नर्मदा नदी के किनारे पर अब पक्षियों के इलाके में पहुंचा रेत माफिया, अवैध रेत उत्खनन की बढ़ी गतिविधियां
रिपोर्टर : शिवलाल यादव
रायसेन । रायसेन जिले के पड़ोसी जिले सीहोर, नर्मदापुरम (होशंगाबाद), नरसिंहपुर की सीमा अंतर्गत नर्मदा किनारे के गांवों में रेत माफियाओं की गतिविधियां काफी बढ़ी हुई है। रेत माफिया धड़ल्ले से रेत का अवैध करोबार कर रहा है। तीन
जिलों से दिखने वाले इस रेत के अवैध कारोबार पर रोक नहीं लग पा रही है।
नर्मदा नदी के किनारे पर अब पक्षियों के इलाके में पहुंचा रेत माफिया
रेत माफिया गिरोह धड़ल्ले से रेत का अवैध करोबार कर रहा है।तीन जिलों से दिखने वाले इस रेत के अवैध करोबार पर रोक नहीं लग पा रही है। खास बात यह है कि रेत माफिया अब नर्मदा किनारे पक्षियों के इलाके में भी पहुंच गया है। यूरोप, अमेरिका, मंगोलिया व साइबेरिया से कई हजार किमी का सफर तय कर जिले की जीवनी दायिनी नर्मदा नदी किनारे आने वाले इन विदेशी पक्षियों को भोजन का संकट खड़ा हो रहा है। रेत माफिया इन पक्षियों के भोजन वाले स्थान से भी रेत निकाल रहा है। रेत माफिया की दखल से इन पक्षियों की संख्या में नहीं बढ़ी है। एक सप्ताह पूर्व ठंड बढ़ने के साथ इन पक्षियों ने अपनी आमद नर्मदा किनारे दर्ज कराई थी, लेकिन नर्मदा किनारे रेत माफियाओं के शोर शराबे ने पक्षियों के जीवन में खलल डाल दिया है।
भोजन की कमी होने पर पक्षी छोड़ देंगे इलाका….
प्रदेश के वन्य प्राणी विशेषज्ञ राजेश मंगल ने बताया कि प्रवासी पक्षी भोजन की तलाश में ही भारत सहित एशिया के कई देशों में एक साथ पहुंचते हैं। मप्र में नर्मदांचल इन प्रवासी पक्षियों के पसंदीदा स्थान में से एक है।लेकिन यदि इन पक्षियों के जीवन में दखलअंदाजी की जाएगी और भोजन में कमी होगी तो फिर ये पक्षी अपना इलाका छोड़ सकते हैं। नर्मदा किनारे दूसरे एकांत स्थान पर नदी के किनारे अपना बसेरा ये पक्षीयों द्वारा डाल दिया जाता है।
पिछले वर्ष भी जल्दी चले गए थे पक्षी…
वर्ष 2021 में भी प्रवासी पक्षियों ने अपने इलाके को जल्दी छोड़ दिया था। कई सालों से रेत का अवैध करोबार बदस्तूर जारी है। लेकिन अब मशीनों व ट्रेक्टर ट्रालियों डंपर हाइवा के जरिए रेत का अवैध खनन किया जा रहा है। मशीनों के जरिए रेत निकालने के कारण बड़े क्षेत्र से रेत निकाल ली जाती है। ऐसे हालात में पक्षियों का रहवास स्थान भी प्रभावित हो जाता है। विशेषज्ञों के मुताबिक प्रवासी पक्षी अपने पूरे परिवार के साथ भोजन की तलाश में आते हैं और भोजन की प्रचुर मात्रा का आंकलन करने के बाद ही अपना रहवास स्थान बनाते हैं।
ट्रैक्टर में बज रहे गानों का हो रहा शोर
नर्मदा नदी के किनारे जिस स्थान पर रेत माफिया कतार लगाकर रेत निकाल रहा है। वह रायसेन सीहोर और होशंगाबाद जिले के अंतर्गत आता है। नर्मदापुरम में भी कई इलाके हैं जहां पर रेत माफिया चोरी छुपे पहुंचकर रेत का अवैध कारोबार कर रहा है। जिले के चौरास बौरास, कैलकच्छ देवरी केतोघान खरगौन बरेली पतई मांगरोल बगल वाडा अलीगंज साडियां घाट होशंगाबाद ,सीहोर जिले के बांद्राभान, धानाबड़, डोंगरवाड़ा, मरोडा सहित माखननगर, पिपरिया की रेत खदानों पर रेत माफिया सक्रीय है।लेकिन इस ओर जिला प्रशासन सहित माइनिंग विभाग का ध्यान ही नहीं जा रहा है। रेत के खनन व परिवहन पर एनजीटी की रोक लगी हुई है। लेकिन इस रोक का असर जिले में बेअसर नजर आ रहा है।
संयुक्त टीम भी नहीं कर पा रही छापामार कार्रवाई…..
जिला प्रशासन द्वारा टॉस्क फोर्स सहित बखनिज, राजस्व व पुलिस की संयुक्त टीम गठित की गई है। रेत का अवैध खनन व परिवहन करते पाए जाने पर चोरी का केस दर्ज किया जाता है। एक सप्ताह में कोई ठोस कार्रवाई प्रशासनिक टीम नहीं कर सकी हैं । सूत्रों की अगर हम माने तो संयुक्त टीम की हर कार्रवाई की भनक पहले ही रेत माफिया को लग जाती है, जिसके कारण कार्रवाई सफल नहीं हो पाती है। एक सप्ताह पहले ही प्रशासन की टीम ने एक खदान पर कार्रवाई की, लेकिन इस दौरान एक ट्रैक्टर ट्राली ही पकड़ी जा सकी। दरअसल टीम के आने के पहले ही रेत माफिया वहां से फरार हो चुका था।
इस संबंध में राजेश मंगल, वाइल्ड लाइफ विशेषज्ञ का कहना है कि जिले की पुण्य सलिला नर्मदा नदी के किनारे प्रवासी पक्षियों ने अपना रहवास स्थान बनाया हुआ है, भोजन की प्रचुर उपलब्धता के कारण ही ये पक्षी यहां पर आते हैं। लेकिन यदि रेत निकाल ली जाएगी तो पक्षियों के सामने भोजन का संकट खड़ा हो जाएगा। ऐसे में प्रवासी पक्षी अपना इलाका छोड़ सकते हैं। इस संबंध में प्रशासनिक अमले को ठोस कदम उठाए जाने चाहिए।
जिले की रेत खदानों से शासन को 10 करोड़ रुपये की बढ़ी राजस्व आमदनी….
जिले में 56 रेत खदानें हैं। ए बी ग्रुप में खदानें को माइनिंग विभाग अधिकारी आर के कैथल ने सुप्रीम कोर्ट दिल्ली से ग्रीन ट्रिब्यूनल की हरी झंडी दिलाई थी। रेत खदान मालिकों ने शासन को 10 करोड़ रुपये का राजस्व बढ़ाया है।यह सब कुछ प्रयास कलेक्टर, जिला खनिज आरके कैथल, खनिज निरीक्षक राजीव कदम की कोशिशों से संभव हुआ है।




