दो साल से बंद पड़े आश्रम, उन्नयन न होने से छात्रों को नहीं मिल पा रहा प्रवेश, स्टाफ ले रहा वेतन

भवन भी होने लगा खंडहर, अधीक्षक सहित अन्य घर बैठे ले रहे वेतन
सिलवानी। दो साल पहले प्रतापगढ क्षेत्र में आदिम जाति विभाग के दो आश्रम संचालित होते थे, लेकिन कोरोना संक्रमण के चलते इन आश्रमों में ग्रामीणों ने अपने बच्चे भेजना बंद कर दिया था, जब से अब तक यह आश्रम बंद हुए तो अब तक बने हुए हैं, जबकि इन आश्रमों को संचालित करने के लिए अब अभिभावक और छात्र उम्मीद लगाए बैठे हुए हैं। लेकिन विभाग ने इन आश्रमों के छात्रावासों में उन्नयन के लिए प्रस्ताव बनाकर शासन को भेजा है। लेकिन तीन सालों में शासन न तो इन आश्रमों का उन्नयन कर पाया न ही अधीक्षक वर्तमान व्यवस्था से संचालित कर रहे हैं बल्कि उन्नयन का इंतजार कर रहे हैं, उल्लेखनीय है कि दोनों छात्रावासों में 100- 100 छात्रों की क्षमता थी, छात्र यहीं पर पढ़ाई के साथ रहना खाना सब शासन की ओर से करते थे, लेकिन अब तीन साल से छात्रों को उन्हें यह व्यवस्था नहीं मिल पा रही है। जबकि कन्या आश्रम को संचालित करने वाला स्टाफ भी आश्रम में ताला लगाकर अन्य छात्रावास में पदस्थ होकर काम कर रहे हेँ जबकि उनकी पोस्टिंग प्रतापगढ़ में हैं, यहां उन्हें आना चाहिए, लेकिन वह नहीं आ रहे हैं। बही बालक आश्रम के अधीक्षक हरिशरण व्यास और दो चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी घर बैठे वेतन प्राप्त कर रहे है। जो किसी अन्य संस्था में पदस्थ नही हुए हैं।
वही हरिशरण व्यास अधीक्षक का कहना है कि आप चालू करवा दो हम तो यही चाह रहे हैं, कोरोना के बाद से बंद हैं, शासन के पास उन्नयन की फाईल गई हैं, लेकिन अभी तक कोई निर्णय नहीं हुआ है। जैसे ही उन्नयन होगा तो उसके मुताबिक छात्रों को प्रवेश दिया जाएगा। हम अभी सिलवानी छात्रावास में काम कर रहे हैं।
इस संबंध में सीपी सोनी, संयोजक, आदिम जाति कल्याण विभाग का कहना है कि इस सत्र से प्रवेश शुरु करवा रहे हैं, उन्नयन होने के बाद जो भी व्यवस्था होगी उसके मुताबिक काम किया जाएगा। हम इस पर तत्काल एक्शन ले रहे हैं।



