धार्मिक

शिव-शक्ति के क्रीड़ा स्थल जामगढ़-भगदेई की अनूठी परंपराः शक्ति के साथ शिव की पूजा

रिपोर्टर : कमल याज्ञवल्क्य
बरेली । रायसेन जिले के बरेली तहसील मुख्यालय के करीब के ऐतिहासिक गांव जामगढ़-भगदेई जहां अपनी अनमोल प्राचीन पुरातात्विक धरोहरों के लिए विख्यात हैं, वहीं शिव- शक्ति के क्रीड़ा स्थल के रूप में भी इन गांवों की पहचान है। यहां की परंपराएं भी अनोखी हैं। नवरात्र पर्व पर यहां शक्ति के साथ शिवजी की पूजा की भी परंपरा है।
निराली हैं मां भगदेवी- वाराही माता
भगदेई और जामगढ़ में प्राचीन ऐतिहासिक स्थलों पर सदियों से विराजीं मां की महिमा निराली है। भगदेई में तांत्रिक प्रतीकों से सुसज्जित प्राचीन देवीमठ की अधिष्ठात्री मां भगदेवी चमत्कारों के लिए विख्यात हैं। तंत्र क्षेत्र के साधकों के लिए यह स्थान आसाम के प्रसिद्ध मां कामाख्या देवी धाम जैसा है, वहीं विध्याचल की तलहटी में वाराही माता का प्राचीन स्थान अपनी विशेषता के लिए जाना जाता है। यहां नवरात्र पर्व पर मां के दरबार में आज भी शेर हाजिरी भरने आता है। यहां साधना कर रहे संत रामसेवकदास त्यागी महाराज बताते हैं कि विशेष पर्वों के साथ ही नवरात्र पर्व पर मां वाराही के दरबार में अभी भी एक बुजुर्ग शेर मां के दर्शनों के लिए आता है। उन्होंने बताया कि रायसेन जिले के अलावा विदिशा, भोपाल तथा जबलपुर आदि जिलों के भक्त भी यहां मां की पूजा करने आते हैं।
नवरात्र में आते हैं भक्त
जामगढ़- भगदेई के प्राचीन ऐतिहासिक शिव मंदिर और शिव गुफा पर नवरात्र पर्व पर भगवान शिव की पूजा करने भक्त आते हैं। शिव गुफा पर शिव जी सेवा में रहने वाले पंडित नीरज शर्मा ने बताया कि वैसे तो सदैव ही भगवान के शिव के दरबार भक्त आते रहते हैं किन्तु अभी नवरात्र पर्व पर मां भवानी की पूजा के बाद भोले बाबा की पूजा करने भी भक्त आ रहे हैं। भगदेई के प्राचीन देवीमठ और शिव मंदिर के पुजारी पंडित महेन्द्र बाबाजी ने बताया कि जामगढ़- भगदेई सहित यह क्षेत्र प्राचीन काल से ही शक्ति और शिव के उपासक रहे हैं। इन ऐतिहासिक स्थानों को शिव शक्ति का क्रीड़ा स्थल भी माना जाता है। उन्होंने बताया कि एक किवदंती है कि देवी माँ के मठ में सैंकड़ों बर्षो पहले ऐसे पुजारी साधना किया करते थे, जो माँ की पूजा के बाद अपना शीश माँ के चरणों में अर्पित कर देते थे। देवी मां की कृपा से वे फिर जीवित हो जाते थे। बताया जाता है कि एक बार देवी मां ने पुजारी से कहा न तो अब वह समय है और न ही इसकी आवश्यकता है, किन्तु देवी मां का यह हठी भक्त नहीं माना और उसने अपना सर्वस्व सदा के लिए माँ के चरणों में अर्पित कर दिया। यहां शक्ति के साथ शिव जी की उपासना और पूजा की परंपरा है। इसलिए भक्त चमत्कारी देवीमठ में पूजा के बाद प्राचीन मंदिर में शिव जी के दर्शन करने आते हैं।
उपेक्षित हैं शक्ति और शिव के पावन धाम
इतिहासकार और विश्व विख्यात पुरातत्वविद डॉक्टर नारायण व्यास के अनुसार कभी जामगढ़- भगदेई का यह क्षेत्र बड़े तीर्थ के रूप में जाना जाता रहा है। यहाँ उपलब्ध टूल्स इसका प्रमाण हैं। पटेल शशिमोहन शर्मा एवं विद्युत ठेकेदार मनीष शर्मा कहते हैं कि जिला प्रशासन की उपेक्षा के चलते जामगढ़- भगदेई के ऐतिहासिक प्राचीन स्थल अपने पुरावैभव पहचान से वंचित हैं।

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