फोटो खिंचवाने का करण बने विवाद से बसने से पहले ही टूटा घर
आधुनिकता की दौड़ में अहिरवार समाज आज भी बहुत पीछे ?
रिपोर्टर : विनोद साहू
बाड़ी । आधुनिकता की दौड़ में आज हम जिस सभ्य समाज में रहते हैं उसने बेस्टन कल्चर अपना लिया और शादियों में ब्यूटी पार्लर के साथ ही फोटोशूट का नशा इस कदर हावी हो गया कि सगाई होने से पहले ही दुल्हा-दुल्हन झील में नाँव पर अटखेलियाँ करते जंगल में रोमांस करते हुए बगीचों में अनेक मुद्राओं में फोटो वीडियो का जो चलन होता हैं उसमें संगीत संध्या के नाम पर दुल्हा दुल्हन के परिजनों तमाम मर्यादाओं को ताक में नाच गाने के साथ ही दुल्हा दुल्हन खुद भी नाचते गाते दिखाई देते हैं ।
ऐसे माहौल में जिसमें नग्नता और फूहड़पन को आज सभ्य समाज का सम्पन्नता का पैमाना माना जाता हो, लेकिन बुजुर्ग और सबसे निचले तबके के परिवार आज भी अपनी संस्कृति से जुदा नहीं हो पा रहे हैं ।
महज फोटोशूट पर बसने से पहले उजड़ा संसार ।
गुरुवार की रात शादी समारोह का फंक्शन चल रहा था बाड़ी वार्ड क्रमांक 5 छाया कॉलोनी के निवासी ताराचंद अपनी बेटी रेनू के विवाह समारोह की तैयारी कर माँ हिंगलाज माता के दरवार में शादी का कार्यक्रम रखा तमाम रश्में पूरी होने के बाद स्टेज पर वरमाला के समय फोटोशूट के समय कुछ विबाद हुआँ और इतना बढ़ा कि वर वधु पक्ष में लाठियां बज उठी । जिसमें वधु के पिता नीचे गिरने पर अचेत हो गये ।
घंटों विवाद के बाद दोनों पक्ष सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में इलाज के लिए लाए गए प्राथमिक उपचार के बाद दोनों पक्षों ने आपसी सहमति से किसी प्रकार की कार्यवाही नहीं करने का आवेदन थाना बाड़ी में दिया आखिर में वधु ने कहा इसे लड़के से शादी नही करुंगी और बरात बगैर दुल्हन के लौट गई।



