शिक्षक दिवस पर राष्ट्रपति पुरुस्कार से सम्मानित होंगे रायसेन के शिक्षक
नीरज सक्सेना ने आदिवासी भील समाज में शिक्षा के लिए अलख जगाई, स्वयं के खर्चे से स्कूल की रंगत बदली
रायसेन । रायसेन जिला मुख्यालय से 48 किलोमीटर दूर शासकीय प्राथमिक शाला सालेगढ़ के शिक्षक नीरज सक्सेना का राष्ट्रपति पुरस्कार के लिए चयन हुआ है। 5 सितंबर को दिल्ली में महामहिम राष्ट्रपति द्वारा उनको सम्मानित किया जाएगा।
मध्यप्रदेश के 6 शिक्षकों में से रायसेन के नीरज सक्सेना का चयन हुआ है। उनकी इस उपलब्धि पर रायसेन के शिक्षा जगत में खुशी का माहौल है।
स्कूल में जब पदस्थापना हुई थी तब मात्र 10 बच्चे थे, आज 130 पहुंची बच्चों की संख्या
सालेगढ़ के शिक्षक नीरज सक्सेना की जब इस स्कूल में पदस्थापना हुई थी तब आदिवासी भील जाति के कुल इस स्कूल में 20 बच्चे दर्ज थे। जिसमें से 10 बच्चे ही स्कूल आते थे। इसके बाद उन्होंने सबसे पहले स्कूल की रंगत बदली। पूरे स्कूल को हरा भरा करने के साथ ही स्कूल में जिससे बच्चों का मन लगे और उनकी संख्या बड़े इसके लिए उनके द्वारा स्कूल में तरह-तरह के प्रयोग भी किए गए। जिससे आज उनके स्कूल के बच्चों की संख्या 130 पहुंच गई। वहीं स्कूली छात्र छात्राओं में जोश जुनून और शिक्षा के प्रति अलख जगाने वाले नीरज सक्सेना बताते हैं कि वह उनके स्कूल कच्चे मार्ग से पहुंचते हैं और बारिश के दिनों में जब कोई साधन नहीं रहता तो वह अक्सर बैलगाड़ी से अपने स्कूल पहुंचा करते थे।
स्वयं के खर्चे से बच्चों को गणवेश सहित स्कूल में कराए कई कार्य
आदिवासी भील समाज के लोग सालेगढ़ में रहते हैं। जिस कारण उनको शिक्षा से इतना लगाव नहीं था और वह लोग अपने बच्चों को स्कूल भी नहीं पहुंचाते थे। शिक्षक नीरज सक्सेना ने बच्चों की स्कूल आने में संख्या तो बढ़ाई है, साथ में उन्होंने स्वयं के खर्चे से स्कूल की रंगत सहित बच्चों को गणवेश भी उपलब्ध कराएं। जिससे बच्चे गणवेश में ही स्कूल आते हैं। वहीं स्कूल का सौंदर्यीकरण करने में आसपास की महिलाओं का काफी योगदान रहा।



