मध्य प्रदेश

सिलौंडी बस स्टैंड में शौचालय न होने से महिलाएं और छात्राएं रोज हो रही शर्मिंदा

विश्व महिला दिवस की औपचारिकता पर उठे सवाल
रिपोर्टर : सतीश चौरसिया
उमरियापान । क्षेत्र के सबसे बड़े बस स्टैंड सिलौंडी में मूलभूत सुविधा के अभाव से महिलाएं और छात्राएं रोज शर्मिंदगी का सामना करने को मजबूर हैं । बस स्टैंड में प्रसाधन (शौचालय) की व्यवस्था नहीं होने के कारण यात्रियों, खासकर कॉलेज की छात्राओं और महिलाओं को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है ।
बस का इंतजार कर रही महिलाओं और छात्राओं का कहना है कि जब मूलभूत सुविधाएं ही उपलब्ध नहीं हैं तो केवल विश्व महिला दिवस मनाने का क्या मतलब रह जाता है । उन्होंने कहा कि रोज बस स्टैंड पर घंटों इंतजार करना पड़ता है, लेकिन प्रसाधन की व्यवस्था नहीं होने के कारण उन्हें मजबूरी में सड़क किनारे खुले में जाना पड़ता है, जिससे उन्हें शर्मिंदगी झेलनी पड़ती है।
यात्रियों ने बताया कि वर्ष 2016 में सिलौंडी में आयोजित जनदर्शन कार्यक्रम के दौरान तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने बस स्टैंड में प्रसाधन और अन्य सुविधाएं उपलब्ध कराने की घोषणा की थी । लेकिन लगभग 10 वर्ष बीत जाने के बाद भी यह घोषणा कागजों से बाहर नहीं आ सकी है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि क्षेत्र में महिला जनप्रतिनिधियों की संख्या भी अधिक है और प्रशासनिक पदों पर भी महिलाएं कार्यरत हैं, इसके बावजूद गांव और क्षेत्र की बालिकाओं तथा महिलाओं को आज भी मूलभूत सुविधा के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है ।
ग्रामीणों ने कहा कि शासन द्वारा महिला दिवस के अवसर पर ग्राम सभाएं और कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर महिलाओं की समस्याओं का समाधान नहीं हो पा रहा है। स्थानीय लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि सिलौंडी बस स्टैंड में जल्द से जल्द शौचालय और अन्य आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं, ताकि महिलाओं और छात्राओं को इस तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े।

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