बारिश के दौरान बच्चे होते हैं परेशान, आंगनवाड़ी और मंदिर का लेना पड़ रहा हैं सहारा
जिम्मेदार अपनी जिम्मेदारी भूले कार्यवाही होना जरूरी
रिपोर्टर : सतीश चौरसिया
उमरियापान | शिक्षा विभाग द्वारा भले ही स्कूलों में अध्ययनरत छात्रों के लिए सारी सुविधाओं की उपलब्धि का दावा किया जा रहा है, लेकिन जमीनी स्तर पर अभी भी कुछ स्कूल भवन अपनी दुर्दशा की कहानी खुद बयां कर रहे हैं, इनमें से ही एक जनपद शिक्षा केन्द्र ढीमरखेड़ा के अंतर्गत आने वाली प्राथमिक शाला डूंड़ी का स्कूल भवन है, जिसे जर्जर घोषित किये हुए तो कई सालों का वक्त बीत चुका है, पर यहां अध्ययनरत छात्र व शिक्षक अभी तक नये भवन की बांट जोह नजर रहे हैं, हर साल बारिश के दिनों में इनके द्वारा स्कूल भवन की मांग तो उठाई जाती है, पर अभी तक समस्या जस की तस बनी हुई है, हालांकि लगभग दो साल पूर्व यहां निर्माण एजेंसी ग्राम पंचायत हरदी को यहां स्कूल भवन बनाने की जिम्मेदारी तो सौंपी गई, पर यहां के तत्कालीन सरपंच सचिव द्वारा निर्माण कार्य तय समय में नहीं कराया गया हैं, लिहाजा बारिश होते ही पुराने और जर्जर घोषित स्कूल भवन के एक कमरे में मजबूरी वश बैठकर कक्षा एक से पांच में अध्ययन करने वाले बच्चे छत से टपकने वाली बारिश की बूंदों और छत की उधड़ रही उधड़न के नीचे गिरने के भय से यहां संचालित आंगनबाड़ी केंद्र और समीप ही बने मंदिर में बैठकर अध्ययन करने मजबूर हैं, जहां जगह की कमी के चलते बीते दो दिनों से शिक्षक खड़े होकर इनको अध्यापन कार्य कराते देखने मिल रहे हैं। इसको लेकर शाला प्रभारी अर्चना झारिया ने बताया की हमारे द्वारा लगातार शिक्षा विभाग के अधिकारियों को वर्तमान समय में स्कूल के संचालन को लेकर भवन की उपलब्धता कराये जाने पत्र लिखने का कार्य किया जा रहा है, पर किराये का भवन तक की उपलब्धता न हो पाने से मंदिर और आंगनबाड़ी भवन में स्कूल का संचालन किया जा रहा है। अतः ऐसी लगातार बारिश की स्थिति में बुधवार को आयोजित शाला प्रबंधन समिति की बैठक में यह निर्णय लिया गया है की जब तक नवीन स्कूल भवन में शाला का संचालन नहीं हो पा रहा है, तब तक विद्यालय को बंद रखा जाये। जिसे बीआरसीसी ढीमरखेड़ा को प्रेषित किया गया है।
इस संबंध में प्रेम कुमार कोरी, बीआरसीसी, ढीमरखेड़ा का कहना हैं कि डूड़ी प्राथमिक शाला के नवीन भवन निर्माण में संबंधित निर्माण एजेंसी द्वारा बहुत देरी की गई है,पर ऐसी स्थिति में स्कूल बंद रखने का भी कोई प्रावधान नहीं है, अतः भवन निर्माण पूर्ण होने तक बच्चों की बैठक व्यवस्था बनाने जिला- स्तर पर प्रस्ताव भेजा गया है, शीघ्र ही समस्या का हल निकाले जाने का प्रयास किया जायेगा।
बृजमोहन दाहिया, इंजीनियर, शिक्षा विभाग का कहना है कि ड़ूंड़ी स्कूल का नवीन भवन जिसका निर्माण नौ लाख की लागत से कराया जा रहा है, उसमें बीच में राशि का भुगतान अटकने से कार्य में देरी हुई है, अतः गर्मी के दिनों से लगातार निर्माण कार्य जारी है, वर्तमान में निर्माण कार्य पूर्ण हो चुका है, सिर्फ एक कमरे की छपाई का कार्य शेष है, जिसको लेकर आज ही हमारे द्वारा वहां सरपंच के साथ जाकर संबंधित ठेकेदार को इसी हफ्ते में समस्त कार्य को पूर्ण कराने की बात कही गई है।



