मध्य प्रदेश

स्वयं सहायता समूह एवं ग्राम विकास समिति के पदाधिकारियों की क्षमता वर्धन कार्यशाला संपन्न

आजीविका मिशन कार्यालय जबेरा में हुआ आयोजन
ब्यूरो चीफ भगवत सिंह लोधी
जबेरा । स्व सहायता समूह एवं ग्राम विकास समिति के पदाधिकारियों की क्षमता वर्धन कार्यशाला का आयोजन मानव जीवन विकास समिति कटनी द्वारा आजीविका मिशन कार्यालय जबेरा में किया जिसमें आजीविका मिशन ब्लॉक जबेरा से ह्रदेश सिंह ने कहा कि आजीविका मिशन के माध्यम से समूहों को क्रेडिट लिंकेज एवं 150 ऐसी योजनाये है जिनके माध्यम से समूहों कि बहनों की आजीविका सुद्रण हो सकती है इसके साथ साथ उनके परिवार के बच्चे जो शिक्षित वेरोजगार है उनको समय समय पर रोजगार मेलो का आयोजन किया जाता है। जिससे वेरोजगारी खत्म करने का एक प्रयास है मानव जीवन विकास समिति सचिव निर्भय सिंह ने कहा कि अच्छे समूह के लक्षण 11 सूत्र के विषय में विस्तृत जानकारी प्रदान की जैसे नियमित बैठक, नियमित बचत, आपसी लेनदेन, उधार बापसी, एवं लेखा संधारण इत्यादि बिंदुओं पर जानकारी दी। परियोजना समनब्यक राधिका तिवारी ने कहा कि समूहों ओर ग्राम विकास समितियों को सुद्रण बनाने हेतु आपस में मीटिंग बैठक कर सहयोग करे जिससे समूह एवं ग्राम की उन्नति हो। बैंक सखी एवं कृषि सखी आरती रैकवार ने कहा कि बैंक के लेन देन एवं नये समूह के खाते खुलवाना एवं सीसी लिमेट के दस्तावेज के विषय मे जानकारी दी । जबेरा ब्लॉक समनब्यक राकेश विश्वकर्मा ने कहा कि समूह का उचित संचालन एवं समूहों को रोजगार उनमुक्त की ओर ले जाना है समूह छोटे छोटे कार्य कर अपनी आजीविका सुद्रण कर सकता है एवं समूह कि प्रत्येक महिला यदि जैविक खेती को अपनाये तो उसका खेती में लगने वाला ब्यय कम किया जा सकता है साथ ही समाज को पौष्टिक भोजन एवं बीमारियों से मुक्त किया जा सकता है। नरेश खटीक ने कहा कि लोगों के स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए जैविक खेती करना चाहिए साथ ही रसायनिक खेती के दुष्प्रभाव को पंजाब से चलने वाली केंसर ट्रेन का उदाहरण सहित विस्तार से समझाया मानव जीवन विकास समिति जिला समनब्यक घनश्याम प्रसाद रायकवार ने कहा कि प्राकृतिक संसाधन हैं उसका संरक्षण करना है उसी संरक्षण में शामिल हैं जल जंगल जमीन जानवर, आधरित खेती करने के लिए लघु सीमांत किसानों से अपील की है कि वर्तमान समय में लघु सीमांत किसानों के लिए घाटे की खेती साबित होती है इसकी मुख्य बजह है बाजार आधारित खेती किसान बाजार पर निर्भर रहकर रसायनिक दवाईयां खाद एवं बीज बाजार से खरीदता तथा खेती की जुताई बुआई कटाई के लिए मशीनों का उपयोग करता है। सेठ, साहूकारो से पैसे लेकर खेती में लगाते हैं जब फसल आजाती है उस समय वह सेठ साहूकार भी किसानों के पास जाकर फसल ओने पौने दामों ( सस्ते) में खरीदते हैं सरकार के मानक मूल्य तक में फसल नहीं खरीदते हैं इसलिए किसानों के लिए होने वाली आमदनी सब सेठ साहूकारो के पास चली जाती है ओर खेती में लागत मूल्य बढने की समस्या यही से प्रारंभ होती है रसायनिक दवाईयां खाद डालने से जमीन बंजर होती है एवं जमीन ठोस बनती जा रही है जमीन के अंदर वारिस का जल रीचार्ज नहीं होता है क्योंकि खेत में जो कीट मित्र थे वह रसायनिक खाद दवाईयां डालने से नष्ट हो गयें है जैसे केंचुआ, केकणा इत्यादि परम्परागत खेती करने लिऐ गाय गोबर जानवर आधारित खेती है उक्त कार्यक्रम में इन्द्रा गांधी राष्ट्रीय जनजातीय विश्वविद्यालय अमरकंटक से विवेक मिश्रा, अविनाश आनंद सुधा साहू, हेमलता राठौर, आकांक्षा मरावी, श्लेता चौकसे इंटरसिट के लिए आये हुए है उन्होंने भाग लिया ब्लॉक जबेरा के 19 गाँव के 62 लोगों ने भाग लिया।

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