बीजेपी के पूर्व विधायक भगवत सिंह पटेल की मौत का मामला
हादसा, हत्या, अथवा आत्महत्या, चर्चा का बाजार गर्म
बाथरूम के पास गिरने की वजह से सिर में लगी चोट, अधिक ब्लड निकलने के कारण हुई मौत, पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद हुआ खुलासा
रिपोर्टर : मधुर राय
बरेली। बरेली सिलवानी विधान सभा क्षेत्र से तीन बार विधायक रहे भगवतसिंह पटेल की अचानक हुई मौत नगर में दिन चर्चा का विषय बनी रही है। सुबह से लेकर अन्तिम संस्कार तक मौत पहेली बनी रही।
प्राप्त जानकारी के अनुसार सुबह वाथरूम में पड़ा हुआ देख परिजन ने बाहर लाये और मृत जानकर अंतिम यात्रा की तैयारी करने लगें। सभी को अंतिम यात्रा की सूचना भी दे दी गई। शरीर की सफाई करते समय अचानक कान के पीछे घाव पर पड़ी तो शंका हुई शंका के आधार पर पुलिस को बुलाया गया। बरेली सिविल अस्पताल भेजा गया वहां पर कान के पीछे बड़ा एवं गहरा घाव था दूसरी ओर भी घाव देखा गया इससे विधायक की मौत पर तरह तरह की चर्चाएं जोर पकड़ने लगी । कोई कह रहा गोली मारी गयी है कोई वाथरूम में गिरने से चोट आने से हुई मौत कई बात कह रहा था। बरेली के वार्ड नंबर 12 स्थित अपने मकान में एक कर्मचारी के साथ रहते थे पूर्व विधायक भगवत सिंह पटेल । कर्मचारी छोटू केवट ने पटेल को रात में सोते समय और फिर सुबह उनके शव को देखा था।
डॉ. लखनलाल अहिरवार, डॉ. प्रशांत एवं डॉ. हेमंत यादव की मेडिकल रिपोर्ट में सिर में लगी गहरी चोट, अधिक ब्लड निकलने के कारण हुई मौत बताया जा रहा है।
पुलिस अधीक्षक विकाश कुमार शाहवाल ने पूर्व विधायक के सिर में गोली लगने की शंका को निराधार बताया हैं। पुलिस अधीक्षक ने कहा कि पूर्व विधायकजी के परिजनों की शंका पर पोस्टमार्टम कराया गया हैं। FSL की टीम ने भी मुआयना किया है। अभी पोस्टमार्टम की रिपोर्ट नहीं आई हैं।
पर सच्चाई जानने के लिये उत्सुक बने रहे लोग फिलहाल पूर्व विधायक की मौत संदेह के घेरे में है। पूर्व विधायक की मौत की खबर लगते ही भाजपा एवं कांग्रेस नेताओं का जमघट लगा रहा। निज निवास से पुराने राष्ट्रीय राजमार्ग से अंतिम यात्रा मुक्ति धाम पहुंची जहां पर अंतिम संस्कार किया गया। अंतिम यात्रा में सैकड़ों लोग मौजूद थे। दो मिनट का मौन धारण कर श्रद्धांजलि अर्पित की गई। पटेल की आयु 85 बर्ष के लगभग थी वे नयागांव के निवासी थे, उनके परिवार में 4 पुत्रिया है सभी विवाहित हैं। पूर्व विधायक पटेल अपने कठोर एवं स्पष्ट स्वभाव के धनी थे, स्पष्ट वादियां कूट कूट कर भरी हुई थे। भारतीय जनता पार्टी के स्तंभ थे । 6 बार विधान सभा का चुनाव लड़े जिसमें 3 चुनाव हारे और 3 जीते अंतिम चुनाव पूर्व विधायक भगवान सिंह राजपूत के बीच लड़ा गया था। राजनैतिक जीवन साफ-सुथरा था।



