मध्य प्रदेश

बस स्टैंड निर्माण कार्य फाइलों में दफन! तय समय सीमा पार हुए महीनों, पर काम अब भी शून्य

रिपोर्टर : कमलेश अवधिया
साईखेड़ा। नगर परिषद साईखेड़ा की कार्यशैली पर बड़ा सवाल—7 माह में पूरा होने वाला बस स्टैंड निर्माण कार्य डेढ़ साल बाद भी शुरू नहीं! 20 जून 2024 को जारी की गई निविदा में स्पष्ट रूप से उल्लेख था कि पुराना मवेशी बाजार वार्ड 08 में बस स्टैंड सह शॉपिंग कॉम्प्लेक्स का निर्माण 7 माह में पूर्ण किया जाएगा। कुल लागत ₹1.75 करोड़ निर्धारित की गई थी। लेकिन आज तक न अतिक्रमण हटाया गया, न भूमि समतलीकरण हुआ, न ही निर्माण का कोई बोर्ड या मशीनरी तक दिखाई देती है।
समय सीमा कब की समाप्त हो चुकी—पर अधिकारियों की नींद अभी भी समाप्त नहीं हुई।
जनता का आरोप : विकास नहीं, सिर्फ टेंडर की राजनीति! स्थानीय लोगों का कहना है “वर्क ऑर्डर निकालकर अधिकारी और जनप्रतिनिधि अपना हिस्सा निकाल लेते हैं। काम होगा या नहीं, समय पर होगा या नहीं—इससे किसी को कोई फर्क नहीं पड़ता।”
7 माह की योजना, 18 महीनों की चुप्पी जारी टेंडर: 20 जून 2024 कार्य अवधि: 7 माह ,देरी: लगभग 1 साल से अधिक
क्या यह लापरवाही नहीं?
क्या इतने बड़े प्रोजेक्ट का पूरा एक साल यूँ ही गायब होना जवाबदेही से परे है?
मुख्य प्रश्न 1 जब समय सीमा स्पष्ट थी, तो निगरानी किसने की ? 2. ठेकेदार को भुगतान हुआ या नहीं? 3. अगर काम शुरू नहीं हुआ, तो कार्रवाई क्यों नहीं ? 4. जनता की जरूरतों पर राजनीति क्यों हावी है?
अथाह देरी ने बस स्टैंड को अधर में लटका दिया है—और जिम्मेदार अभी भी चुप हैं। साईखेड़ा की जनता जवाब चाहती है, कार्रवाई चाहती है, और पारदर्शिता की मांग कर रही है।
इस संबंध में जब मुख्य नगर पालिका अधिकारी, नगर परिषद साईंखेड़ा से बात की गई, तो उन्होंने देरी का कारण अतिक्रमण बताया।
सीएमओ का कहना है अतिक्रमण हटाने में कुछ प्रशासनिक और कानूनी परेशानियां आ रही हैं, इसलिए निर्माण कार्य रुका हुआ है। हम जल्द ही अतिक्रमण हटाकर निर्माण कार्य शुरू करने की प्रक्रिया को गति देंगे। यह बयान स्पष्ट करता है कि अतिक्रमण हटाना नगर परिषद की अपनी प्रशासनिक जिम्मेदारी थी, जिसे वह समय पर पूरा करने में विफल रही। परिषद की यह प्रशासनिक विफलता सीधे तौर पर प्रोजेक्ट में हो रही एक साल से अधिक की देरी के लिए जिम्मेदार है।

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