मध्य प्रदेश

बहुत मुश्किल है डगर पनघट की, भीषण गर्मी, दुर्गम रास्ते, और बूंद-बूंद पानी की दरकार

शहर के बाद अब ग्रामीण अंचल में जल संकट की गहराया
ब्यूरो चीफ : शब्बीर अहमद
बेगमगंज । शहर में तो जल संकट गहराया हुआ ही है 3 दिन में एक दिन शहर वासियों को पानी नगर पालिका द्वारा पैदा किया जा रहा है वहीं अब ग्रामीण क्षेत्रों में भी जल संकट गहरा गया है। भीषण गर्मी की वजह से हजारों लोग भारी जलसंकट से जूझ रहे हैं एक तरफ नौतपा के दिन और दूसरी तरफ पर्याप्त पानी नहीं होने की वजह से लोगों पर दोतरफा मार पड़ रही है. कई जगहों पर खेतों में बने कुएं से महिलाएं बच्चे अपने सिर पर पानी की खेप लाने के लिए मजबूर हो रहे हैं।
भीषण गर्मी के दौरान तहसील के ग्रामीण अंचल में अब जल संकट से नई परेशानी खड़ी हो गई है। कई जगहों पर स्थिति ऐसी है कि लोग बूंद-बूंद पानी के लिए तरस रहे है। वहीं राज्य सरकार के सारे दावे फेल दिखाई दे रहे हैं। सुल्तानगंज, टेकापार खुर्द, जसरथी से लेकर केशलोंन, मढिया गुसांई सुनवाहा तक जल संकट की समस्या लोगों को सता रही है। लोग कई किलोमीटर चल कर खेतों और जंगलों में बने कुआं से पानी लाने के लिए विवश है।
‘जल ही जीवन है’, ‘जल-जीवन मिशन, ‘हर घर नल, हर घर जल’, ये तमाम योजनाएं सरकार लंबे वक्त से चला रही है। लेकिन तहसील की ये तस्वीरें कुछ और ही बयां कर रही हैं। तहसील मुख्यालय से करीब 30 किलोमीटर दूर ग्राम पंचायत घाना कलां के गांव टेकापार खुर्द के करीब एक हजार से अधिक ग्रामीण, तो ग्राम जसरथी के करीब एक हजार की आबादी इन दिनों भीषण जलसंकट से जूझ रही हैं। दोनो गांव सहित करीब एक दर्जन गांवों के हैंड पंप, कुआं आदि जल स्रोतो का जल स्तर नीचे जाने से सूखने की कगार पर हैं। इन्ही कुओं में जो थोड़ा बहुत जल संग्रह होता हैं वह गंदा मटमेला पानी ग्रामीण कुएं में अंदर घुस कर लोटा, गिलास से उलीच कर बाल्टी भर कर पानी निकल रहे हैं और ऐसा ही पानी पीने को मजबूर हैं। वही कुछ ग्रामीण गांव से एक दो किलोमीटर दूर खेतों और जंगल के पास बने कुआं से पानी भर कर लाने को मजबूर हैं।
टेकापार खुर्द और जसरथी गांव के लोगों को पानी भरना मानो किसी जंग जीतने जैसा है, पानी के लिए ग्रामीण दो बजे रात को उठकर गांव से 1 से 2 किलोमीटर की दूरी पत्थरीले रास्तों से तय करके जंगल से लगे खेतों में पहुंचते और रस्सी के सहारे कुओं में नीचे उतरकर कुप्पों में पानी भरते । पानी के लिए मशक्कत करने वाले लोगों को पत्थरीले रास्तों से गिरने का खतरा तो है ही साथ जगली क्षेत्र होने की वजह से हिंसक वन्य जीवों से भी बचना किसी चुनौती से कम नहीं है।
तहसील के इन दिनों करीब दर्जन से अधिक ऐसे गांव है जहां भीषण गर्मी के बीच जल संकट है। लेकिन इस और शासन प्रशासन कोई ध्यान नहीं दे रहा जिससे ग्रामीणों में काफी आक्रोश पनप रहा है। पनघट की डगर महिलाओं के लिए विशेष कर खतरनाक साबित हो रही है।

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