भगवान शिव पाखंड से नहीं प्रेम से मिलते हैं : राजनारायण वैष्णव
ब्यूरो चीफ : शब्बीर अहमद
बेगमगंज । तहसील मुख्यालय के पास ग्राम सागौनी उमरिया स्थित टीकाराम गौर के निवास पर चल रहे पंच दिवसीय शिवार्चन रुद्राभिषेक के अंतिम दिवस में पंडित राजनारायण वैष्णव ने कहा – गंगा को पृथ्वी पर लाने के लिये भोले बाबा ने ही सहयोग किया, क्योंकि गंगा के प्रचण्ड दबाव और प्रवाह को पृथ्वी कैसे सहन करें, इस समस्या के समाधान के लिए भगवान शिव ने अपनी जटाओं में गंगा को समाहित किया और फिर अनुकूल गति के साथ गंगा का प्रवाह उनकी जटाओं से हुआ। ऐसे अनेक सृष्टि से जुड़े संकट और उसके विकास से जुड़ी घटनाएँ हैं, जिनके लिये भगवान शिव ने अपनी शक्तियों, तप और साधना का प्रयोग करके दुनिया को नव-जीवन प्रदान किया।
शिव का अर्थ ही कल्याण है, वही शंकर हैं, और वही रुद्र भी हैं। शंकर में ‘शं’ का अर्थ कल्याण है और ‘कर’ का अर्थ करने वाला। रुद्र में ‘रु’ का अर्थ – दुःख और ‘द्र’ का अर्थ हरना अथवा हटाना है। इस प्रकार रुद्र का अर्थ हुआ – दुःख को दूर करने वाले अथवा कल्याण करने वाले।
भौतिक एवं भोगवादी भागदौड़ की दुनिया में श्रावण पर्व भी दुःखों को दूर करने एवं सुखों का सृजन करने का प्रेरक है। भगवान भोलेनाथ भाव के भूखे हैं, कोई भी उन्हें सच्ची श्रद्धा, आस्था और प्रेम के पुष्प अर्पित कर अपनी मनोकामना पूर्ति की प्रार्थना कर सकता है। दिखावे, ढोंग एवं आडम्बर से मुक्त विद्वान-अनपढ़, धनी-निर्धन कोई भी अपनी सुविधा तथा सामर्थ्य से उनकी पूजा और अर्चना कर सकता है, क्योंकि शिव भोले भण्डारी हैं, वे तो भक्तों के भावों में निवास करते है, ना कि दिखावे के पाखंड में।
शिवार्चन रुद्राभिषेक के समापन दिवस पर गौर परिवार सहित ग्रामीणजन ने उपस्थित होकर भगवान शिव जी की पूजन अर्चना कर गंगा विसर्जन किया।



