धार्मिकमध्य प्रदेश

दादा दरबार जैसे आश्रम सनातन संस्कृति के उत्थान का एक मात्र मार्ग

रिपोर्टर : कमलेश अवधिया
साईंखेडा । श्री दादा जी की लीला स्थली साईंखेडा के श्री श्री १००८ श्री दादा दरबार, गाडरवारा रोड, साईंखेडा मे परम पूज्य श्री छोटे सरकार जी महाराज के पवन सानिध्य में श्री राम कथा महोत्सव का भव्य आयोजन चल रहा है |
प्रातः काल से ही भजन पूजन का दौर चलता रहता है | ब्राम्हणों द्वारा व्यंकटेश स्रोतम, सुप्रभातम, रुद्री, दुर्गा सप्तशती, विष्णु सहस्रनाम आदि वैदिक मंत्रो का पाठ किया जाता है ।
प्रातः काल दैतपौन ग्राम से श्री रामजानकी गौशाला और वैदिक विद्यालय के महंत जी अनेक विप्र वेद विद्यार्थियों के साथ दरबार पधारे और श्री दादाजी महाराज को सुंदरकांड की चौपाइयां एवं भजन सुनाए। दोपहर 3 बजे से दूसरे दिवस की श्री राम कथा प्रारंभ हुई।
द्वितीय दिवस की श्रीमद भागवत कथा में मऊरानीपुर से पधारे हुए संत श्री ब्रम्हचारी जी महाराज ने सबसे पहले श्रोताओं के कुछ प्रश्नों के उत्तर दिए, एक श्रोता ने प्रश्न किया – सनातन संस्कृति का प्रारंभ कब हुआ इसका उत्तर देते हुए बताया कि सनातन संस्कृति किसी के द्वारा निर्मित नही है, सनातन संस्कृति अनादि काल से मनुष्य की उत्पत्ति के पहले से है और हमेशा रहेगी.. कभी कभी हमे लगता है कि इसका क्षरण हो रहा है पतन और उत्थान प्रकृति का नियम है, पर संस्कृति कभी खत्म नही हो सकती है ।
इस्लाम और ईसाई की उत्पति भी सनातन संस्कृति से हुआ है, इन्होंने भी अप्रत्यक्ष रूप से सनातन संस्कृति को स्वीकार किया ही है, इस बात का प्रमाण यह है कि इस्लाम चंद्रमा को मानकर अपने कैलेंडर को गड़ना की पर चंद्रमा है तो आखिर सनातन संस्कृति के देव..
आगे महाराज जी ने बताया कि सनातन संस्कृति के उत्थान का एक मात्र मार्ग हमारे दादा दरबार जैसे धार्मिक स्थलों से संभव है, सनातन संस्कृति का प्रत्यक्ष उदाहरण हम दादा दरबार, साईंखेड़ा में दिन में दो बार देख रहे है यहां प्रसाद को पंगत लगती है तो वो सबके लिए समान है इसमें किसी जाति, वर्ण, आयु और आय के हिसाब से वर्गीकरण नही है। जो प्रसाद बनता है वह सबके लिए समान है, अतः हम सभी को हमारे धार्मिक स्थलों के पुनरुत्थान के लिए कार्य करना चाहिए।

Related Articles

Back to top button