पापी पेट की खातिर ईट भट्टों पर बच्चों से कराई जा रही बाल मजदूरी, पढ़ने लिखने के की उम्र में मासूम बच्चों से ईट भट्टा मालिक करा रहे मजदूरी
जिम्मेदार विभाग के अधिकारी बने खामोश, आखिर बाल श्रम पर सख्ती से रोक लगाए आखिर कौन…
रिपोर्टर : शिवलाल यादव
रायसेन। पढ़ने लिखने की उम्र में मासूम बच्चे इन दोनों गरीबी के चलते अपने परिवार की कमाई के लिए मजदूरी का जरिया बने हुए हैं । पढ़ाई के दिनों में उनसे उनके अभिभावक कंधे पर मजदूरी की जिम्मेदारी डाल कर उनसे हाड़तोड़ मजदूरी कराई जा रही है। ईट भट्टा मालिक और गरीब मजदूरों की मिलीभगत से जिले में श्रम कानूनों की धज्जियां उड़ाते हुए बच्चों से बाल मजदूरी कराई जा रही है हालांकि राजस्व महकमे के अधिकारियों को यह सब मालूम है ।लेकिन मिलीभगत है यह सब काम नियम विरुद्ध हो रहा है । समाजसेवी संस्थाओं के वालेंटियर बाल मजदूरी रोकने के लिए काम कर रहे है ।एनजीओ के कर्ताधर्ता भी ईट भट्टा मालिकों से ठेका लेकर बच्चों से मजदूरी कराई जाती है । और जिम्मेदार विभागों के अधिकारियों की टीम ईट भट्टों पर मॉनिटरिंग करने भी नहीं जाते। जिसके चलते बाल मजदूर हाड़तोड़ मजदूरी कर शोषण के शिकार हो रहे हैं । लोगों का लोगों का कहना है कि यह बच्चों के पढ़ाई लिखाई हो खेलने कूदने के दिन है ।लेकिन उनसे जबरिया उनके पालक पापी पेट की खातिर मजदूरी कराने के लिए विवश हैं ।
इस संबंध में श्रम अधिकारी जीएस मेहदले का कहना है कि 7 नवंबर 2022 के बाद बाल मजदूरी रोकने के लिए विशेष अभियान चलाया जाएगा । यदि ईद भट्टा और मुरम रेत की खदानों पर बच्चे बाल मजदूरी मिले तो जिम्मेदारों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी।



