राजस्व एवं वन सीमा के निर्धारण की मांग
रिपोर्टर : सतीश चौरसिया
उमरियापान । आदिवासी बाहुल्य ढीमरखेडा विकासखंड के कई गांवों में राजस्व एवं वन सीमा का निर्धारण नहीं हैं । जिसके चलते आए दिन विवाद की स्थिति निर्मित होती रहती है । इस पर शहडोल सांसद हिमाद्री सिंह के निर्देश पर सासंद प्रतिनिधि पदमेश गौतम ने कलेक्टर अवि प्रसाद को पत्र प्रेषित कर इन गांवों में राजस्व एवं वन सीमा निर्धारण कर अभिलेख दुरूस्त कराने की मांग की है ।
पत्र के माध्यम से बताया गया कि ढीमरखेड़ा तहसील क्षेत्र के ग्राम पंचायत खंदवारा के ग्राम बंदौरी, ग्राम पंचायत देवरीपाठक के ग्राम सहजपुरी एवं तिघरा सहित अन्य ग्रामों में राजस्व एवं वन सीमा निर्धारित नहीं है । सन् 1962 में राजस्व विभाग द्वारा ढीमरखेड़ा क्षेत्र के विभिन्न ग्रामों की शासकीय भूमि वन विभाग को दी गई थी, जिसकी सीमा
निर्धारित नहीं होने के कारण वन विभाग द्वारा भूस्वामियों की निजी भूमि में कब्जा किया जा रहा है । अनेक खसरे राजस्व अभिलेख में दर्ज हैं और वन विभाग के भी अभिलेख में दर्ज है। जिसके चलते आए दिन वाद विवाद की स्थिती निर्मित होती रहती है । पदमेश गौतम ने ढीमरखेड़ा तहसील क्षेत्र अंतर्गत राजस्व एवं वन विभाग के अधिकारियो की संयुक्त टीम गठित कर राजस्व एवं वन सीमा निर्धारित कराने का आग्रह किया है ।



