मध्य प्रदेश

दरगाह शरीफ मजार पर 801वां सालाना उर्स, जिला प्रशासन द्वारा मजार पर शिद्दत व अकीदत से मत्था टेक चादर चढ़ाई

12-12 साल के अंतर से हर मौसम में आता है उर्स का नंबर कारण- इस्लामिक कैलेंडर में 10 दिन पीछे होते हैं त्यौहार
रिपोर्टर : शिवलाल यादव
रायसेन।
शहंशाहे मालवा हजरत पीर फतेह उल्लाह साहब की प्रसिद्ध मजार पर 801वां सालाना उर्स का आयोजन किया जा रहा है। जिसमे दूर दराज सहित असपास के जिलों राजधानी भोपाल, विदिशा, सागर, सीहोर, होशंगाबाद, रायसेन जिले से हजारों जायरीन बाबा साहेब के दरबार में सजदा करने मत्था टेकने आते हैं। उर्स के पहले दिन जिला व पुलिस प्रशासन के अधिकारियों की ओर से कलेक्टर अरविंद दुबे, एसपी विकाश कुमार शाहवाल ने मजार शरीफ पर आस्था श्रद्धा की चादर पेश की । साथ ही जिले में अमनो अवाम की सुख शांति खुशहाली की कामना बाबा पीर फतेह उल्लाह से की।
मालूम हो कि नेशनल हाईवे 146 भोपाल रोड स्थित शहंशाहे मालवा हजरत बाबा पीर फतेह उल्लाह साहब की दरगाह शरीफ मजार परिसर में शुक्रवार से सालाना 801वां उर्स प्रारका आयोजन किया जा रहा है। यहां पर उर्स करीब 800 साल से लगातार भरता चला आ रहा है। हालांकि उर्स के महीने भी बदलते रहते हैं। कारण इस्लामिक कैलेंडर के अनुसार मुस्लिम समाज के सभी त्यौहार 10 दिन पीछे घटते जाते है। सालाना उर्स भी उसी तर्ज पर घटते हुए क्रम में यहां पर भराता है। प्रत्येक 12 साल में उर्स कभी कभी ठंड का मौसम तो गर्मी या फिर बारिश के मौसम में भराता है।
दरगाह शरीफ मजार के पास रहने वाले 85 वर्षीय अजीज उल्लाह शरीफ मुन्ने चाट वाले, वरिष्ठ पत्रकार अब्दुल रसीद खान रसीद चिश्ती ने बताते है कि उनका पूरा बचपन दरगाह पर ही गुजरा है। उनके अनुसार सूफी संत हजरत बाबा पीर फतेह उल्लाह साहब अपने शिष्यों के साथ इराक-ईरान के रास्ते से होकर मालवा (भारत) में आए थे।बताते हैं कि मोरछली के पेड़ के नीचे बाबा साहब व उनके शिष्यों का डेरा था।बाबा साहेब गरीबों की मदद करने, उनके दुख-दर्दों का दूर करने में हमेशा तत्पर रहते है। उन्हीं की प्रेरणा से ही 800 साल पहले सालाना उर्स की शुरुआत की गई थी। उर्स में अमीर लोग शिरकत करते थे,जो गरीबों को उपहार या फिर उनकी जरुरत का सामान बांटते थे।ताकि गरीबों की किसी तरह से मदद हो जाए।तब से लेकर अब तक निरंतर उर्स यहां पर भराता चला रहा है। यहां पर हजारों की संख्या में लोग उर्स के मौके पर जुटते है। शहंशाहे मालवा हजरत बाबा पीर फतेह उल्लाह साहब अजमेर के ख्वाजा मुईन उददीन चिश्ती के भांजे थे। इस कारण भी यहां की दरगाह पूरे भारत देश में प्रसिद्ध हो गई ।

Related Articles

Back to top button