद अली की याद में फ्री हिजामा ( कपिंग थेरेपी ) कैंप का आयोजन उनके ही क्लीनिक पर किया गया जिसमें टीपू सुल्तान यूनानी मेडिकल कॉलेज गुलबर्गा कर्नाटक के असिस्टेंट प्रोफेसर सैयद जुबेर अली एमडी बेंगलुरु एवं अटेंडर डॉ हसन जावेद उर्फ टीपू ने कपिंग थेरेपी से लोगों का इलाज किया जिसमें करीब सो लोगों ने नि:शुल्क कैंप का लाभ उठाया।
प्रोफेसर डॉ सैयद जुबेर अली ने बताया कि हिजामा, दुनिया का बेहतरीन इलाज है यह एक बेहद आसान इलाज है। जिसमें बदन से खराब खून को निकाला जाता है। उर्दू भाषा में हिजामा को पिछना लगाना और आयुर्वेद में रक्त मोक्षण्, चीन में वीट कपिंग, मिस्र में विलकर्न, सीरीया कतर, सउदी अरब, जापान, मलेशिया, इंडोनेशिया में हिजामा के नाम से जाना जाता है। इसे कपिंग थेरेपी भी कहते हैं। हिजामा की दो किस्में है।अल इलाज,अल वकाया यानी परहेज के लिए, परहेज के लिए किया जाने वाला हिजामा आज के दौर की खास जरूरत है क्योंकि खाने पीने में इस्तेमाल होने वाले केमिकल्स, पाल्यूसन, कीटनाशक के उपयोग से पैदा किए जाने वाले अनाज सब्जियों का बढ़ता इस्तेमाल, अंग्रेजी दवाओं का इस्तेमाल आदि से हमारे जिस्म में कई तरह की खराबियां पैदा हो जाती है। इन खराबियों से बचने के लिए खून की सफाई बेहद जरूरी है इसलिए तंदरूस्ती को कायम रखने के लिए हिजामा को साल में दो बार या एक बार जरूर करवाना चाहिए।
हिजामा पेरालेसिस, सिर दर्द, मिर्गी, याददाश्त की कमी, डिप्रेशन, आंखो की कमजोरी, घुटनों का दर्द, गर्दन का दर्द, सियाटिका, कमर का दर्द, गठिया, पुरानी चोट, चमड़ी के रोग, बांझपन, कास्मेटिक प्रॉब्लम्स, फेफड़ो में सांस के रोग, चमड़ी का सुन्न पन आदि रोगो के लिए किया जाता है। हिजामा बदन के सतही हिस्से को साफ बनाता है, खून साफ करता है, ब्लड सर्कुलेशन एक्टीवेशन को बेहतर करता है।

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