सर्वर की धीमी चाल से गरीबों की झोली में नहीं पहुंचा, राशन दुकान- तीन दिवसीय अन्न महोत्सव में कतारों में घंटों में खड़े रहे उपभोक्ता
रिपोर्टर : शिवलाल यादव
रायसेन। जिले की राशन दुकानों में मनाए गए तीन दिवसीय अन्न महोत्सव के दौरान 80 फीसदी गरीबों की झोली में सस्ता गेहूं- चावल नहीं पहुंचा। उपभोक्ता दिनभर पीडीएस की दुकानों के सामने कतार लगाकर खड़े रहे। राशन दुकानों के वकर्मचारी भी इसे प्रदेशव्यापी समस्या बताते रहे।
अन्न महोत्सव का आयोजन 7 से 9 नवंबर तक किया गया था। इन तीन दिनों में सुबह आधा घंटे ही राशन दुकानों का सर्वर राज्य शासन के अनाज वितरण सिस्टम से जुड़ पाया। उसके बाद पूरे दिन तकनीकी खराबी बनी रही।लगातार पीओएस मशीनों के सर्वर की धीमी चाल की समस्या बनीं हुई है।इससे लोग दिनभर राशन दुकान में इंतजार करते रहे। उपभोक्ता दुकानदार से इसकी शिकायत करते रहे, लेकिन वे भी भोपाल से कनेक्टिविटी न मिलने से परेशान होते रहे। राशन दुकानदारों ने इसकी शिकायत लगातार जिला खाद्य आपूर्ति विभाग के अधिकारियों से की। इस पर कोई रिस्पांस नहीं मिल पाया। समस्याएं जहां की तहां बनी रहीं।
राशन दुकानदार संघ रायसेन के मुईन उल्लाह खान, मोहन राय ,रंजीत लोधी,उमेश टोनी पण्ड्या राजू बैरागी ने भी कहा कि राशन दुकानों में सुबह आधा घंटे सर्वर चलने के बाद तकनीकी खराबी से अपेक्षित राशन का वितरण नहीं हो पाया। इससे दुकानदार और उपभोक्ता दोनों परेशान होते रहे। इस सम्बंध में खाद्य आपूर्ति निरीक्षक संदीप भार्गव ने स्वीकार किया कि यह समस्या केवल रायसेन ही नही, बल्कि पूरे प्रदेश की रही। इस बारे में भोपाल कार्यालय को भी अवगत कराया गया है। सुधार होने पर सभी उपभोक्ताओं को राशन वितरण किया जाएगा।
यहां यह उल्लेखनीय है कि इस समय राशन दुकानों में एक सदस्य को एक किलो गेहूं और नौ किलो चावल दिया जा रहा है। इसमें प्रधानमंत्री गरीब कल्याण योजना का पांच किलो चावल भी सम्मिलित है।
क्या बोले उपभोक्ता…..
वह रायसेन के वार्ड 3 की राशन दुकान पर गेंहू चावल शक्कर लेने पिछले 2- 3 दिनों से चक्कर काट रही हैं।लेकिन सर्वर की तकनीकी समस्या के कारण समय पर राशन नहीं मिल पा रहा है।इससे राशन दुकानदारों का तो कोई कसूर नहीं है।देवी बाई बैरागी उपभोक्ता
पीडीएस दुकान पर राशन के लिए वह भी दो तीन दिनों से परेशान हैं।लेकिन सर्वर स्लो चलने से राशन नहीं मिल सका है।दुकानदार पीओएस मशीन के सर्वर में तकनीकी समस्या बता रहे हैं। सुनीता शाक्या उपभोक्ता



