ज्योतिष

आज का पंचांग आज का पंचांग रविवार, 28 जनवरी 2024

आचार्य श्री गोपी राम (ज्योतिषाचार्य) जिला मुख्यालय हरियाणा मो. 9812224501
✦••• जय श्री हरि •••✦
🧾 आज का पंचांग 🧾
रविवार 28 जनवरी 2024

भगवान सूर्य जी का मंत्र : ऊँ घृणि सूर्याय नम: ।।
🌠 रविवार को की गई सूर्य पूजा से व्यक्ति को घर-परिवार और समाज में मान-सम्मान की प्राप्ति होती है। रविवार के दिन उगते हुए सूर्य को देव को एक ताबें के लोटे में जल, चावल, लाल फूल और रोली डालकर अर्ध्य करें।
इस दिन आदित्य ह्रदय स्रोत्र का पाठ करें एवं यथा संभव मीठा भोजन करें। सूर्य को आत्मा का कारक माना गया है, सूर्य देव को जल देने से पितृ कृपा भी मिलती है।
रविवार के दिन भैरव जी के दर्शन, आराधना से समस्त भय और संकट दूर होते है, साहस एवं बल की प्राप्ति होती है। रविवार के दिन जी के दर्शन अवश्य करें ।
रविवार के दिन भैरव जी के मन्त्र ” ॐ काल भैरवाय नमः “ या ” ॐ श्री भैरवाय नमः “ की एक माला जाप करने से समस्त संकट, भय दूर होते है, रोगो, अकाल मृत्यु से बचाव होता है, मनवांछित लाभ मिलता है।
🔮 शुभ हिन्दू नववर्ष 2023 विक्रम संवत : 2080 नल, शक संवत : 1945 शोभन
🌐 संवत्सर नाम अनला
🔯 शक सम्वत : 1945 (शोभकृत् संवत्सर)
☸️ काली सम्वत् 5124
🕉️ संवत्सर (उत्तर) पिंगल
☣️ आयन – उत्तरायण
☀️ ऋतु – सौर शिशर ऋतु
⛈️ मास – माघ मास
🌖 पक्ष – कृष्ण पक्ष
📆 तिथि – रविवार माघ माह के कृष्ण पक्ष तृतीया तिथि 06:11 AM तक उपरांत चतुर्थी
✏️ तिथि स्वामी : तृतीया तिथि के देवता हैं यक्षराज कुबेर। इस तिथि में कुबेर का पूजन करने से व्यक्ति धनवान बन जाता है।
💫 नक्षत्र – नक्षत्र मघा 03:52 PM तक उपरांत पूर्व फाल्गुनी
🪐 नक्षत्र स्वामी – नक्षत्र का स्वामी केतु है। यह नक्षत्र सिंह राशि में होता है और इसके देवता होते हैं पितर।
🔊 योग – सौभाग्य योग 08:50 AM तक, उसके बाद शोभन योग
प्रथम करण : वणिज – 04:51 पी एम तक
द्वितीय करण : विष्टि – 06:10 ए एम, जनवरी 29 तक बव
🔥 गुलिक काल : रविवार को शुभ गुलिक काल 02:53 पी एम से 04:17 पी एम
🤖 राहुकाल (अशुभ) – सायं 16:34 बजे से 17:56 बजे तक। राहु काल में शुभ कार्य करना वर्जित माना गया है।
⚜️ दिशाशूल – रविवार को पश्चिम दिशा की यात्रा नहीं करनी चाहिये, यदि अत्यावश्यक हो तो पान एवं घी खाकर यात्रा कर सकते है।
🌞 सूर्योदयः- प्रातः 06:37:00
🌅 सूर्यास्तः- सायं 05:23:00
👸🏻 ब्रह्म मुहूर्त : 05:25 ए एम से 06:19 ए एम
🌇 प्रातः सन्ध्या : 05:52 ए एम से 07:12 ए एम
🌟 अभिजित मुहूर्त : 12:13 पी एम से 12:56 पी एम
🔯 विजय मुहूर्त : 02:22 पी एम से 03:05 पी एम
🐃 गोधूलि मुहूर्त : 05:54 पी एम से 06:21 पी एम
🌌 सायाह्न सन्ध्या : 05:57 पी एम से 07:16 पी एम
💧 अमृत काल : 01:11 पी एम से 02:59 पी एम
🗣️ निशिता मुहूर्त : 12:07 ए एम, जनवरी 29 से 01:00 ए एम, जनवरी 29
🚓 यात्रा शकुन – इलायची खाकर यात्रा करें।
👉🏽 आज का मंत्र – ॐ घृणि : सूर्याय नमः।
🤷🏻‍♀️ आज का उपाय – विष्णु मंदिर में पीतांबर भेंट करें।
🌳 वनस्पति तंत्र उपाय – बेल के वृक्ष में जल चढ़ाएं।
⚛️ पर्व एवं त्यौहार – भद्रा/ मूल समाप्त/ स्वतंत्रता सेनानी लाला लाजपत राय जयन्ती, सेना प्रमुख कोडंडेरा मडप्पा करियप्पा जन्म दिवस, डेटा संरक्षण दिवस, सिविल सेवक एस वेंकटरमणन जन्म दिवस, ओ पी नैय्यर स्मृति दिवस, सूचना गोपनीयता दिवस, मुग़ल शासक हुमायूँ स्मृति दिवस, प्रमुख फिजिस्‍ट राजा रामन्‍ना जन्म दिवस।
✍🏼 विशेष – तृतीया तिथि में नमक का दान तथा भक्षण दोनों ही त्याज्य बताया गया है। तृतीया तिथि एक सबला अर्थात बल प्रदान करने वाली तिथि मानी जाती है। इतना ही नहीं यह तृतीया तिथि आरोग्यकारी रोग निवारण करने वाली तिथि भी मानी जाती है। इस तृतीया तिथि की स्वामिनी माता गौरी और इसके देवता कुबेर देवता हैं। यह तृतीया तिथि जया नाम से विख्यात मानी जाती है। यह तृतीया तिथि शुक्ल पक्ष में अशुभ तथा कृष्ण पक्ष में शुभफलदायिनी मानी जाती है।
Vastu Tips 🗺️
घर की उत्तर-पूर्व दिशा में भगवान शिव का वास माना जाता है और उन्हें आसमानी व नीला रंग बेहद पसंद है, इसलिए वास्तु शास्त्र में घर की उत्तर-पूर्व दिशा में पीले रंग गहरे नीले या आसमानी रंग का फर्श बनवाने की सलाह दी जाती है। इससे भगवान का आर्शीवाद तो आपके ऊपर बना ही रहता है। साथ ही घर के वास्तु संबंधी समस्या से भी छुटकारा मिलता है। वहीं धन की देवी मां लक्ष्मी को खुश रखने के लिए घर की पश्चिम दिशा में सफेद रंग के फर्श का चुनाव करना चाहिए, लेकिन इस रंग के फर्श पर ज्यादा डिजाइन या आकृति नहीं बनवानी चाहिए।
❇️ जीवनोपयोगी कुंजियां ⚜️
ये हैं तलवों को मसाज करने के फायदे
रात में सोने से पहले तिल के तेल से तलवों की मालिश करने से शरीर में ब्लड सर्कुलेशन सही होता है।
रोजाना करीब 10 मिनट तक तिल के तेल से तलवों की मालिश करने से आंखों रोशनी बढ़ती है।
अगर आप अक्सर डिप्रेशन या तनाव महसूस करते हैं तो रोजाना तिल के तेल से अपने तलवों का मसाज करें। इससे तनाव चिंता दोनों से राहत मिलती है।
यदि आप नियमित रूप से पैरों के तलवों की मालिश करते है, तो रात में बेहतर नींद आती है।
🍂 आरोग्य संजीवनी 🍁
आधे सर में दर्द ज़्यादा हो तो कैसे ठीक करें?
अर्धांग्वात – आधे सिर का दर्द। दिन के खास समय पर आरम्भ, अन्त। सबसे पहले तो शिरःशूलादि वज्र रस (वटी/टैबलेट) का सेवन आरम्भ। साथ ही मस्तिष्क को बलदायी एक औषधि – स्मृति सागर रस या स्मृता चूर्ण ( स्वानुभूत)। पथ्यादि क्वाथ भी चलायें साथ। आराम तो तुरंत मिलेगा, जङ से भी ठीक होगा।
🌷 गुरु भक्ति योग 🌸
“आत्मा और शरीर: इन दोनों के बीच संतुलन कैसे बनाएं?”
दर असल आत्मा या जीवात्मा हम हैं, शरीर हम नहीं हैं। शरीर तो हर योनि में अलग अलग मिलते हैं। हम यानि जीवात्मा शरीर का उपयोग एक उपकरण के रूप में प्रकृति के अचूक नियमों के दायरे में रह कर सकते हैं और करते रहे हैं। प्रकृति के नियमों का दायरा आम आवश्यकताओं की पूर्ति से कहीं अधिक बड़ा है, ताकि किसी असाधारण परिस्थिति में भी उसका उपयोग किया जा सके।
असाधारण परिस्थितियाँ स्वाभाविक रूप से भी बनती है और आवश्यकता से अधिक इंद्रिय तृप्ति के लिए जीवात्मा अंतःकरण के माध्यम से स्वयं पैदा करता है।
उदाहरण —भूख लगना और भूख शांत करने के लिए भोजन खाना एक साधारण परिस्थिति है, परंतु स्वादिष्ट वस्तु को आवश्यकता से अधिक ख़ाना इंद्रिय तृप्ति के लिए पैदा की गई परिस्थिति है।
इंद्रिय तृप्ति के लिए पैदा की गयीं परिस्थितियाँ ही हमारे सारे विकारों — राग, द्वेष, काम, क्रोध, मद, मत्सर आदि विकारों की जन्मदाता हैं।
ऐसी दशाओं में ही आत्मा और शरीर का संतुलन बिगड़ता है। तो सीधी सी बात है इंद्रियों पर नियंत्रण करके ही शरीर और जीवात्मा के बीच संतुलन रखा जा सकता है।
आपके प्रश्न का संक्षिप्त जवाब तो दे दिया, परंतु इंद्रियों पर नियंत्रण कर पाना बहुत ही टेड़ी खीर है। कथाओं में बड़े बड़े ऋषि-मुनियों द्वारा भी इंद्रियों के आगे घुटने टेकने की बातें पढ़ने को मिलती हैं। और यह सब हमारी अपनी ही आपबीतियाँ हैं तो बाहर देखने की क्या आवश्यकता है।
तो बस शमदमादि साधनों को व्यवहार में ला पायेंगे तो इंद्रियों पर नियंत्रण होगा और हमारे शरीर और जीवात्मा का संतुलन बरकरार रहेगा। इस छोटी सी बात में बहुत, बहुत बड़ी बात छिपी हुई है।
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⚜️ तृतीया तिथि केवल बुधवार की हो तो अशुभ मानी जाती है। अन्यथा इस तृतीया तिथि को सभी शुभ कार्यों में लिया जा सकता है। आज तृतीया तिथि को माता गौरी की पूजा करके व्यक्ति अपनी मनोवाँछित कामनाओं की पूर्ति कर सकता है। आज तृतीया तिथि में एक स्त्री माता गौरी की पूजा करके अचल सुहाग की कामना करे तो उसका पति सभी संकटों से मुक्त हो जाता है। आज तृतीया तिथि को भगवान कुबेर जी की विशिष्ट पूजा करनी चाहिये। देवताओं के कोषाध्यक्ष की पूजा आज तृतीया तिथि को करके मनुष्य अतुलनीय धन प्राप्त कर सकता है।
तृतीया तिथि में जन्म लेने वाला व्यक्ति मानसिक रूप से अस्थिर होता है अर्थात उनकी बुद्धि भ्रमित होती है। इस तिथि का जातक आलसी और मेहनत से जी चुराने वाला होता है। ये दूसरे व्यक्ति से जल्दी घुलते मिलते नहीं हैं बल्कि लोगों के प्रति इनके मन में द्वेष की भावना भी रहती है। इनके जीवन में धन की कमी रहती है, इन्हें धन कमाने के लिए काफी मेहनत और परिश्रम करना पड़ता है।

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